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बुढाना विधानसभा पर अजीबोगरीब स्थिति जहां सपा व रालोद में सीट किसको मिलेगी इसको लेकर जोर आजमाइश चल रही है वही बीजेपी का वर्तमान विधायक भी कैसे बचे, टिकट इसको लेकर लगें है, उधेड़बुन में .......


जहां बुढाना में पिछड़ा सम्मेलन कर समाजवादी अप्रत्यक्ष रूप से रालोद पर दबाव बनाने का कर चुकी है प्रयास सपा के जिलाध्यक्ष आते हैं कि सपा के कोटे में आई विधानसभा सीट, वही रालोद प्रमुख पूर्व में ही रैली कर  बुढाना विधानसभा पर कर चुके हैं अपना दावा पेश इतना ही नहीं केवल गठबंधन में ही हो खींचतान भाजपा में भी जबरदस्त चल रही है उठापटक जहां वर्तमान विधायक उमेश मलिक को टिकट बचाने के लिए करनी पड़ रही है जद्दोजहद, उमेश मलिक के टिकट में सबसे बड़ा रोड़ा उसके पुत्र द्वारा दिया गया देशद्रोही बयान एवं भाजपा के प्रति किसानों का विरोध, भाजपा विधायक को राम कुमार सेहरावत नितिन मलिक 
से मिल रही है।  जबरदस्त फाइट,बीजेपी हर कीमत पर जाट उम्मीदवार को ही देगी बुढ़ाना से टिकट, इसी भाजपा के टिकट के आधार को मांग के समाजवादी चाहती है सीट रहे उनके कोटे में और प्रमोद



त्यागी बने उम्मीदवार, लेकिन रालोद के दो पूर्व विधायकों के बीच में भी टिकट को लेकर जबरदस्त जोर आजमाइश राजपाल बालियान व योगराज सिंह आमने-सामने जहां राजपाल  बालियान के साथ महेंद्र सिंह टिकैत परिवार का समर्थन माना जाता है वही योगराज सिंह का टिकैत  परिवार से विवाद भी किसी से छिपा नहीं है। रालोद के पूर्व विधायक नवाजिश आलम पहले ही छोड़ चुके हैं  बुढाना विधानसभा से अपना दावा अभी उनके सामने भी जबरदस्त दुविधा चुनाव लड़े तो लड़े कहां से, बसपा के पत्ते खुलने से स्थिति स्पष्ट हो पाना मुश्किल, जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव लड़ कर चर्चा में आए गौरव त्यागी भी पेश कर सकते हैं रालोद से अपना दावा इससे समाजवादी को लग सकता है झटका,जनपद मुजफ्फरनगर की बुढाना विधानसभा सीट पर अजीबोगरीब स्थिति उत्पन्न हो गई है जहां राष्ट्रीय लोक दल व समाजवादी पार्टी दोनों ही अपनी रेलिया कर प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से बुढाना विधानसभा सीट पर अपना दावा ठोक चुकी है वही बीजेपी के लिए भी

कम दुविधा वाला प्रकरण नहीं है क्योंकि वर्तमान विधायक उमेश मलिक अन्य को घटनाओं के लेकर अपने टिकट को बचाने में असमर्थ नजर आ रहे हैं इसका सबसे बड़ा कारण लग रहा है कि उनके पुत्र द्वारा पूर्व में दिया गया भारत के प्रति ध्यान व भाजपा के विरुद्ध किसानों का आक्रोश के साथ-साथ क्षेत्र में बीजेपी के गद्दार नेता राम कुमार शेरावत से मिल रही फाइट वही युवाओं में कम लोकप्रिय नहीं है नितिन मलिक भी उनकी भी दावेदारी प्रबल मानी जा रही है लेकिन किसी भी हद तक यदि बीजेपी में देखा जाए तो वरुण मलिक खरड़ निवासी का भी वजूद कम नहीं है या भाजपा के किसान मोर्चा में बड़े पद पर कार्यरत हैं वही मोहित बेनीवाल

से उनकी नजदीकी अभी किसी से छिपी नहीं है ऐसे में वरुण मलिक को भी कम आंकना मूर्खता होगी यह तो बात थी बीजेपी की आप किसको टिकट मिलेगा किसको नहीं यह तो बीजेपी ही निर्धारित करेगी लेकिन यह वास्तविक सच्चाई है कि वर्तमान विधायक अपने टिकट को बचाने को लेकर दुविधा में है लगे हैं उधेड़बुन में कैसे बचे टिकट, कब बात यदि सपा रालोद गठबंधन की करें तो उक्त विधानसभा सीट पर हमेशा से ही रालोद का दबदबा रहा है लेकिन 2017 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी के उम्मीदवार प्रमोद त्यागी ने भी अपनी  ताकत एवं जबरदस्त उपस्थिति दर्ज कराई थी उस उपस्थिति को नजरअंदाज करना इतना आसान नहीं होगा और अब सपा प्रमुख का पिछड़ा सम्मेलन भी कहीं ना कहीं अप्रत्यक्ष रूप से रालोद पर दबाव बनाने का एक प्रयास था लेकिन

रालोद पूर्व में ही पंचायत नहीं रैली कर सीट पर ठोक चुके अपना दावा और दवाई नहीं दो प्रमुख नेताओं में टिकट को लेकर चल रही है जोर आजमाइश या एक को यानी सीधा कहिए कि राजपाल बालियान को अपनी टिकट परिवार से नजदीकियों के चलते टिकट मिलने का है पूरा भरोसा वही टिकट परिवार के धुर विरोधी पूर्व मंत्री  योगराज सिंह भी क्षेत्र में  अपनी सक्रियता एवं जयंत चौधरी से नजदीकियों के चलते टिकट मिलने के लिए पुरे विश्वास में नजर आ रहे हैं ।

लेकिन सबसे कुछ अलग ही नजर आए पूर्व विधायक नवाजिश आलम जो कि पूर्व सांसद के पुत्र होने के बावजूद भी जबरदस्त दावेदार के रूप में एक बार चर्चाओं में आए थे बुढाना विधानसभा में लेकिन बुढ़ाना विधानसभा पर नजर आ रही खींचतान के चलते ही स्वयं ही लाइन से हट गई अभी से समझदारी कहिए या कुछ और यह आप निर्भर करता है लेकिन इतना आसान नहीं है। बसपा द्वारा  बुढाना विधानसभा पर अपने पत्ते नहीं खोले जाने से भी सभी पार्टी है इसमें की बहुजन समाज पार्टी या वैसे तो वर्तमान में कोई वजूद नहीं रखती लेकिन पूर्व में योगराज सिंह यहीं से विधायक और  मंत्री बन चुके हैं बसपा को हल्के में लेना मूर्खता होगी, जिला पंचायत

अध्यक्ष का चुनाव लड़ कर चर्चा में आए गौरव त्यागी भी एक बार फिर से सक्रिय राजनीति तरफ लोग के नजर आ रहे हैं यदि जानकार सूत्रों की माने तो रालोद से अपना दावा ठोक रहे हैं टिकट का उनका दावा ठोकने से त्यागी समीकरण पर कहीं ना कहीं समाजवादी दो कदम पीछे हटती नजर आ रही है अब देखना यह होगा कि उठाना विधानसभा पर किस

को किस पार्टी से मिलेगा टिकट किसका कटेगा टिकट आगे होगा क्या यह तो आने वाला समय बताएगा लेकिन इतना तय है कि आज बुढाना विधानसभा पर क्या कोई पार्टी प्रमुख हो या कोई टिकट के दावेदार हर कोई दुविधा में और अपना समीकरण बैठाने में दिन-रात एक कर रहे हैं किसकी मेहनत रंग लाएगी अभी यह कह पाना मुश्किल है लेकिन जो मेहनत करेगा कामयाबी उसी के हाथ लगेगी यह निश्चित है।

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पद्मश्री वापस लेने की मांग भी तेज हो रही है


1947 वो आजादी नहीं थी वो भीख थी और जो आजादी मिली है वो

2014 में मिली है कंगना रनौत के इस विवादित बयान से देश भर में भारी रोष फैला हुआ है। पद्मश्री वापस लेने की मांग भी तेज हो रही है। रनौत

सोशल मीडिया पर काफी आलोचना की जा रही है और कंगना के खिलाफ देश भर में विज्ञापन और तहरीर भी दी गई है और भाजपा के

मंत्री व नेताओं ने भी इसकी आलोचना की है,‌फिल्म कलाकार कंगना रनौत का पुतला भी फूंका गया है। सोशल मीडिया पर सोनू सूद को पद्मश्री पुरस्कार का असल हकदार कहां जा रहा है... जिन्होंने करोना

काल में मजदूर और मजबूर बेसहारा लोगों को देश भर में सबसे आगे बढ़कर हर संभव मदद की।

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शामली विधानसभा प्रत्याशी चयन को लेकर रालोद प्रमुख दुविधा में..


शामली विधानसभा से रालोद का टिकट पाने की इच्छा में बीजेपी का साथ छोड़ रालोद का दामन थामने वाले प्रसन्न चौधरी को टिकट दे, तो क्षेत्र में चल रही चर्चाओं को मिलेगा बल कि रालोद में बिकते हैं टिकट, वही पिछली विधानसभा का चुनाव हार चुके बिजेंद्र मलिक भी जहां अपनी साफ-सुथरी छवि एवं अपने खाप की वोटों की संख्या एवं पिछली हार की सहानुभूति के चलते हैं प्रमुख दावेदार, युवा जोश एवं क्षेत्र में सक्रिय राजनीति करने वाले विक्रांत जावला भी अपनी सक्रियता के चलते है टिकट की लाइन में , वही जातिगत समीकरण एवं शहरी वोट बैंक के चलते शामली नगर पालिका चेयरमैन एवं पूर्व विधायक पुत्र अखिल बंसल भी है प्रमुख दावेदार,उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव

नजदीक आते नजर आ रहे हैं। वैसे ही राजनीतिक पारा चढ़ता जा रहा है आज हम बात करते शामली जनपद की शामली विधानसभा की जो रालोद प्रमुख जयंत चौधरी के लिए परेशानी का सबब बन चुकी है।एक दौर था जब शामली विधानसभा सीट पर रालोद के पास कोई अच्छा कैंडिडेट भी नहीं था जातियों के लिए कि 2017 के विधानसभा चुनाव में मात्र खानापूर्ति करती नजर आई थी रालोद लेकिन अब किसान आंदोलन के चलते रालोद को मिली संजीवनी वहीं सपा से गठबंधन के चलते भारतीयों की एक लंबी लाइन लग गई है जून में मुख्यतः 4 दावेदार माने जा रहे हैं वही चारों के द्वारा अपने पक्ष में अलग-अलग समीकरण बताए जा रहे हैं जिसके चलते यह भी निश्चित करना इतना आसान नहीं होगा कि टिकट किसको दिया जाए जहां भाजपा को छोड़कर पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष पति प्रसन्न चौधरी ने टिकट की ख्वाहिश के चलते रालोद का दामन थामा है।

और एक समय था कि लग भी रहा था कि शामली विधानसभा से रालोद का टिकट प्रसन्न चौधरी को होगा लेकिन जैसे ही क्षेत्र में बड़े पैमाने पर चर्चा चली थी रालोद की टिकटों की बोली लग रही है या टिकट बेचे जाने की चर्चा, चर्चा में आई तभी से प्रसन्न चौधरी का टिकट खटाई में पड़ता दिख रहा है।आप ऐसे में यदि रालोद प्रमुख शामली विधानसभा से रालोद कैंडिडेट के रूप में प्रसन्न चौधरी को टिकट देते हैं तो क्षेत्र में चल रही चर्चाओं को बल मिलेगा कि पैसे के बल पर मिलते हैं रालोद में टिकट और वह कहीं ना कहीं रालोद के हित में नहीं होगा क्योंकि इस तरह की चर्चा कभी भी किसी भी संगठन ने पार्टी में नहीं होती कि जहां पर बेचे जाते हो,यही पिछली बार विधानसभा चुनाव लड़ चुके बिजेंद्र मलिक जिला पंचायत सदस्य रहे

एवं जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव हारने के बावजूद जनता की सहानुभूति के चलते इस बार भी शामली विधानसभा से टिकट के प्रबल दावेदार मानी जा रही है जहां उसे क्षेत्रीय मतदाताओं की सहानुभूति के साथ-साथ रालोद प्रमुख की सहानुभूति की अपेक्षा है वहीं अपनी साफ-सुथरी छवि के चलते टिकट मिलने की पूरी उम्मीद बनाए हुए हैं। क्योंकि एकमात्र मलिक दावेदार होने का बिजेंद्र मलिक को मिल रहा है फायदा हवाई विधान सभा चुनाव 2017 में शामली विधानसभा से सिटिंग विधायक पंकज मलिक भी लड़ रहे थे चुनाव, मलिक गोत्र के दो खंडित होने का बिजेंद्र मलिक को रहा था नुकसान, इस बार पंकज मलिक के चरथावल से समाजवादी के टिकट पर चुनाव लड़ने की चर्चा से बिजेंद्र मलिक की दावेदारी को मिल रहा है बल,लेकिन वहीं तीसरे दावेदार विक्रांत जावला जो कि पहले दावेदार  प्रसन्न चौधरी की ही गोत्र से ताल्लुक रखते हैं|

और अपनी सक्रियता एवं युवा एवं पढ़ा लिखा कैंडिडेट होने के दम पर युवाओं में खासी पकड़ रखते हैं और इतना ही नहीं समय-समय पर क्षेत्र में सक्रिय राजनीति के साथ-साथ युवाओं के दिल में भी स्थान बनाने के चलते शामली विधानसभा क्षेत्र के टिकट पर दावा ठोक चुके हैं और प्रमुख दावेदारों में गिने जाते हैं लेकिन लेकिन वही जातिगत समीकरण शायरी वोट बैंक के चलते शामली का नगर पालिका के दो बार के पिता चेयरमैन और एक बार की वर्तमान माता चेयरमैन व पिता पूर्व विधायक रहे चुके के सहारे राजनीति में आगाज करने की उम्मीद लगाए 

अखिल बंसल भी किसी से कम नजर नहीं आ रहे हैं जहां रालोद प्रमुख से उसने दिया किसी से छिपी नहीं है वही शामली शहरी वोटबैंक भी उनके पास प्लस पॉइंट है ऐसे में अब सबसे बड़ी दुविधा है रालोद प्रमुख के सामने की टिकट किसको दिया जाए यदि टिकट पर पर्सन चौधरी को दिया जाता है तो आरोप लगेगा तो टिकट भेज दिया यदि बिजेंद्र मलिक को दिया जाता है इस बार मलिक गोत्र का अन्य कैंडिडेट ना होने का मिल सकता है विजेंद्र मलिक को लाभ वही  शहरी वोटबैंक कम होने के चलते 2017 वाली स्थिति उत्पन्न हो जाए और विक्रांत जावला को दिया जाता

है तो कहीं दो अन्य जाट उम्मीदवारों को टिकट नहीं दिया जाने के चलते विरोध में हो जाए और भितरघात विक्रांत जावला को ले डूबने डूबने का खतरा बना रहेगा वहीं यदि अखिल बंसल को दिया जाता है तो जाट समाज की नाराजगी भी होना जायज है क्योंकि शामली विधानसभा जाट वोट बैंक की नजर से जाट विधानसभा के नाम से जानी जाती है और वर्तमान विधायक भी बीजेपी का जाट है अब ऐसे में रालोद प्रमुख के सामने बड़ी दुविधा उत्पन्न हो गई है कि टिकट दिया जाए तो किसको दिया जाए और किस समीकरण के आधार पर ऐसी परिस्थिति से कैसे पार पाते हैं यह तो आने वाला समय ही बताएगा

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सारी सरकारी मशीनरी लगने के बावजूद भी अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतरी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कैराना की रैली,थाना भवन में 1 दिन पूर्व रालोद प्रमुख की रैली की तुलना में फलोप रही कैराना की रैली

 


जिसकी नाराजगी मुख्यमंत्री ने जग जाएगी कर दी जब स्टेज पर उत्तर प्रदेश सरकार के कद्दावर नेता सुरेश राणा को दूसरी पंक्ति में खड़े नजर आएजहां करण की रैली के आयोजन से सुरेश राणा का लखनऊ में घटा कद वही मोहित बेनीवाल के कद में भारी इजाफा मुख्यमंत्री के समक्ष खड़े नजर आए मोहित बेनीवाल पीछे थे सुरेश राणा, कैराना की रैली के स्टेज से जाट गुर्जर समाज को साधने का वह पूरा प्रयास सांसद व

एमएलसी को भी दिया गया विशेष स्थान,आज आंखों के चेहरे पर साफ दिख रही थी रैली की नाकामी, सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग करते हुए आंगनवाडी कार्यकत्री आशा  संगिनी स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के साथ साथ अन्य कर्मचारियों को भी रैली में दबाव देकर किया गया था शामिल, आपको बता दें कि कल जनपद शामली के कैराना कस्बा में माननीय मुख्यमंत्री की रैली का आयोजन किया गया जो कि अपने आपने पूर्व से ही एक चर्चा का विषय बनी हुई थी

क्योंकि पूर्व में भी कार्यक्रम नष्ट हो चुके थे ऐसे में मुख्यमंत्री के आने से जिले को कई अनेकों सौगात मिलने की चर्चा थी लेकिन साथ ही साथ क्षेत्र में चर्चा यह भी थी कि 1 दिन पूर्व थानाभवन क्षेत्र में रालोद प्रमुख की जो रैली होने जा रही है उसे किस तरीके से इस रैली को विशाल किया जाए लेकिन हुआ बिल्कुल इसका उल्टा उत्तर प्रदेश सरकार में कदवार, मंत्री सुरेश राणा के घर में रालोद प्रमुख की रैली का सफल होना वही

कैराना में अपेक्षाओं के अनुसार भीड़ का ना आना क्षेत्र में चर्चा का विषय बना रहा जबकि सरकारी अधिकारियों द्वारा नेताओं एवं कर्मचारियों द्वारा हर 25 अजमा कर भीड़ को इकट्ठा करने का प्रयास किया गया चाहे ग्राम प्रधानों पर दबाव हो या आंगनवाडी कार्यकत्री आशा संगिनी स्वयं सहायता समूह की महिलाएं एवं अन्य कर्मचारी किसी भी तरीके से भीड़ इकट्ठा करना ही उद्देश्य था

जिस उद्देश्य में पूर्णत विफल रहे आयोजक क्योंकि आयोजन स्थल पर लगाए गए कुर्सियां भी खाली रहने से नाराज दिखे मुख्यमंत्री यदि जानकार सूत्रों की माने तो स्टेज पर दूसरी पंक्ति में सुरेश राणा का खड़ा होना भी यही एक कारण रहा वही चर्चा यह भी रही कि मोहित बेनीवाल का कद बढ़ाने के उद्देश्य से माननीय मुख्यमंत्री ने उनको अपने साथ अगली पंक्ति में लिया ताकि आयोजकों को दिखा जा सके कि आपके

द्वारा आयोजन में कमी रही और साथ ही साथ जाट समाज को साधने का प्रयास भी से किया गया लेकिन वही जाट समाज के ही बीजेपी के जिलाध्यक्ष उपेक्षित नजर आए अब ऐसे में देखना यह होगा कि जहां जाट समाज को साथ लेकर प्रयास किया वहीं सुरेश राणा को भी अपने नाराजगी जताने में कामयाब रहे

मुख्यमंत्री एवं गुर्जर समाज भी जहां नाराज दिख रहा था वही गुर्जर नेताओं को स्टेज पर अगली पंक्ति में लाकर साधने का प्रयास किया अब देखना यह होगा एक बार फिर सुरेश राणा माननीय मुख्यमंत्री के यहां अपना विश्वास वापस पा पाते या नहीं यह तो आने वाला समय ही बताएगा लेकिन इतना तय है कि जहां मुख्यमंत्री एक बार फिर से प्लेन का मुद्दा उठाकर क्षेत्र में हिंदू वाद की अलग जगाने का प्रयास किया वही 250 करोड़ की लागत से बनने वाली पीएससी की 50 वीं बटालियन एवं 5 रेंज का शिलान्यास किया एवं 426 करोड़ की लागत से जिले की कुल 114 परियोजनाओं का शिलान्यास एवं लोकार्पण करें वही आगे की रणनीति भी साफ कर गई लेकिन क्षेत्र में सबसे बड़ी चर्चा का विषय फिर भी रही





थाना भवन व कैराना की रैलियां और सबसे बड़ा मुद्दा रहा सुरेश राणा का दूसरी पंक्ति में स्टेज पर पहुंच जाना आप किसके पीछे कारण चाहे कुछ भी रहो लेकिन क्षेत्र में चर्चा का विषय है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नजरों में घटा है सुरेश राणा का वजूद अब देखना यह होगा कि आने वाले समय में जनता की नजर में सुरेश राणा अपना वजूद बचाए रखने में कामयाब होते हैं या नहीं क्योंकि उनके गृह जनपद में भी गन्ना किसानों की हालत किसी से छिपी नहीं है और ऐसे में उनके घर में एक महारैली का विपक्षी दल द्वारा आयोजन सफल कर देना वह के ही आने वाले समय में एक बड़ी चुनौती दिए जाने का इशारा है।

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व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को राम दरबार भेंट किया।


कैराना। सोंमवार को पश्चिमी उत्तर प्रदेश संयुक्त उद्योग व्यापार मंडल के पदाधिकारियों अध्यक्ष घनश्याम दास गर्ग व नगर के व्यापार मंडल के अध्यक्ष ने कैराना में आये उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ का स्वागत किया और उन्हें राम दरबार भेंट किया।

इस अवसर पर जिलाध्यक्ष सूर्यवीर सिंह, रवि संगल आदि व्यापारीकरण मौजूद रहे।

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मुजफ्फरनगर दंगों व कैराना से पलायन के मुद्दे पर रहा मुख्यमंत्री आदित्यनाथ का मेन टार्गेट।


नगर के विजय सिंह पथिक स्नातकोत्तर महाविद्यालय में मुख्यमंत्री विपक्ष पर जमकर बरसे। कैराना के पलायन मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर जमकर साधा निशाना। एक बजे हेलीकॉप्टर से नगर के पब्लिक इंटर कॉलेज में पहुंचे । एक बजकर दस मिनट पर पलायन कर वापस लोटे व्यापारीयों के घर पहुंचे। एक बजकर 20 मिनट पर पत्रकारों को संबोधित किया। दो बजे विजय सिंह पथिक स्नातकोत्तर महाविद्यालय में विशाल जनसमूह को सम्बोधित किया। 

2 :45 पर प्रस्थान कर गये। सोमवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कैराना में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया इस दौरान मुख्यमंत्री ने नगर के विजय सिंह पथिक महाविद्यालय में एक विशाल जनसभा को संबोधित किया।








वही जनसभा के दौरान महिलाएं व पुरुष भारी संख्या में मौजूद रहे इस दौरान मुख्यमंत्री ने कैराना पलायन वे 2013 के मुजफ्फर नगर दंगे का जिक्र करते हुए कहा कि तत्कालीन समाजवादी सरकार द्वारा उनके नेताओं पर फर्जी मुकदमे दर्ज कर उन्हें जेल में डाला गया था। मुख्यमंत्री ने जनसभा को संबोधित करते हुए विपक्षी दलों पर निशाना साधा। मुख्यमंत्री ने प्लान का मुद्दा एक बार फिर गरमाया। मुख्यमंत्री ने पीएसी कैंप की भूमि व फायरिंग रेंज भूमिका शीलापट द्वारा शिलान्यास किया।







बता दें कि आगामी 2022 विधानसभा चुनाव पहले सोमवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कैराना पहुंचे। मुख्यमंत्री का नगर के पब्लिक इंटर कॉलेज में बनाए गए हेलीपैड पर हेलीकॉप्टर लैंडिंग किया गया। 

इस दौरान मुख्यमंत्री ने आयुष्मान योजना राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन प्रधानमंत्री आवास योजना कन्या सुमंगला योजना सहित विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को स्वीकृति पत्र चेक वितरित किए।

पीएसी कैंप की भूमि व फायरिंग रेंज की भूमि का शिलान्यास सहित  मुख्यमंत्री ने 114 महत्वपूर्ण परियोजनाओं का शिलान्यास व लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि पहले की सरकारों में लोग भय के साए में रहते थे।

उन्होंने इस दौरान मुजफ्फरनगर दंगा कैराना पलायन को लेकर विपक्षी दलों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पहले सरकारों में युवाओं को नौकरी नहीं मिलती थी दुवा भटकते रहते थे

उन पर झूठे मुकदमे लगाए जाते थे। उन्होंने कहा कि पहले की सरकारों में किसानों का गन्ना भुगतान नहीं हो पाता था बिजली कनेक्शन नहीं मिल पाते थे।

जब से उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी है तब से विकास कार्य तेजी के साथ हो रहे हैं। सीएम योगी ने कहा कि पीएसी कैंप में हर समय 578 जवान तैनात रहेंगे।

उन्होंने कहा कि अब व्यापारी भयभीत  होकर अपना व्यापार कर रहा है। जो परिवार तत्कालीन समाजवादी पार्टी सरकार में पलायन कर कैराना  छोड़कर चला गया था वह भी अब वापस आकर अपना व्यापार अच्छे से कर रहा है।

इस दौरान हजारों की संख्या में महिलाओं पुरुषों के बच्चों से भरा पंडाल मोदी योगी के जय जयकारों से गूंज उठा। इस अवसर पर भाजपा वरिष्ठ नेता अनिल चौहान, कैबिनेट मंत्री सुरेश राणा,

प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह, सांसद प्रदीप चौधरी, क्षेत्रीय अध्यक्ष केके शुक्ला क्षेत्रीय उपाध्यक्ष मोहित बेनीवाल जिला प्रभारी शामली अजय शर्मा सहित सैकड़ों भाजपा कार्यकर्ता व पदाधिकारी एवं हजारों की संख्या में लोग मौजूद रहे।

वोट बनवाने में सक्रिय रहे सपा नेता


 नव मतदाता अभियान कार्यक्रम के अंतर्गत सपा नेता और कार्यकर्ता सभी बूथों पर पूरी तरह से सक्रिय रहे। कस्बे तथा देहात में आज 7 नवंबर रविवार को सभी बूथों पर बीएलओ द्वारा नई वोट बनाने के लिए फार्म भरे गए। समाजवादी पार्टी द्वारा नई वोट बनवाने में सहयोग करने के लिए सभी बूथों पर बूथ प्रभारी बनाए गए थे। पार्टी द्वारा खतौली नगर अध्यक्ष इरशाद जाट* को कस्बे के सभी बूथों पर अपने सभी बूथ प्रभारियों और कार्यकर्ताओ को सक्रिय रखने की ज़िम्मेदारी सौंपी गई जिसे सभी सपा नेताओ ओर बूथ प्रभारियों ने बखूबी निभाया,यूथ ब्रिगेड विधानसभा अध्यक्ष अभिषेक गोयल एडवोकेट अपना बूथ सबसे मजबूत अभियान के तहत बूथ नंबर 354 व 355 जामे-उल-उलूम जूनियर हाई स्कूल में सक्रिय रहे। पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ विधानसभा अध्यक्ष सुशील गुर्जर व विभू शर्मा ने बूथ नंबर 305 पिकेट इंटर कॉलेज पर सहयोग किया।

नगर अध्यक्ष इरशाद जाट ने बताया कि सात नवंबर दिन रविवार को निर्वाचन आयोग द्वारा मतदान केंद्रों पर विशेष अभियान दिवस का आयोजन किया गया जिसमे युवाओं ने बूथों पर आकर अपना वोट बनवाएं। अभिषेक गोयल ने बताया कि एक जनवरी 2022 को 18 वर्ष पूर्ण कर रहे युवा भी अपना वोट बनवाने आ सकते हैं। उन्होंने अपील की है कि जिनका वोट नहीं बना है तो वे अपने नजदीकी मतदान केंद्र, बूथ पर जाकर फॉर्म भर कर अपना मतदाता पहचान पत्र बनवाना बनवाएं। आयोग के आदेश के तहत एक नवंबर से 30 नवंबर के बीच चार विशेष अभियान दिवस आयोजित किए जा रहे हैं। पहला विशेष अभियान दिवस आज सात नवंबर दिन रविवार को रहा उसके बाद 13 नवंबर, 21 नवंबर और 27 नवंबर को विशेष अभियान दिवस सभी मतदान केंद्रों पर आयोजित किए जाएंगे। नव मतदाता अभियान कार्यक्रम के अन्तर्गत वरिष्ठ सपा नेता इमरान सिद्धीकी, काज़ी फसीह अख्तर, पंकज सैनी, धनवीर कश्यप, मास्टर अब्दुल सत्तार, आफाक खान, शारीक कुरैशी, डॉक्टर मोइन अली, गगन माहिव, आमिर कस्सार, ऋषभ वर्मा , नईम मलिक, नदीम फारूखी, अर्पित गुप्ता, गौरव शर्मा सभी अपने बूथ पर उपस्थित रहे।

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