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जिला सचिव रियाज खान ने कराया रोजा इफ्तार महफिल में दिखी भाईचारा की झलक

बिड़ौली/झिंझाना। थाना क्षेत्र के गांव टपराना में रमजान के 29वें रोजे पर इफ्तार पार्टी का आयोजन किया गया। रोजेदारों ने नमाज अदा कर अमन-चैन की दुआ मांगी। AIMIM पार्टी के जिला सचिव रियाज खान ने रमजान की पवित्रता और भाईचारे पर जोर दिया।

 झिंझाना थाना क्षेत्र के गांव टपराना में देर शाम बरस्पतिवार को जिला पंचायत वार्ड- 9 से प्रत्याशी रियाज खान ऑल इंडिया मजलिस -ए- इत्तेहादुल मुस्लिमीन पार्टी के जिला सचिव के आवास पर रमजान के 29वें रोजे के मौके पर इफ्तार पार्टी का आयोजन किया गया। जिसमें बड़ी संख्या में रोजेदारों ने भाग लेकर रोजा इफ्तार किया। इससे पहले नमाज अदा कर लोगों ने देश में अमनों-अमान के लिए दुआ मांगी।

रोजा इफ्तार में भाई-चारा की झलक देखने को मिली। प्रत्याशी रियाज खान ने बताया ने बताया कि रमजान-उल-मुबारक का यह पाक और पवित्र महीना रहमतों और बरकतों से भरपूर है। जो शख्स रोजेदार को इफ्तार कराता है, अल्लाह ताला उस शख्स को रोजेदार के बराबर सवाब अता फरमाता है। इस प्रकार के कार्यक्रम से आपसी भाईचारा बढ़ता है। पश्चिम प्रदेश संयुक्त सचिव हाफिज मोहम्मद इनाम ने कहा कि रमजान-उल-मुबारक को चार अशरा (हिस्से) में बांटा गया है।

 
पवित्र माह रमजान का पहला अशरा बरकतों का, दूसरा अशरा ग्यारहवीं रमजान से बीस रमजान तक रहमत का तथा 21वीं रमजान से तीस रमजान तक मगफिरत का है। इस मौके पर, परवेज जिला अध्यक्ष शामली,ब्लॉक अध्यक्ष अकरम खान,मोमिन चौधरी विधानसभा अध्यक्ष, हाफिज उस्मान,अंसार खान,नजाकत खान,अकरम खान,नोशद खान,अफसर खान,तसव्वर खान,अताउल्लाह खान,जीशान,शाहिद,ओजात, मुसर्रफ खान, आदि मौजूद रहे।
विधायक दर्पण राष्ट्रीय समाचार पत्रिका के लिए शाकिर अली की ख़ास रिपोर्ट 
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ईद की नमाज ईदगाह-मस्जिद में अदा करें, नियमों का करें पालन: रूही अंजुम

सहारनपुर । ईद-उल-फितर के मद्देनज़र समाजवादी पार्टी की प्रदेश सचिव रूही अंजुम ने लोगों से त्योहार को शांति, संयम और आपसी भाईचारे के साथ मनाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि ईद का पावन पर्व प्रेम, इंसानियत और एकता का संदेश देता है, इसलिए सभी लोग इसे सौहार्दपूर्ण वातावरण में मनाएं।

रूही अंजुम ने विशेष रूप से मुस्लिम समुदाय से अपील करते हुए कहा कि ईद की नमाज केवल ईदगाह और मस्जिदों में ही अदा करें तथा सड़कों पर नमाज अदा करने से परहेज करें। उन्होंने कहा कि इससे व्यवस्था बनी रहती है और आमजन को किसी प्रकार की असुविधा भी नहीं होती।

उन्होंने आगे कहा कि शासन-प्रशासन द्वारा जारी गाइडलाइन का पूरी तरह पालन करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। त्योहार के दौरान अनुशासन और सहयोग बनाए रखना ही समाज की मजबूती का प्रतीक है।

रूही अंजुम ने लोगों से यह भी आग्रह किया कि किसी भी अफवाह या भड़काऊ बातों पर ध्यान न दें और शांति बनाए रखें। उन्होंने कहा कि सभी की समझदारी और सहयोग से ही ईद का त्योहार सही मायनों में खुशी और भाईचारे के साथ मनाया जा सकता है। रिपोर्ट - गुलवेज़ आलम कैराना
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ईद पर सड़कों पर नमाज पढ़ने से बचें, कानून का करें पालन: डॉ. शाज़िया नाज़

देवबंद । ईद-उल-फितर के मद्देनज़र कांग्रेस पार्टी की जिला उपाध्यक्ष सहारनपुर एवं देवबंद की प्रथम महिला पालिका अध्यक्ष मरहूम ज़ीनत नाज़ की बेटी डॉ. शाज़िया नाज़ ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि सड़कों पर नमाज अदा करने से बचें और तय स्थानों जैसे ईदगाह व मस्जिदों में ही नमाज अदा करें। उन्होंने कहा कि त्योहार के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है और इसमें हर नागरिक की भागीदारी जरूरी है।

डॉ. शाज़िया नाज़ ने कहा कि ईद का त्योहार आपसी भाईचारे, प्रेम और सौहार्द का प्रतीक है। ऐसे में सभी लोगों को प्रशासन द्वारा बनाए गए नियमों का पालन करना चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार की असुविधा या अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न न हो। उन्होंने कहा कि सड़कों पर नमाज अदा करने से यातायात प्रभावित होता है, जिससे आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

उन्होंने आगे कहा कि प्रशासन भी लगातार व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए प्रयासरत रहता है, इसलिए नागरिकों का कर्तव्य है कि वे सहयोग करें और निर्धारित स्थानों पर ही इबादत करें। इससे न केवल व्यवस्था बनी रहती है, बल्कि त्योहार की गरिमा भी कायम रहती है।

डॉ. शाज़िया नाज़ ने लोगों से शांति और भाईचारे के साथ ईद मनाने की अपील करते हुए कहा कि सभी एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करें और मिल-जुलकर त्योहार की खुशियां साझा करें। उन्होंने कहा कि समाज में आपसी सौहार्द और एकता बनाए रखना ही ईद का असली संदेश है।

साथ ही उन्होंने जरूरतमंद लोगों की मदद करने पर भी जोर दिया और कहा कि त्योहार के मौके पर गरीब और जरूरतमंदों का विशेष ध्यान रखना चाहिए, ताकि हर किसी के चेहरे पर मुस्कान आ सके। रिपोर्ट - इमरान अब्बास
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रूही अंजुम के नेतृत्व में एससी समाज के लोग भाजपा-बसपा छोड़कर सपा में शामिल– काशीराम जयंती पर समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने मनाया पीडीए दिवस

सहारनपुर। काशीराम जयंती के अवसर पर समाजवादी पार्टी ने पीडीए दिवस का आयोजन कर संगठन की मजबूती और सामाजिक न्याय के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का संदेश दिया। इस अवसर पर डेढ़ सौ से अधिक एससी समाज के लोगों ने भाजपा और बसपा छोड़कर सपा में शामिल होकर पार्टी का दामन थामा।

समाजवादी पार्टी की  प्रदेश सचिव रूही अंजुम के नेतृत्व में शामिल हुए लोग पार्टी की प्राथमिकताओं और काशीराम जी के आदर्शों को आगे बढ़ाने का संकल्प लेकर आए। इस समूह में महिलाओं की भी महत्वपूर्ण भागीदारी रही, जिनमें कविता, लीला, सावित्री, उषा, सीमा, मेसी, माया, शिमला देवी, भगवती, बबिता, संतोष, चंपा, उर्मिला शामिल थीं। पुरुष सदस्यों में राजकुमार बिरला, उस्मान, जुबैर, जितेंद्र वाल्मीकि, बदर, जिन्दा हसन, सलमान, देवांश गोस्वामी, राजन एल, संजीव नौटियाल और भगत सुमित धीमान शामिल थे।

कार्यक्रम सहारनपुर के पंचायत गांव उनाली में समाजवादी पार्टी के कार्यालय पर आयोजित किया गया, जहां सभी जुड़े सदस्यों को रूही अंजुम ने पार्टी की लाल टोपी पहनाई और स्वागत किया।

रूही अंजुम ने उपस्थित लोगों से कहा कि काशीराम जी के आदर्शों को साकार करना और समाज के कमजोर वर्गों को सशक्त बनाना हमारी प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने संगठन में सक्रिय भागीदारी की अपील करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी हर वर्ग के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।

कार्यक्रम में शामिल लोगों ने पार्टी की नीतियों और कार्यकर्ताओं के प्रति विश्वास का प्रदर्शन किया। पार्टी ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी वर्गों को जोड़कर ही वास्तविक सामाजिक न्याय और समानता सुनिश्चित की जा सकती है।
रिपोर्ट - गुलवेज़ आलम कैराना
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सहारनपुर में सपा नेत्री रूही अंजुम ने कांशीराम जयंती पर पीडीए दिवस में दिखाई प्रेरक भूमिका

सहारनपुर। बहुजन समाज के प्रणेता कांशीराम की 92वीं जयंती पर सहारनपुर में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने जोरदार पीडीए दिवस मनाया।

कार्यक्रम में कांशीराम के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उनके आदर्शों और विचारों को याद किया गया। प्रमुख रूप से उपस्थित रूही अंजुम ने कहा, “पीडीए दिवस केवल जयंती नहीं, यह कमजोर और वंचित वर्गों के अधिकारों की रक्षा और सामाजिक न्याय की आवाज का प्रतीक है। हमें उनके आदर्शों को जीवन में उतारना होगा।”

रूही अंजुम ने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे समानता और न्याय की भावना को मजबूत करें और हर कदम पर कांशीराम के विचारों को अपनाएँ।

समापन अवसर पर उन्होंने कहा कि समाज के पिछड़े और कमजोर वर्गों के अधिकारों की रक्षा में सक्रिय भूमिका निभाना हर कार्यकर्ता की जिम्मेदारी है।

कार्यक्रम में सपा के दर्जनों वरिष्ठ पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल थे, जिनमें सरफराज खान, विनोद ताजिया, उस्मान, जुबैर, जितेंद्र, कुलदीप वाल्मीकि, मजहिर राणा, जिंदा हसन, ब्रदर शेरवानी, नावेद राणा, सलमान, गफ्फार मलिक और राजकुमार प्रमुख रूप से मौजूद रहे। रिपोर्ट - गुलवेज़ आलम कैराना
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दिल्ली से गुजरने वाले ट्रकों पर ईसीसी बढ़ोतरी: एआईएमटीसी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का किया स्वागत, क्रियान्वयन में स्पष्टता की मांग

नई दिल्ली। देश के सड़क परिवहन क्षेत्र के प्रमुख संगठन ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (AIMTC) ने दिल्ली को ट्रांजिट मार्ग के रूप में उपयोग करने वाले वाणिज्यिक वाहनों पर पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क (ECC) बढ़ाने के संबंध में आए सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्णय का स्वागत किया है। संगठन ने साथ ही यह भी अपील की है कि इस फैसले के क्रियान्वयन में स्पष्टता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जाए, ताकि परिवहन उद्योग को अनावश्यक कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।

एआईएमटीसी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. हरीश सभरवाल ने कहा कि एयर क्वालिटी मैनेजमेंट आयोग (CAQM) की सिफारिश पर दिल्ली से गुजरने वाले ट्रकों के लिए ईसीसी को मौजूदा ₹2600 से बढ़ाकर ₹4000 किया गया है और इसमें हर वर्ष 5 प्रतिशत की वृद्धि का प्रावधान भी रखा गया है। उनका कहना है कि इस निर्णय का उद्देश्य उन वाणिज्यिक वाहनों को हतोत्साहित करना है जिनका गंतव्य दिल्ली नहीं होता, लेकिन वे दिल्ली के रास्ते से गुजरते हैं।

उन्होंने कहा कि यदि ट्रांजिट वाहन ईस्टर्न और वेस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे जैसे वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करें तो राष्ट्रीय राजधानी में अनावश्यक यातायात और प्रदूषण को कम करने में मदद मिल सकती है।

स्पष्ट व्यवस्था की जरूरत

डॉ. सभरवाल ने यह भी कहा कि इस फैसले को लागू करते समय यह बेहद आवश्यक है कि ट्रांजिट वाहनों की पहचान के लिए स्पष्ट और व्यावहारिक व्यवस्था बनाई जाए। उनके अनुसार, बढ़ा हुआ ईसीसी केवल उन्हीं ट्रकों पर लागू होना चाहिए जो वास्तव में दिल्ली को ट्रांजिट मार्ग के रूप में उपयोग करते हैं।

जिन वाहनों का वास्तविक गंतव्य दिल्ली है और जो यहां लोडिंग या अनलोडिंग के लिए आते हैं, उन पर यह शुल्क नहीं लगाया जाना चाहिए। यदि इस व्यवस्था में किसी प्रकार की अस्पष्टता रहती है तो इससे दिल्ली के व्यापार और उपभोक्ताओं की सेवा करने वाले परिवहन संचालकों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

परिस्थितियां अब पहले से अलग

एआईएमटीसी के अनुसार, पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क की व्यवस्था वर्ष 2015 में लागू की गई थी, जब दिल्ली के आसपास बने ईस्टर्न और वेस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे पूरी तरह संचालित नहीं थे। आज इन एक्सप्रेसवे के चालू होने के बाद लंबी दूरी के अधिकांश ट्रांजिट वाहन इन्हीं मार्गों का उपयोग कर रहे हैं।

इसलिए वर्तमान समय में दिल्ली में प्रवेश करने वाले अधिकांश ट्रक वास्तव में शहर के भीतर माल की डिलीवरी के लिए आते हैं और इस तथ्य को संशोधित ईसीसी लागू करते समय ध्यान में रखा जाना चाहिए।

प्रदूषण के कई कारण

डॉ. सभरवाल ने यह भी कहा कि ट्रकों पर ईसीसी और दिल्ली-एनसीआर में वाणिज्यिक वाहनों की आयु सीमा जैसी पाबंदियों के बावजूद, खासकर सर्दियों के मौसम में, वायु प्रदूषण के स्तर में अपेक्षित कमी देखने को नहीं मिली है। इससे यह स्पष्ट होता है कि वायु प्रदूषण की समस्या कई कारणों से जुड़ी हुई है।

उन्होंने कहा कि पराली जलाना, निजी वाहनों की बढ़ती संख्या, निर्माण कार्यों से उठने वाली धूल और औद्योगिक गतिविधियां भी वायु गुणवत्ता को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण कारक हैं।

बीएस-VI ट्रकों को छूट देने की अपील

डॉ. हरीश सभरवाल ने बताया कि बीएस-VI ट्रक आधुनिक उत्सर्जन नियंत्रण तकनीक से लैस होते हैं और इन्हें भारत सरकार के कड़े उत्सर्जन मानकों के अनुसार प्रमाणित किया गया है। इनमें डीज़ल एग्जॉस्ट फ्लूइड (DEF) जैसी उन्नत तकनीक का उपयोग किया जाता है, जिससे प्रदूषण काफी कम होता है।

इसी को ध्यान में रखते हुए एआईएमटीसी ने सुप्रीम कोर्ट में एक इंटरलोक्यूटरी एप्लीकेशन दायर कर बीएस-VI ट्रकों को ईसीसी से छूट देने और उन्हें उनकी वैध 15 वर्ष की आयु सीमा तक दिल्ली-एनसीआर में संचालन की अनुमति देने का अनुरोध किया है।

संतुलित समाधान की आवश्यकता

डॉ. सभरवाल ने उम्मीद जताई कि माननीय न्यायालय इस अनुरोध पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगा, ताकि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए एक संतुलित और व्यावहारिक समाधान निकल सके।

उन्होंने यह भी दोहराया कि परिवहन उद्योग प्रदूषण से निपटने के लिए वैज्ञानिक और प्रभावी उपायों का समर्थन करता है। साथ ही यह भी जरूरी है कि देश की अर्थव्यवस्था और रोजमर्रा की जरूरतों को बनाए रखने के लिए माल की सुचारु आवाजाही सुनिश्चित की जाए।


ख़ास रिपोर्ट:
ऊषा महाना
पत्रकार, नई दिल्ली

प्रकाशन:
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत
देश की राजधानी दिल्ली से प्रकाशित
राष्ट्रीय समाचार पत्रिका / न्यूज़ पोर्टल / यूट्यूब चैनल
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सहारनपुर देहात में इफ्तार पार्टी बनी सामाजिक एकता का मंच, सपा प्रदेश सचिव रूही अंजुम की मौजूदगी से बढ़ा उत्साह

सहारनपुर। पवित्र रमज़ान माह के दौरान आयोजित इफ्तार कार्यक्रम जहां एक ओर भाईचारे और सामाजिक एकता का संदेश देते हैं, वहीं ऐसे कार्यक्रम समाज के विभिन्न वर्गों को एक मंच पर जोड़ने का काम भी करते हैं। इसी क्रम में सहारनपुर देहात विधानसभा क्षेत्र के गांव मेघछप्पर में हाजी मंसूर के आवास पर आयोजित भव्य इफ्तार पार्टी में समाजवादी पार्टी की प्रदेश सचिव रूही अंजुम ने शिरकत कर कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ा दिया।

इफ्तार कार्यक्रम में क्षेत्र के गणमान्य लोगों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों की उपस्थिति रही। सभी ने मिलकर रोज़ा इफ्तार किया और आपसी सौहार्द, भाईचारे तथा शांति की दुआएं मांगी। इस दौरान माहौल पूरी तरह से धार्मिक आस्था और सामाजिक एकजुटता से सराबोर नजर आया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए समाजवादी पार्टी की प्रदेश सचिव रूही अंजुम ने कहा कि रमज़ान का पवित्र महीना हमें सब्र, त्याग और इंसानियत का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि रोज़ा केवल भूखा-प्यासा रहने का नाम नहीं है, बल्कि यह आत्मसंयम, दूसरों के दुख-दर्द को समझने और समाज में प्रेम व भाईचारे को बढ़ावा देने का अवसर भी है।

उन्होंने कहा कि आज के दौर में समाज को सबसे ज्यादा जरूरत आपसी सौहार्द और एकता की है। ऐसे आयोजन लोगों को करीब लाने का काम करते हैं और समाज में सकारात्मक संदेश फैलाते हैं। रूही अंजुम ने कहा कि समाजवादी पार्टी हमेशा से सामाजिक न्याय, भाईचारे और सभी वर्गों के सम्मान की राजनीति करती आई है और आगे भी इसी विचारधारा के साथ काम करती रहेगी।

इफ्तार पार्टी के मेजबान हाजी मंसूर ने सभी मेहमानों का स्वागत करते हुए कहा कि रमज़ान का महीना इंसानियत और नेकी का पैगाम देता है। उन्होंने कहा कि इस तरह के कार्यक्रमों का उद्देश्य लोगों को एक साथ बैठाकर आपसी रिश्तों को मजबूत करना है।

कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीणों और क्षेत्रीय लोगों ने भी भाग लिया। लोगों ने एक-दूसरे को रमज़ान की मुबारकबाद दी और क्षेत्र में शांति, तरक्की तथा खुशहाली के लिए दुआ की।

इफ्तार के बाद लोगों के बीच सामाजिक और क्षेत्रीय मुद्दों पर भी चर्चा हुई, जिसमें गांव और क्षेत्र के विकास को लेकर विचार साझा किए गए। कार्यक्रम का समापन आपसी भाईचारे और एकता के संदेश के साथ हुआ।

स्थानीय लोगों का कहना था कि ऐसे आयोजन समाज में सकारात्मक माहौल बनाते हैं और लोगों के बीच आपसी रिश्तों को और मजबूत करते हैं। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने इसे एक यादगार और प्रेरणादायक आयोजन बताया। रिपोर्ट -गुलवेज़ आलम कैराना