नई दिल्ली। देश के सड़क परिवहन क्षेत्र के प्रमुख संगठन ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (AIMTC) ने दिल्ली को ट्रांजिट मार्ग के रूप में उपयोग करने वाले वाणिज्यिक वाहनों पर पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क (ECC) बढ़ाने के संबंध में आए सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्णय का स्वागत किया है। संगठन ने साथ ही यह भी अपील की है कि इस फैसले के क्रियान्वयन में स्पष्टता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जाए, ताकि परिवहन उद्योग को अनावश्यक कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।
एआईएमटीसी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. हरीश सभरवाल ने कहा कि एयर क्वालिटी मैनेजमेंट आयोग (CAQM) की सिफारिश पर दिल्ली से गुजरने वाले ट्रकों के लिए ईसीसी को मौजूदा ₹2600 से बढ़ाकर ₹4000 किया गया है और इसमें हर वर्ष 5 प्रतिशत की वृद्धि का प्रावधान भी रखा गया है। उनका कहना है कि इस निर्णय का उद्देश्य उन वाणिज्यिक वाहनों को हतोत्साहित करना है जिनका गंतव्य दिल्ली नहीं होता, लेकिन वे दिल्ली के रास्ते से गुजरते हैं।उन्होंने कहा कि यदि ट्रांजिट वाहन ईस्टर्न और वेस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे जैसे वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करें तो राष्ट्रीय राजधानी में अनावश्यक यातायात और प्रदूषण को कम करने में मदद मिल सकती है।
स्पष्ट व्यवस्था की जरूरत
डॉ. सभरवाल ने यह भी कहा कि इस फैसले को लागू करते समय यह बेहद आवश्यक है कि ट्रांजिट वाहनों की पहचान के लिए स्पष्ट और व्यावहारिक व्यवस्था बनाई जाए। उनके अनुसार, बढ़ा हुआ ईसीसी केवल उन्हीं ट्रकों पर लागू होना चाहिए जो वास्तव में दिल्ली को ट्रांजिट मार्ग के रूप में उपयोग करते हैं।
जिन वाहनों का वास्तविक गंतव्य दिल्ली है और जो यहां लोडिंग या अनलोडिंग के लिए आते हैं, उन पर यह शुल्क नहीं लगाया जाना चाहिए। यदि इस व्यवस्था में किसी प्रकार की अस्पष्टता रहती है तो इससे दिल्ली के व्यापार और उपभोक्ताओं की सेवा करने वाले परिवहन संचालकों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
परिस्थितियां अब पहले से अलग
एआईएमटीसी के अनुसार, पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क की व्यवस्था वर्ष 2015 में लागू की गई थी, जब दिल्ली के आसपास बने ईस्टर्न और वेस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे पूरी तरह संचालित नहीं थे। आज इन एक्सप्रेसवे के चालू होने के बाद लंबी दूरी के अधिकांश ट्रांजिट वाहन इन्हीं मार्गों का उपयोग कर रहे हैं।
इसलिए वर्तमान समय में दिल्ली में प्रवेश करने वाले अधिकांश ट्रक वास्तव में शहर के भीतर माल की डिलीवरी के लिए आते हैं और इस तथ्य को संशोधित ईसीसी लागू करते समय ध्यान में रखा जाना चाहिए।
प्रदूषण के कई कारण
डॉ. सभरवाल ने यह भी कहा कि ट्रकों पर ईसीसी और दिल्ली-एनसीआर में वाणिज्यिक वाहनों की आयु सीमा जैसी पाबंदियों के बावजूद, खासकर सर्दियों के मौसम में, वायु प्रदूषण के स्तर में अपेक्षित कमी देखने को नहीं मिली है। इससे यह स्पष्ट होता है कि वायु प्रदूषण की समस्या कई कारणों से जुड़ी हुई है।
उन्होंने कहा कि पराली जलाना, निजी वाहनों की बढ़ती संख्या, निर्माण कार्यों से उठने वाली धूल और औद्योगिक गतिविधियां भी वायु गुणवत्ता को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण कारक हैं।
बीएस-VI ट्रकों को छूट देने की अपील
डॉ. हरीश सभरवाल ने बताया कि बीएस-VI ट्रक आधुनिक उत्सर्जन नियंत्रण तकनीक से लैस होते हैं और इन्हें भारत सरकार के कड़े उत्सर्जन मानकों के अनुसार प्रमाणित किया गया है। इनमें डीज़ल एग्जॉस्ट फ्लूइड (DEF) जैसी उन्नत तकनीक का उपयोग किया जाता है, जिससे प्रदूषण काफी कम होता है।
इसी को ध्यान में रखते हुए एआईएमटीसी ने सुप्रीम कोर्ट में एक इंटरलोक्यूटरी एप्लीकेशन दायर कर बीएस-VI ट्रकों को ईसीसी से छूट देने और उन्हें उनकी वैध 15 वर्ष की आयु सीमा तक दिल्ली-एनसीआर में संचालन की अनुमति देने का अनुरोध किया है।
संतुलित समाधान की आवश्यकता
डॉ. सभरवाल ने उम्मीद जताई कि माननीय न्यायालय इस अनुरोध पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगा, ताकि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए एक संतुलित और व्यावहारिक समाधान निकल सके।
उन्होंने यह भी दोहराया कि परिवहन उद्योग प्रदूषण से निपटने के लिए वैज्ञानिक और प्रभावी उपायों का समर्थन करता है। साथ ही यह भी जरूरी है कि देश की अर्थव्यवस्था और रोजमर्रा की जरूरतों को बनाए रखने के लिए माल की सुचारु आवाजाही सुनिश्चित की जाए।
ख़ास रिपोर्ट:
ऊषा महाना
पत्रकार, नई दिल्ली
प्रकाशन:
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत
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