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दिल्ली से गुजरने वाले ट्रकों पर ईसीसी बढ़ोतरी: एआईएमटीसी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का किया स्वागत, क्रियान्वयन में स्पष्टता की मांग

नई दिल्ली। देश के सड़क परिवहन क्षेत्र के प्रमुख संगठन ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (AIMTC) ने दिल्ली को ट्रांजिट मार्ग के रूप में उपयोग करने वाले वाणिज्यिक वाहनों पर पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क (ECC) बढ़ाने के संबंध में आए सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्णय का स्वागत किया है। संगठन ने साथ ही यह भी अपील की है कि इस फैसले के क्रियान्वयन में स्पष्टता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जाए, ताकि परिवहन उद्योग को अनावश्यक कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।

एआईएमटीसी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. हरीश सभरवाल ने कहा कि एयर क्वालिटी मैनेजमेंट आयोग (CAQM) की सिफारिश पर दिल्ली से गुजरने वाले ट्रकों के लिए ईसीसी को मौजूदा ₹2600 से बढ़ाकर ₹4000 किया गया है और इसमें हर वर्ष 5 प्रतिशत की वृद्धि का प्रावधान भी रखा गया है। उनका कहना है कि इस निर्णय का उद्देश्य उन वाणिज्यिक वाहनों को हतोत्साहित करना है जिनका गंतव्य दिल्ली नहीं होता, लेकिन वे दिल्ली के रास्ते से गुजरते हैं।

उन्होंने कहा कि यदि ट्रांजिट वाहन ईस्टर्न और वेस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे जैसे वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करें तो राष्ट्रीय राजधानी में अनावश्यक यातायात और प्रदूषण को कम करने में मदद मिल सकती है।

स्पष्ट व्यवस्था की जरूरत

डॉ. सभरवाल ने यह भी कहा कि इस फैसले को लागू करते समय यह बेहद आवश्यक है कि ट्रांजिट वाहनों की पहचान के लिए स्पष्ट और व्यावहारिक व्यवस्था बनाई जाए। उनके अनुसार, बढ़ा हुआ ईसीसी केवल उन्हीं ट्रकों पर लागू होना चाहिए जो वास्तव में दिल्ली को ट्रांजिट मार्ग के रूप में उपयोग करते हैं।

जिन वाहनों का वास्तविक गंतव्य दिल्ली है और जो यहां लोडिंग या अनलोडिंग के लिए आते हैं, उन पर यह शुल्क नहीं लगाया जाना चाहिए। यदि इस व्यवस्था में किसी प्रकार की अस्पष्टता रहती है तो इससे दिल्ली के व्यापार और उपभोक्ताओं की सेवा करने वाले परिवहन संचालकों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

परिस्थितियां अब पहले से अलग

एआईएमटीसी के अनुसार, पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क की व्यवस्था वर्ष 2015 में लागू की गई थी, जब दिल्ली के आसपास बने ईस्टर्न और वेस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे पूरी तरह संचालित नहीं थे। आज इन एक्सप्रेसवे के चालू होने के बाद लंबी दूरी के अधिकांश ट्रांजिट वाहन इन्हीं मार्गों का उपयोग कर रहे हैं।

इसलिए वर्तमान समय में दिल्ली में प्रवेश करने वाले अधिकांश ट्रक वास्तव में शहर के भीतर माल की डिलीवरी के लिए आते हैं और इस तथ्य को संशोधित ईसीसी लागू करते समय ध्यान में रखा जाना चाहिए।

प्रदूषण के कई कारण

डॉ. सभरवाल ने यह भी कहा कि ट्रकों पर ईसीसी और दिल्ली-एनसीआर में वाणिज्यिक वाहनों की आयु सीमा जैसी पाबंदियों के बावजूद, खासकर सर्दियों के मौसम में, वायु प्रदूषण के स्तर में अपेक्षित कमी देखने को नहीं मिली है। इससे यह स्पष्ट होता है कि वायु प्रदूषण की समस्या कई कारणों से जुड़ी हुई है।

उन्होंने कहा कि पराली जलाना, निजी वाहनों की बढ़ती संख्या, निर्माण कार्यों से उठने वाली धूल और औद्योगिक गतिविधियां भी वायु गुणवत्ता को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण कारक हैं।

बीएस-VI ट्रकों को छूट देने की अपील

डॉ. हरीश सभरवाल ने बताया कि बीएस-VI ट्रक आधुनिक उत्सर्जन नियंत्रण तकनीक से लैस होते हैं और इन्हें भारत सरकार के कड़े उत्सर्जन मानकों के अनुसार प्रमाणित किया गया है। इनमें डीज़ल एग्जॉस्ट फ्लूइड (DEF) जैसी उन्नत तकनीक का उपयोग किया जाता है, जिससे प्रदूषण काफी कम होता है।

इसी को ध्यान में रखते हुए एआईएमटीसी ने सुप्रीम कोर्ट में एक इंटरलोक्यूटरी एप्लीकेशन दायर कर बीएस-VI ट्रकों को ईसीसी से छूट देने और उन्हें उनकी वैध 15 वर्ष की आयु सीमा तक दिल्ली-एनसीआर में संचालन की अनुमति देने का अनुरोध किया है।

संतुलित समाधान की आवश्यकता

डॉ. सभरवाल ने उम्मीद जताई कि माननीय न्यायालय इस अनुरोध पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगा, ताकि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए एक संतुलित और व्यावहारिक समाधान निकल सके।

उन्होंने यह भी दोहराया कि परिवहन उद्योग प्रदूषण से निपटने के लिए वैज्ञानिक और प्रभावी उपायों का समर्थन करता है। साथ ही यह भी जरूरी है कि देश की अर्थव्यवस्था और रोजमर्रा की जरूरतों को बनाए रखने के लिए माल की सुचारु आवाजाही सुनिश्चित की जाए।


ख़ास रिपोर्ट:
ऊषा महाना
पत्रकार, नई दिल्ली

प्रकाशन:
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत
देश की राजधानी दिल्ली से प्रकाशित
राष्ट्रीय समाचार पत्रिका / न्यूज़ पोर्टल / यूट्यूब चैनल
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सहारनपुर देहात में इफ्तार पार्टी बनी सामाजिक एकता का मंच, सपा प्रदेश सचिव रूही अंजुम की मौजूदगी से बढ़ा उत्साह

सहारनपुर। पवित्र रमज़ान माह के दौरान आयोजित इफ्तार कार्यक्रम जहां एक ओर भाईचारे और सामाजिक एकता का संदेश देते हैं, वहीं ऐसे कार्यक्रम समाज के विभिन्न वर्गों को एक मंच पर जोड़ने का काम भी करते हैं। इसी क्रम में सहारनपुर देहात विधानसभा क्षेत्र के गांव मेघछप्पर में हाजी मंसूर के आवास पर आयोजित भव्य इफ्तार पार्टी में समाजवादी पार्टी की प्रदेश सचिव रूही अंजुम ने शिरकत कर कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ा दिया।

इफ्तार कार्यक्रम में क्षेत्र के गणमान्य लोगों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों की उपस्थिति रही। सभी ने मिलकर रोज़ा इफ्तार किया और आपसी सौहार्द, भाईचारे तथा शांति की दुआएं मांगी। इस दौरान माहौल पूरी तरह से धार्मिक आस्था और सामाजिक एकजुटता से सराबोर नजर आया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए समाजवादी पार्टी की प्रदेश सचिव रूही अंजुम ने कहा कि रमज़ान का पवित्र महीना हमें सब्र, त्याग और इंसानियत का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि रोज़ा केवल भूखा-प्यासा रहने का नाम नहीं है, बल्कि यह आत्मसंयम, दूसरों के दुख-दर्द को समझने और समाज में प्रेम व भाईचारे को बढ़ावा देने का अवसर भी है।

उन्होंने कहा कि आज के दौर में समाज को सबसे ज्यादा जरूरत आपसी सौहार्द और एकता की है। ऐसे आयोजन लोगों को करीब लाने का काम करते हैं और समाज में सकारात्मक संदेश फैलाते हैं। रूही अंजुम ने कहा कि समाजवादी पार्टी हमेशा से सामाजिक न्याय, भाईचारे और सभी वर्गों के सम्मान की राजनीति करती आई है और आगे भी इसी विचारधारा के साथ काम करती रहेगी।

इफ्तार पार्टी के मेजबान हाजी मंसूर ने सभी मेहमानों का स्वागत करते हुए कहा कि रमज़ान का महीना इंसानियत और नेकी का पैगाम देता है। उन्होंने कहा कि इस तरह के कार्यक्रमों का उद्देश्य लोगों को एक साथ बैठाकर आपसी रिश्तों को मजबूत करना है।

कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीणों और क्षेत्रीय लोगों ने भी भाग लिया। लोगों ने एक-दूसरे को रमज़ान की मुबारकबाद दी और क्षेत्र में शांति, तरक्की तथा खुशहाली के लिए दुआ की।

इफ्तार के बाद लोगों के बीच सामाजिक और क्षेत्रीय मुद्दों पर भी चर्चा हुई, जिसमें गांव और क्षेत्र के विकास को लेकर विचार साझा किए गए। कार्यक्रम का समापन आपसी भाईचारे और एकता के संदेश के साथ हुआ।

स्थानीय लोगों का कहना था कि ऐसे आयोजन समाज में सकारात्मक माहौल बनाते हैं और लोगों के बीच आपसी रिश्तों को और मजबूत करते हैं। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने इसे एक यादगार और प्रेरणादायक आयोजन बताया। रिपोर्ट -गुलवेज़ आलम कैराना

रूही अंजुम की एंट्री से बदल सकते हैं सहारनपुर देहात के समीकरण!“टिकट की दौड़ में रूही अंजुम? रसूलपुर पापड़ी से उठी बड़ी सियासी चर्चा”

सहारनपुर।  देहात विधानसभा क्षेत्र के गांव रसूलपुर पापड़ी में समाजवादी पार्टी की प्रदेश सचिव व समाजसेविका रूही अंजुम के जनसंपर्क अभियान ने इलाके की सियासत में नई हलचल पैदा कर दी है। गांव में उनके पहुंचते ही समर्थकों की सक्रियता और ग्रामीणों की मौजूदगी ने माहौल को पूरी तरह राजनीतिक बना दिया। कार्यक्रम के बाद इलाके की चौपालों, बाजारों और चौराहों पर सियासी चर्चाओं का दौर तेज हो गया।

रूही अंजुम ने गांव में घर-घर पहुंचकर ग्रामीणों से सीधा संवाद किया और उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना। इस दौरान लोगों ने सड़क, बिजली, पानी, बेरोजगारी और क्षेत्र में विकास कार्यों की गति जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। कई ग्रामीणों ने कहा कि क्षेत्र में ऐसा नेतृत्व होना चाहिए जो लगातार जनता के बीच रहकर उनकी आवाज को आगे बढ़ाए।

जनसंपर्क के दौरान रूही अंजुम ने कहा कि वह लंबे समय से क्षेत्र की जनता के साथ जुड़ी हुई हैं और सामाजिक स्तर पर लोगों की समस्याओं को उठाने का प्रयास करती रही हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सहारनपुर देहात के विकास और जनता की समस्याओं को लेकर वह लगातार सक्रिय रहेंगी और जरूरत पड़ने पर हर स्तर पर आवाज उठाएंगी।

गौरतलब है कि सहारनपुर देहात विधानसभा सीट इस समय भी समाजवादी पार्टी के पास है, लेकिन क्षेत्र में बढ़ती राजनीतिक सक्रियता ने नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। रसूलपुर पापड़ी में हुए इस जनसंपर्क कार्यक्रम के बाद अब स्थानीय राजनीतिक हलकों में यह सवाल भी उठने लगा है कि आगामी विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी किस चेहरे को मैदान में उतारेगी।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि जिस तरह से रूही अंजुम लगातार गांव-गांव पहुंचकर लोगों से संपर्क बना रही हैं, उससे उनके नाम की चर्चा राजनीतिक गलियारों में तेजी से बढ़ी है। फिलहाल रसूलपुर पापड़ी से उठी यह सियासी हलचल सहारनपुर देहात की राजनीति में नए समीकरण बनने के संकेत दे रही है। रिपोर्ट -गुलवेज़ आलम कैराना

15 मार्च को सियासी ताकत दिखाएगी सपा, कांशीराम जयंती पर पूरे यूपी में ‘पीडीए दिवस’ मनाने का ऐलान

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में 15 मार्च को समाजवादी पार्टी बड़ा शक्ति प्रदर्शन करने जा रही है। बहुजन आंदोलन के प्रणेता कांशीराम की 92वीं जयंती के मौके पर समाजवादी पार्टी ने पूरे प्रदेश में “बहुजन समाज दिवस यानी पीडीए दिवस” मनाने का फैसला किया है। इस दिन प्रदेश के हर जिला मुख्यालय पर बड़े स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं की बड़ी भागीदारी रहने की संभावना है।
इस संबंध में समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल ने पार्टी संगठन को आधिकारिक पत्र जारी कर निर्देश दिए हैं। पत्र में जिलाध्यक्षों, महानगर अध्यक्षों, सांसदों, विधायकों, पूर्व जनप्रतिनिधियों और संगठन के पदाधिकारियों से कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए पूरी ताकत लगाने की अपील की गई है।
पत्र में बताया गया है कि यह कार्यक्रम समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देश पर आयोजित किया जा रहा है। पार्टी का मानना है कि बहुजन समाज को एकजुट करने और सामाजिक न्याय की आवाज को मजबूत करने के लिए ऐसे कार्यक्रम बेहद जरूरी हैं।
समाजवादी पार्टी के अनुसार कांशीराम ने अपना पूरा जीवन दलितों, पिछड़ों, आदिवासियों और धार्मिक अल्पसंख्यकों को संगठित करने के लिए समर्पित किया। उन्होंने मंडल आयोग की सिफारिशों के समर्थन में देशभर में आंदोलन खड़ा किया और बहुजन समाज को राजनीतिक ताकत देने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
पत्र में यह भी याद दिलाया गया है कि कांशीराम और समाजवादी आंदोलन के प्रमुख नेता मुलायम सिंह यादव के बीच सामाजिक न्याय की राजनीति को मजबूत करने के लिए ऐतिहासिक समझ बनी थी। इसी विचारधारा को आगे बढ़ाते हुए समाजवादी पार्टी आज भी दलित, पिछड़े, आदिवासी और अल्पसंख्यक समाज को साथ लेकर चलने का दावा करती है।
पार्टी नेताओं का कहना है कि “पीडीए दिवस” के कार्यक्रमों के जरिए समाज के विभिन्न वर्गों को जोड़कर भाईचारे और एकता का संदेश दिया जाएगा। इसके लिए सभी जिलों में सभाएं, बैठकें और जनसमूह के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
समाजवादी पार्टी संगठन ने अपने सभी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से अपील की है कि वे कार्यक्रमों में अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करें और इसे ऐतिहासिक बनाने के लिए पूरी ताकत लगाएं। माना जा रहा है कि 15 मार्च को होने वाले ये कार्यक्रम प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी की सक्रियता और ताकत का बड़ा संदेश देने वाले साबित हो सकते हैं।

रिपोर्ट -गुलवेज़ आलम कैराना

हाजी मोहम्मद इक़बाल क़ाज़ी बने राजस्थान कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के महासचिव, भीलवाड़ा में खुशी की लहर

भीलवाड़ा, 12 मार्च। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की ओर से जारी आधिकारिक घोषणा के अनुसार वरिष्ठ कांग्रेस नेता हाजी मोहम्मद इक़बाल क़ाज़ी को राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अल्पसंख्यक विभाग का जनरल सेक्रेटरी (महासचिव) नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है। इस फैसले के बाद भीलवाड़ा सहित प्रदेश भर के कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों में उत्साह का माहौल देखने को मिल रहा है।

हाजी मोहम्मद इक़बाल क़ाज़ी ने इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के लिए पार्टी नेतृत्व का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वे पार्टी द्वारा उन पर जताए गए विश्वास के लिए दिल से धन्यवाद देते हैं। उन्होंने कहा कि वह संगठन की मजबूती और पार्टी की विचारधारा को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए पूरी निष्ठा और ईमानदारी से कार्य करेंगे।

उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, वरिष्ठ नेता राहुल गांधी, राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, वरिष्ठ नेता सचिन पायलट, एम.डी. चोबदार तथा पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं का विशेष रूप से आभार जताया।

हाजी मोहम्मद इक़बाल क़ाज़ी लंबे समय से कांग्रेस संगठन और सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं। इससे पहले वे राजस्थान कांग्रेस कमेटी अल्पसंख्यक विभाग के अजमेर संभाग अध्यक्ष तथा भीलवाड़ा पूर्व जिला अध्यक्ष के पद पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं। संगठन में उनकी सक्रियता और अनुभव को देखते हुए उन्हें यह नई जिम्मेदारी सौंपी गई है।

सामाजिक क्षेत्र में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है। वर्तमान में वे मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट के राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष के रूप में भी समाज सेवा के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। सामाजिक और राजनीतिक दोनों क्षेत्रों में उनकी सक्रियता के कारण क्षेत्र में उनकी अच्छी पहचान बनी हुई है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि हाजी मोहम्मद इक़बाल क़ाज़ी की इस नियुक्ति से प्रदेश में अल्पसंख्यक समुदाय के बीच पार्टी संगठन को और मजबूती मिल सकती है। वहीं स्थानीय स्तर पर भी पार्टी कार्यकर्ताओं को नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

उनकी नियुक्ति की खबर सामने आते ही भीलवाड़ा और आसपास के क्षेत्रों में समर्थकों और शुभचिंतकों के बीच खुशी की लहर दौड़ गई। कई सामाजिक संगठनों, राजनीतिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने उन्हें बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल कार्यकाल की कामना की है। बताया जा रहा है कि उन्हें बधाई देने वालों का सिलसिला लगातार जारी है।

राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाने वाले हाजी मोहम्मद इक़बाल क़ाज़ी की इस नई जिम्मेदारी को प्रदेश कांग्रेस संगठन के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी नेतृत्व को उम्मीद है कि उनके अनुभव और कार्यशैली से संगठन को मजबूती मिलेगी और अल्पसंख्यक विभाग के माध्यम से पार्टी का जनाधार और व्यापक होगा।


(राजस्थान से पत्रकार अब्दुल क़ादिर मुल्तानी की विशेष रिपोर्ट)
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सामाजिक न्याय की विरासत को आगे बढ़ाने की बात: अरशद खान ने अखिलेश यादव के नेतृत्व पर जताया भरोसा

नई दिल्ली/लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव और जौनपुर सदर के पूर्व विधायक मोहम्मद अरशद खान ने कहा कि इतिहास में कभी-कभार ही ऐसे दूरदर्शी और परिवर्तनकारी नेता पैदा होते हैं, जो अपने विचारों और कार्यों से समाज को नई दिशा देने का काम करते हैं। उनका कहना है कि भारत में सामाजिक न्याय और समानता की जो विचारधारा मजबूत हुई, उसकी नींव डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने रखी थी।

अरशद खान ने कहा कि डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने न केवल भारत बल्कि विश्व स्तर पर सामाजिक न्याय, समानता और लोकतांत्रिक अधिकारों की मजबूत अवधारणा को स्थापित किया। उन्होंने दलितों, पिछड़ों, आदिवासियों और वंचित समाज को जागरूक कर एक ऐसे संविधान के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसे दुनिया के सबसे प्रगतिशील और लोकतांत्रिक संविधानों में गिना जाता है। बाबा साहब के प्रयासों से सामाजिक न्याय को संस्थागत रूप मिला और वंचित वर्गों को शिक्षा, रोजगार तथा शासन-प्रशासन में भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए आरक्षण जैसी व्यवस्था लागू हुई।

उन्होंने आगे कहा कि बाबा साहब के विचारों को व्यापक जनसमूह तक पहुंचाने और बहुजन समाज को एक संगठित राजनीतिक शक्ति में बदलने का ऐतिहासिक कार्य मान्यवर कांशीराम ने किया। कांशीराम ने दलित, पिछड़े, आदिवासी और वंचित समाज को एक वैचारिक आंदोलन से जोड़ते हुए सामाजिक न्याय की लड़ाई को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनाया।

मोहम्मद अरशद खान के अनुसार वर्तमान समय में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव सामाजिक न्याय की उसी विचारधारा को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि “पीडीए (पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक)” की अवधारणा के माध्यम से समाज के वंचित वर्गों को राजनीतिक, सामाजिक और प्रशासनिक भागीदारी दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। उनका मानना है कि यह विचार केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया भर में चल रहे मानवाधिकार और समानता से जुड़े आंदोलनों से भी जुड़ता है।

अरशद खान ने कहा कि आज के दौर में जब पूरी दुनिया में सामाजिक न्याय, समान अवसर और लोकतांत्रिक भागीदारी पर नई चर्चाएं हो रही हैं, ऐसे समय में अखिलेश यादव का नेतृत्व कई लोगों के लिए उम्मीद के रूप में देखा जा रहा है। उनका कहना है कि वंचित और पिछड़े वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए एक व्यापक राजनीतिक और वैचारिक आंदोलन की आवश्यकता है।

उन्होंने जानकारी दी कि 15 मार्च को समाजवादी पार्टी देशभर में मान्यवर कांशीराम की जयंती मनाएगी। इस अवसर पर सामाजिक न्याय, समानता और बहुजन एकता के संकल्प को दोहराया जाएगा। उनके अनुसार “कांशीराम तेरा मिशन अधूरा, अखिलेश यादव करेंगे पूरा” का नारा सामाजिक न्याय और समान अवसर के विचार को मजबूत करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।


रिपोर्ट: शौकिन सिद्दीकी (ब्यूरो चीफ – शामली, उत्तर प्रदेश)
कैमरामैन: रामकुमार चौहान

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बुजुर्गों की दुआओं से मजबूत हो रही रूही अंजुम की सियासी पकड़ - सहारनपुर जिले में रूही अंजुम जैसी सक्रिय कोई दूसरी महिला नेता नहीं?

सहारनपुर। जिले की सियासत में इन दिनों रूही अंजुम का नाम तेजी से चर्चा में है। गांव-गांव और शहर के मोहल्लों में लगातार जनता के बीच पहुंच रही रूही अंजुम को खास तौर पर बुजुर्गों का भरपूर आशीर्वाद मिल रहा है। कई स्थानों पर बुजुर्गों ने उनके सिर पर हाथ रखकर दुआएं दीं और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। माना जा रहा है कि बुजुर्गों की यही दुआएं उनकी सियासी पकड़ को लगातार मजबूत कर रही हैं।

हाल ही में लखनऊ में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात के बाद उनकी राजनीतिक सक्रियता और तेज हो गई है। लखनऊ से लौटने के बाद उन्होंने क्षेत्र में जनसंपर्क अभियान को और गति दे दी है। गांवों की चौपालों से लेकर कस्बों और मोहल्लों तक वह लगातार लोगों से मिल रही हैं, उनकी समस्याएं सुन रही हैं और समाजवादी पार्टी की नीतियों को जनता तक पहुंचाने में जुटी हुई हैं।

रूही अंजुम लंबे समय से सहारनपुर जनपद की सातों विधानसभा सीटों—सहारनपुर नगर, सहारनपुर देहात, देवबंद, रामपुर मनिहारान, गंगोह, नकुड़ और बेहट—में पार्टी संगठन को मजबूत करने के लिए सक्रिय नजर आ रही हैं। पार्टी कार्यक्रमों में उनकी भागीदारी, कार्यकर्ताओं के साथ लगातार संवाद और जनता के बीच उनकी मौजूदगी ने उन्हें जिले की राजनीति में एक मजबूत महिला चेहरा बना दिया है।

राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि जिस तरह रूही अंजुम की सक्रियता और लोकप्रियता बढ़ रही है, उससे आने वाले चुनाव से पहले सहारनपुर की सियासत में नए समीकरण बन सकते हैं। सूत्रों का तो यहां तक कहना है कि सहारनपुर जिले में रूही अंजुम जैसी सक्रिय अन्य विपक्ष पार्टी में कोई महिला नेता नहीं है।

 राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर पार्टी नेतृत्व ने उन पर भरोसा जताया तो सहारनपुर देहात की राजनीति में एक नया और दिलचस्प मुकाबला देखने को मिल सकता है।

रिपोर्ट -गुलवेज़ आलम कैराना