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अरशद के परिजनों से मिले AIMIM के पश्चिम प्रदेश संयुक्त सचिवपरिजनों को दी सांत्वना, न्याय का दिलाया भरोसा
बिड़ौली/झिंझाना। गांव इस्सोपुर टील में दिनदहाड़े हुई दर्दनाक हत्या के बाद शोक में डूबे कक्षा 12 के छात्र अरशद के परिवार से मिलने (AIMIM) के पश्चिम प्रदेश संयुक्त सचिव हाफिज मोहम्मद इनाम पहुंचे। उन्होंने परिजनों से मुलाकात कर गहरा दुख व्यक्त किया और इस कठिन घड़ी में हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया।
परिजनों से बातचीत के दौरान अरशद के पिता और भाइयों ने परिवार की पीड़ा साझा की। उन्होंने बताया कि अरशद परिवार का सबसे छोटा बेटा था। उससे बड़े दो भाई मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं, जबकि अरशद पढ़ाई में जुटा हुआ था और कक्षा 12 का छात्र था। उसकी अचानक और निर्मम हत्या से पूरा परिवार सदमे में है और घर का माहौल गमगीन बना हुआ है।
गौरतलब है कि चार दिन पूर्व गांव इस्सोपुर टील में अरशद की चाकुओं से गोदकर और गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। तभी से शोक व्यक्त करने वालों का तांता लगा हुआ है और लोग परिवार को ढांढस बंधाने पहुंच रहे हैं।
बुधवार को AIMIM के पश्चिम प्रदेश संयुक्त सचिव के साथ पार्टी के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मेहराजुद्दीन, नूर मोहम्मद, अली रजा, नसीम सहित अन्य लोग भी मौके पर पहुंचे। सभी ने शोक संतप्त परिवार को सांत्वना दी और न्याय की लड़ाई में साथ खड़े रहने का भरोसा दिलाया।
इस अवसर पर हाफिज मोहम्मद इनाम ने कहा कि पार्टी और संगठन इस दुख की घड़ी में परिवार के साथ है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि दोषियों को सजा दिलाने और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे।
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पत्रकार शाकिर अली की खास रिपोर्ट
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सांसद इकरा हसन पर कथित टिप्पणी का विरोध मजदूर बेरोजगार एकता मंच ने बताया महिलाओं के सम्मान से जुड़ा गंभीर विषय
कांधला। कैराना में आयोजित एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान स्वामी विशाल रामदास द्वारा सांसद को लेकर दिए गए कथित बयान पर अब सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। इस बयान को लेकर मजदूर बेरोजगार एकता मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष सैय्यद मो. असलम ने कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे महिलाओं के सम्मान से जुड़ा गंभीर मामला बताया है।
मीडिया से बातचीत के दौरान सैय्यद मो. असलम ने कहा कि सार्वजनिक मंचों से दिए जाने वाले बयानों का समाज पर दूरगामी प्रभाव पड़ता है। ऐसे में वक्ताओं की जिम्मेदारी बनती है कि वे भाषा की मर्यादा और सामाजिक संवेदनशीलता का पूरा ध्यान रखें। उन्होंने कहा कि सांसद इकरा हसन एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि होने के साथ-साथ महिलाओं के सशक्तिकरण का प्रतीक भी हैं, इसलिए उनके विरुद्ध किसी भी प्रकार की आपत्तिजनक टिप्पणी न केवल अस्वीकार्य है, बल्कि समाज में गलत संदेश भी देती है।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सभी को प्राप्त है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि किसी के सम्मान को ठेस पहुंचाई जाए। भाषा की गरिमा और सामाजिक सौहार्द बनाए रखना उतना ही आवश्यक है जितना अपनी बात रखना।
सैय्यद मो. असलम ने सरकार से मांग की कि इस पूरे प्रकरण का संज्ञान लिया जाए और भविष्य में किसी भी महिला या जनप्रतिनिधि के खिलाफ इस प्रकार की बयानबाजी को रोका जाए। मजदूर बेरोजगार एकता मंच ने सांसद इकरा हसन के सम्मान में खुलकर समर्थन व्यक्त करते हुए समाज से आपसी भाईचारे, सम्मान और संवेदनशीलता बनाए रखने की अपील की।
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स्योहारा के विकास को लेकर सांसदों का एकजुट स्वरमुख्यमंत्री को लिखा गया पत्र, बस स्टैंड समेत बड़े प्रोजेक्ट्स पर बढ़ी हलचल
बिजनौर (उत्तर प्रदेश) नगर पालिका परिषद में लंबे समय से अटके पड़े विकास कार्यों को लेकर अब राजनीति और प्रशासन—दोनों स्तरों पर हलचल तेज हो गई है। स्योहारा नगर पालिका अध्यक्ष के सतत प्रयासों के बाद विभिन्न लोकसभा क्षेत्रों के सांसद एक मंच पर आते दिख रहे हैं। इन सांसदों ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर स्योहारा में प्रस्तावित महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर शीघ्र निर्णय और कार्रवाई की मांग की है।
किन-किन विकास कार्यों पर जोर
सांसदों द्वारा भेजे गए पत्रों में स्योहारा के लिए जिन परियोजनाओं को प्राथमिकता देने की बात कही गई है, उनमें—- स्थायी बस स्टैंड
- सब्जी–फल मंडी
- अंडरग्राउंड पार्किंग
- शॉपिंग कॉम्प्लेक्स
शामिल हैं।
इन सभी योजनाओं के लिए नगर पालिका परिषद द्वारा विधिवत प्रस्ताव पारित कर जिला प्रशासन और राजस्व विभाग को भेजे जा चुके हैं।
अवैध कब्जे बने बड़ी बाधा
पत्रों में यह गंभीर मुद्दा भी उठाया गया है कि जिन सरकारी भूमियों पर ये परियोजनाएं प्रस्तावित हैं, वहां अवैध कब्जे के प्रयास किए जा रहे हैं। इससे न केवल जनहित की योजनाएं बाधित हो रही हैं, बल्कि नगर के समग्र विकास पर भी असर पड़ रहा है। सांसदों ने मुख्यमंत्री से इन भूमियों को सुरक्षित कराने और संबंधित विभागों को स्पष्ट निर्देश जारी करने की मांग की है।यातायात समस्या बनी बड़ा सवाल
सांसदों ने यह भी रेखांकित किया कि स्योहारा में स्थायी बस स्टैंड के अभाव में आम नागरिकों को रोज़मर्रा की ज़िंदगी में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
- यातायात जाम
- अव्यवस्थित परिवहन
- यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े जोखिम
इन समस्याओं ने बस स्टैंड निर्माण को समय की सबसे बड़ी जरूरत बना दिया है।
सांसदों की एकजुट पहल
इस मुद्दे पर जिन सांसदों ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है, उनमें—- (मुरादाबाद)
- (संभल)
- (सहारनपुर)
- (नगीना)
- (रामपुर)
शामिल हैं। अलग-अलग राजनीतिक पृष्ठभूमि के सांसदों का इस तरह एकजुट होना स्योहारा के विकास को लेकर बनती राजनीतिक सहमति का संकेत माना जा रहा है।
फैसल वारसी की भूमिका अहम
स्थानीय स्तर पर नगर पालिका अध्यक्ष फैसल वारसी को इन तमाम प्रयासों का मुख्य प्रेरक माना जा रहा है। वे लगातार शासन–प्रशासन के समक्ष स्योहारा की समस्याओं और विकास की जरूरतों को मजबूती से उठाते रहे हैं। सांसदों द्वारा सामूहिक रूप से मुख्यमंत्री को पत्र लिखा जाना उनके प्रयासों की ठोस परिणति के रूप में देखा जा रहा है।जनता को बंधी नई उम्मीद
स्योहारा के नागरिकों को उम्मीद है कि मुख्यमंत्री स्तर से हस्तक्षेप के बाद इन बहुप्रतीक्षित परियोजनाओं को गति मिलेगी। यदि योजनाएं धरातल पर उतरती हैं, तो स्योहारा न केवल यातायात और व्यापार के लिहाज़ से सशक्त होगा, बल्कि आधुनिक शहरी सुविधाओं से भी जुड़ सकेगा।
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स्योहारा, जिला बिजनौर (उत्तर प्रदेश) से
पत्रकार: शमशाद मालिक की खास रिपोर्ट
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कंडेला विवाद: सांसद इकरा हसन पर टिप्पणी से सियासी भूचाल, वायरल वीडियो ने बढ़ाई हलचल
शामली। जनपद शामली के कंडेला गांव से जुड़ा एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है। वीडियो में गौरी शंकर गौशाला के स्वामी द्वारा को लेकर दिया गया बयान विवाद की वजह बन गया है। बताया जा रहा है कि यह वीडियो 31 जनवरी का है, जिसके सामने आने के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएँ देखने को मिल रही हैं।
क्या है पूरा मामला?
वायरल क्लिप में स्वामी द्वारा सांसद इकरा हसन के निजी जीवन को लेकर की गई टिप्पणी को लेकर लोगों में आक्रोश है। वीडियो सामने आते ही यह मामला सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर ट्रेंड करने लगा। समर्थक और विरोधी—दोनों पक्षों की ओर से बयानबाज़ी तेज़ हो गई है, जिससे इलाके का सियासी माहौल गरमा गया है।
सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया और राजनीतिक हलचल
वीडियो के वायरल होते ही ट्विटर, फेसबुक और व्हाट्सऐप पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। कई यूज़र्स ने बयान को आपत्तिजनक बताते हुए कार्रवाई की मांग की, तो कुछ लोगों ने इसे संदर्भ से काटकर पेश करने का आरोप लगाया। स्थानीय स्तर पर नेताओं और सामाजिक संगठनों ने भी इस मुद्दे पर अपने-अपने पक्ष रखे हैं।
प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की नजर
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासनिक स्तर पर भी निगरानी बढ़ाई गई है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अधिकारियों ने शांति बनाए रखने की अपील की है। वहीं, जनप्रतिनिधियों से अपेक्षा की जा रही है कि वे जिम्मेदार बयान देकर माहौल को शांत करें।
निष्कर्ष
कंडेला से उठा यह विवाद अब केवल एक वीडियो तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह राजनीतिक विमर्श का केंद्र बन गया है। ऐसे मामलों में तथ्यात्मक जांच, संयमित प्रतिक्रिया और संवाद ही समाधान का रास्ता दिखा सकते हैं।
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पत्रकार ज़मीर आलम की खास रिपोर्ट
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तीसरे कार्यकाल के तीसरे बजट में अल्पसंख्यकों पर फोकस, बढ़े आवंटन का भाजपा नेता मुबारिक हसन गुर्जर ने किया स्वागत
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नई दिल्ली। मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल के तीसरे केंद्रीय बजट में अल्पसंख्यक समुदायों के हितों को ध्यान में रखते हुए अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय के बजट में बढ़ोतरी की गई है। द्वारा पेश किए गए बजट 2026–27 में मंत्रालय के लिए कुल 3400 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है, जबकि वर्ष 2025–26 में यह राशि 3395.62 करोड़ रुपये थी। इस प्रकार बजट में 4.38 करोड़ रुपये की वृद्धि दर्ज की गई है।
सरकार के अनुसार, यह आवंटित राशि अल्पसंख्यक समुदायों के शैक्षिक, सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण से जुड़ी योजनाओं पर खर्च की जाएगी। विशेष रूप से छात्रवृत्ति योजनाएं, कौशल विकास कार्यक्रम और बहु-क्षेत्रीय विकास कार्यक्रम (MSDP) जैसी योजनाओं को इस बजट से नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे ज़मीनी स्तर पर लाभ पहुंचाने का मार्ग प्रशस्त होगा।
इस बजट बढ़ोतरी का के नेता ने स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार अल्पसंख्यक समुदायों के विकास के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है और बजट में की गई यह वृद्धि सरकार की सकारात्मक सोच और समावेशी नीति को दर्शाती है।
मुबारिक हसन गुर्जर ने कहा, “ के नेतृत्व में ‘सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास’ की नीति पर लगातार काम हो रहा है। अल्पसंख्यक समाज के उत्थान के लिए सरकार निरंतर प्रयासरत है।”
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भले ही बजट वृद्धि की राशि सीमित प्रतीत होती हो, लेकिन सांकेतिक रूप से यह कदम महत्वपूर्ण है। खासकर ऐसे समय में, जब सरकार अपने तीसरे कार्यकाल में सामाजिक संतुलन और समावेशी विकास पर विशेष जोर दे रही है, यह संदेश दूरगामी प्रभाव डाल सकता है।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आवंटित बजट का कितना प्रभावी और पारदर्शी उपयोग किया जाता है और यह विभिन्न योजनाओं के माध्यम से किस हद तक ज़मीनी स्तर पर जरूरतमंदों तक पहुंच पाता है।
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पत्रकार: गुलवेज आलम
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