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शामली विधानसभा प्रत्याशी चयन को लेकर रालोद प्रमुख दुविधा में..


शामली विधानसभा से रालोद का टिकट पाने की इच्छा में बीजेपी का साथ छोड़ रालोद का दामन थामने वाले प्रसन्न चौधरी को टिकट दे, तो क्षेत्र में चल रही चर्चाओं को मिलेगा बल कि रालोद में बिकते हैं टिकट, वही पिछली विधानसभा का चुनाव हार चुके बिजेंद्र मलिक भी जहां अपनी साफ-सुथरी छवि एवं अपने खाप की वोटों की संख्या एवं पिछली हार की सहानुभूति के चलते हैं प्रमुख दावेदार, युवा जोश एवं क्षेत्र में सक्रिय राजनीति करने वाले विक्रांत जावला भी अपनी सक्रियता के चलते है टिकट की लाइन में , वही जातिगत समीकरण एवं शहरी वोट बैंक के चलते शामली नगर पालिका चेयरमैन एवं पूर्व विधायक पुत्र अखिल बंसल भी है प्रमुख दावेदार,उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव

नजदीक आते नजर आ रहे हैं। वैसे ही राजनीतिक पारा चढ़ता जा रहा है आज हम बात करते शामली जनपद की शामली विधानसभा की जो रालोद प्रमुख जयंत चौधरी के लिए परेशानी का सबब बन चुकी है।एक दौर था जब शामली विधानसभा सीट पर रालोद के पास कोई अच्छा कैंडिडेट भी नहीं था जातियों के लिए कि 2017 के विधानसभा चुनाव में मात्र खानापूर्ति करती नजर आई थी रालोद लेकिन अब किसान आंदोलन के चलते रालोद को मिली संजीवनी वहीं सपा से गठबंधन के चलते भारतीयों की एक लंबी लाइन लग गई है जून में मुख्यतः 4 दावेदार माने जा रहे हैं वही चारों के द्वारा अपने पक्ष में अलग-अलग समीकरण बताए जा रहे हैं जिसके चलते यह भी निश्चित करना इतना आसान नहीं होगा कि टिकट किसको दिया जाए जहां भाजपा को छोड़कर पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष पति प्रसन्न चौधरी ने टिकट की ख्वाहिश के चलते रालोद का दामन थामा है।

और एक समय था कि लग भी रहा था कि शामली विधानसभा से रालोद का टिकट प्रसन्न चौधरी को होगा लेकिन जैसे ही क्षेत्र में बड़े पैमाने पर चर्चा चली थी रालोद की टिकटों की बोली लग रही है या टिकट बेचे जाने की चर्चा, चर्चा में आई तभी से प्रसन्न चौधरी का टिकट खटाई में पड़ता दिख रहा है।आप ऐसे में यदि रालोद प्रमुख शामली विधानसभा से रालोद कैंडिडेट के रूप में प्रसन्न चौधरी को टिकट देते हैं तो क्षेत्र में चल रही चर्चाओं को बल मिलेगा कि पैसे के बल पर मिलते हैं रालोद में टिकट और वह कहीं ना कहीं रालोद के हित में नहीं होगा क्योंकि इस तरह की चर्चा कभी भी किसी भी संगठन ने पार्टी में नहीं होती कि जहां पर बेचे जाते हो,यही पिछली बार विधानसभा चुनाव लड़ चुके बिजेंद्र मलिक जिला पंचायत सदस्य रहे

एवं जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव हारने के बावजूद जनता की सहानुभूति के चलते इस बार भी शामली विधानसभा से टिकट के प्रबल दावेदार मानी जा रही है जहां उसे क्षेत्रीय मतदाताओं की सहानुभूति के साथ-साथ रालोद प्रमुख की सहानुभूति की अपेक्षा है वहीं अपनी साफ-सुथरी छवि के चलते टिकट मिलने की पूरी उम्मीद बनाए हुए हैं। क्योंकि एकमात्र मलिक दावेदार होने का बिजेंद्र मलिक को मिल रहा है फायदा हवाई विधान सभा चुनाव 2017 में शामली विधानसभा से सिटिंग विधायक पंकज मलिक भी लड़ रहे थे चुनाव, मलिक गोत्र के दो खंडित होने का बिजेंद्र मलिक को रहा था नुकसान, इस बार पंकज मलिक के चरथावल से समाजवादी के टिकट पर चुनाव लड़ने की चर्चा से बिजेंद्र मलिक की दावेदारी को मिल रहा है बल,लेकिन वहीं तीसरे दावेदार विक्रांत जावला जो कि पहले दावेदार  प्रसन्न चौधरी की ही गोत्र से ताल्लुक रखते हैं|

और अपनी सक्रियता एवं युवा एवं पढ़ा लिखा कैंडिडेट होने के दम पर युवाओं में खासी पकड़ रखते हैं और इतना ही नहीं समय-समय पर क्षेत्र में सक्रिय राजनीति के साथ-साथ युवाओं के दिल में भी स्थान बनाने के चलते शामली विधानसभा क्षेत्र के टिकट पर दावा ठोक चुके हैं और प्रमुख दावेदारों में गिने जाते हैं लेकिन लेकिन वही जातिगत समीकरण शायरी वोट बैंक के चलते शामली का नगर पालिका के दो बार के पिता चेयरमैन और एक बार की वर्तमान माता चेयरमैन व पिता पूर्व विधायक रहे चुके के सहारे राजनीति में आगाज करने की उम्मीद लगाए 

अखिल बंसल भी किसी से कम नजर नहीं आ रहे हैं जहां रालोद प्रमुख से उसने दिया किसी से छिपी नहीं है वही शामली शहरी वोटबैंक भी उनके पास प्लस पॉइंट है ऐसे में अब सबसे बड़ी दुविधा है रालोद प्रमुख के सामने की टिकट किसको दिया जाए यदि टिकट पर पर्सन चौधरी को दिया जाता है तो आरोप लगेगा तो टिकट भेज दिया यदि बिजेंद्र मलिक को दिया जाता है इस बार मलिक गोत्र का अन्य कैंडिडेट ना होने का मिल सकता है विजेंद्र मलिक को लाभ वही  शहरी वोटबैंक कम होने के चलते 2017 वाली स्थिति उत्पन्न हो जाए और विक्रांत जावला को दिया जाता

है तो कहीं दो अन्य जाट उम्मीदवारों को टिकट नहीं दिया जाने के चलते विरोध में हो जाए और भितरघात विक्रांत जावला को ले डूबने डूबने का खतरा बना रहेगा वहीं यदि अखिल बंसल को दिया जाता है तो जाट समाज की नाराजगी भी होना जायज है क्योंकि शामली विधानसभा जाट वोट बैंक की नजर से जाट विधानसभा के नाम से जानी जाती है और वर्तमान विधायक भी बीजेपी का जाट है अब ऐसे में रालोद प्रमुख के सामने बड़ी दुविधा उत्पन्न हो गई है कि टिकट दिया जाए तो किसको दिया जाए और किस समीकरण के आधार पर ऐसी परिस्थिति से कैसे पार पाते हैं यह तो आने वाला समय ही बताएगा

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