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अमीर आलम–नवाज़िश आलम का बड़ा सियासी फैसला!आसपा छोड़ कांग्रेस का थामेंगे हाथ, 23 सितंबर को दिल्ली में सदस्यता ग्रहण की तैयारी

मुजफ्फरनगर/शामली। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। पूर्व सांसद अमीर आलम खान और उनके पुत्र, पूर्व विधायक नवाज़िश आलम खान, ने आज़ाद समाज पार्टी से अलग होने के बाद अब कांग्रेस में शामिल होने का ऐलान किया है। दोनों नेताओं के 23 सितंबर 2026 को नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में पार्टी की सदस्यता ग्रहण करने की बात सामने आई है।

शुक्रवार, 18 सितंबर को नवाज़िश आलम ने सोशल मीडिया के माध्यम से आज़ाद समाज पार्टी से अलग होने की जानकारी सार्वजनिक की थी। इसके बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश के राजनीतिक हलकों में उनके अगले कदम को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। अलग-अलग राजनीतिक दलों को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे थे, लेकिन अब कांग्रेस में जाने की घोषणा के साथ तस्वीर काफी हद तक स्पष्ट हो गई है।

आसपा से अलग होने के बाद कांग्रेस का रुख

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार अमीर आलम और नवाज़िश आलम ने आज़ाद समाज पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दिया है। अमीर आलम ने पार्टी नेतृत्व के साथ किए गए वादों के पूरा न होने और संवाद की कमी की बात कही है, जबकि नवाज़िश आलम की ओर से भी पार्टी में अपेक्षित सम्मान नहीं मिलने की बात सामने आई है। हालांकि, आसपा से जुड़े नेताओं की ओर से अलग-अलग कारण बताए गए हैं और सीटों की दावेदारी को लेकर भी मतभेद की चर्चा सामने आई है।

अब दोनों नेताओं ने कांग्रेस के साथ अपनी अगली राजनीतिक पारी शुरू करने की तैयारी कर ली है। 23 सितंबर को दिल्ली में होने वाला कार्यक्रम इस पूरे घटनाक्रम का अगला महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।

अमीर आलम का लंबा राजनीतिक सफर

अमीर आलम खान पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं। उन्होंने 1985 में थानाभवन विधानसभा सीट से अपनी चुनावी राजनीति की शुरुआत की। इसके बाद मोरना और फिर थानाभवन से विधानसभा पहुंचे। बाद में वह कैराना लोकसभा सीट से सांसद और राज्यसभा सदस्य भी रहे।

उनके राजनीतिक सफर में अलग-अलग समय पर कई दलों के साथ जुड़ाव रहा है। वर्ष 2018 में वह अपने पुत्र नवाज़िश आलम के साथ राष्ट्रीय लोकदल में गए थे। इसके बाद वर्ष 2025 में पिता-पुत्र ने आज़ाद समाज पार्टी का दामन थामा था। अब करीब डेढ़ साल बाद आसपा से अलग होकर कांग्रेस में जाने की घोषणा की गई है।

नवाज़िश आलम भी रह चुके हैं विधायक

अमीर आलम के पुत्र नवाज़िश आलम ने भी सक्रिय राजनीति में अपनी पहचान बनाई। वर्ष 2012 में वह समाजवादी पार्टी के टिकट पर बुढ़ाना विधानसभा सीट से विधायक चुने गए थे। इसके बाद उन्होंने अलग-अलग राजनीतिक दलों के साथ अपनी राजनीतिक यात्रा जारी रखी। अब वह एक बार फिर अपने पिता के साथ नई राजनीतिक पारी की ओर बढ़ रहे हैं।

पश्चिमी यूपी की राजनीति पर नजर

अमीर आलम और नवाज़िश आलम के कांग्रेस में शामिल होने के फैसले को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के राजनीतिक घटनाक्रम के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि इस कदम का आगामी चुनावी राजनीति पर वास्तविक प्रभाव क्या होगा, यह आने वाले समय में ही स्पष्ट होगा।

फिलहाल इतना साफ है कि आज़ाद समाज पार्टी छोड़ने के बाद पिता-पुत्र ने अपने अगले राजनीतिक पड़ाव के रूप में कांग्रेस को चुना है और 23 सितंबर को दिल्ली में प्रस्तावित सदस्यता ग्रहण कार्यक्रम पर अब राजनीतिक हलकों की निगाहें टिकी हुई हैं।

विधायक दर्पण — विशेष रिपोर्ट
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत
देश की राजधानी दिल्ली से प्रकाशित राष्ट्रीय राजनीतिक समाचार पत्रिका

रिपोर्ट: ज़मीर आलम, पत्रकार
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एआईएमआईएम की समीक्षा बैठक में प्रदेश अध्यक्ष के कार्यक्रम पर चर्चा

बिडौली। बिडौली सादात स्थित एआईएमआईएम कार्यालय पर शुक्रवार देर शाम पार्टी की समीक्षा बैठक हुई। बैठक में पश्चिम प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मेहताब चौहान के कैराना में होने वाले कार्यक्रम को लेकर चर्चा की गई।
बैठक में बताया गया कि पश्चिम प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मेहताब चौहान 20 सितंबर को कैराना पहुंचकर कार्यकर्ताओं की बैठक को संबोधित करेंगे। कार्यक्रम विधानसभा प्रत्याशी एडवोकेट इरफान इंजीनियर के नेतृत्व में आयोजित किया जाएगा। पदाधिकारियों ने कार्यकर्ताओं से कार्यक्रम में पहुंचने की अपील की।
बैठक की अध्यक्षता पश्चिम प्रदेश संयुक्त सचिव हाफिज मोहम्मद इनाम ने की। इस दौरान कई लोगों ने एआईएमआईएम की सदस्यता ग्रहण की। हाफिज मोहम्मद इनाम ने नवनियुक्त सदस्यों का फूल मालाओं से स्वागत किया।
हाफिज इनाम ने कहा कि पार्टी दलित, मजदूर और पिछड़े वर्ग के हितों के लिए काम करती है। पार्टी को मजबूत करने के लिए घर-घर सदस्यता अभियान चलाया जाएगा।
इस दौरान ग्राम अध्यक्ष शौकीन, ब्लॉक अध्यक्ष अकरम खान, तौफीक, यूथ जिलाध्यक्ष एजाज, कय्यूम, जिशान, अनस आदि मौजूद रहे।

एआइएमआइएम की समीक्षा बैठक में आगामी चुनाव की रणनीति पर चर्चा।

बिड़ौली। झिंझाना क्षेत्र के गांव बिडौली सादात में AIMIM (ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन) पार्टी की एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया जानकारी के अनुसार मीटिंग बुधवार शाम को पार्टी के ब्लॉक अध्यक्ष अकरम खान के आवास पर की गई। इस अवसर पर कई कार्यकर्ताओं ने संगठन को मजबूत करने का संकल्प लिया।बैठक की अध्यक्षता कर रहे AIMIM पार्टी के अकरम खान ने मीटिंग में आने वाले सभी का स्वागत फूल मालाओं से किया और उन्हें पार्टी की विचारधारा से परिचित कराया।उन्होंने कहा कि AIMIM एक सामाजिक न्याय पर आधारित राजनीतिक आंदोलन है, जो दलितों, पिछड़ों, गरीबों और मजदूरों के अधिकारों की लड़ाई लड़ रहा है। पार्टी का उद्देश्य हाशिये पर खड़े लोगों की आवाज़ को सदनों तक पहुँचाना है।  सभी ने पार्टी की विचारधारा पर आस्था जताई और सामाजिक एवं राजनीतिक रूप से सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया। पश्चिम प्रदेश संयुक्त सचिव हाफिज इनाम ने उपस्थित जनों को संबोधित करते हुए कहा आज AIMIM युवाओं और आम जनता के बीच एक सशक्त विकल्प के रूप में उभरी है। हमारा लक्ष्य है कि हम हर घर तक पहुँचें और जन-जन को जोड़ें। जिला अध्यक्ष परवेज चौधरी ने कहा कि आने वाले समय में घर-घर सदस्यता अभियान चलाया जाएगा, ताकि पार्टी की पहुंच और जनाधार और मजबूत हो।आगामी चुनाव को लेकर भी चर्चा की गई बैठक के दौरान आगामी चुनावों को लेकर भी रणनीति पर विचार-विमर्श किया गया। संगठन को ग्राम स्तर तक मजबूत करने पर विशेष बल दिया गया।इस बैठक में,प्रत्याशी कैराना विधानसभा चौधरी इरफान इंजीनियर, एजाज, नफीस, सुल्तान,कय्यूम,अब्दुल सहित कार्यकर्ता और समर्थक भी उपस्थित रहे।

अमीर आलम खान और नवाज़िश आलम खान ने आज़ाद समाज पार्टी को कहा अलविदा!

2027 से पहले पश्चिमी यूपी की सियासत में फिर हलचल, अब किस राजनीतिक राह पर बढ़ेगा पिता-पुत्र का कदम?

शामली/मुजफ्फरनगर।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। पूर्व सांसद अमीर आलम खान और उनके पुत्र, पूर्व विधायक नवाज़िश आलम खान के आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) से अलग होने की खबर सामने आने के बाद मुजफ्फरनगर, शामली और आसपास के राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।

नवाज़िश आलम खान की ओर से सोशल मीडिया के माध्यम से अपने और अपने पिता अमीर आलम खान के आज़ाद समाज पार्टी से इस्तीफे की जानकारी साझा किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, इस्तीफे के पीछे की वजह और आगे की राजनीतिक रणनीति को लेकर अभी कोई विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में इस घटनाक्रम को लेकर कई तरह की चर्चाएं जरूर शुरू हो गई हैं, लेकिन अंतिम तस्वीर आने में अभी समय लग सकता है।

पश्चिमी यूपी की राजनीति में लंबा अनुभव

अमीर आलम खान पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति का जाना-पहचाना नाम हैं। वह कैराना से लोकसभा सांसद रह चुके हैं और उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सदस्य के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। इसके अलावा वह उत्तर प्रदेश विधानसभा में थानाभवन और मोरना क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।

वहीं उनके पुत्र नवाज़िश आलम खान वर्ष 2012 से 2017 तक बुढ़ाना विधानसभा क्षेत्र से विधायक रहे। 2012 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी के रूप में बुढ़ाना सीट पर जीत दर्ज की थी।

यही राजनीतिक पृष्ठभूमि इस ताजा घटनाक्रम को पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिहाज से चर्चा का विषय बना रही है।

रालोद से आज़ाद समाज पार्टी तक का सफर

अमीर आलम खान और नवाज़िश आलम खान ने राष्ट्रीय लोकदल से अलग होने के बाद आज़ाद समाज पार्टी का रुख किया था। वर्ष 2025 की एक रिपोर्ट में दोनों को रालोद छोड़कर आज़ाद समाज पार्टी से जुड़ने वाले प्रमुख मुस्लिम नेताओं में शामिल बताया गया था।

इसके बाद नवाज़िश आलम खान पार्टी की पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गतिविधियों में सक्रिय नजर आए। जुलाई 2026 में मुजफ्फरनगर में आज़ाद समाज पार्टी के एक प्रदर्शन का नेतृत्व भी पूर्व विधायक नवाज़िश आलम खान के साथ पार्टी के स्थानीय पदाधिकारियों द्वारा किया गया था।

इससे साफ है कि पार्टी से अलग होने की मौजूदा खबर से पहले तक नवाज़िश आलम पार्टी की गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे।

2027 की तैयारी और चुनावी चर्चाएं

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को देखते हुए पश्चिमी उत्तर प्रदेश में राजनीतिक गतिविधियां पहले से ही तेज हैं। ऐसे समय में अमीर आलम खान और नवाज़िश आलम खान का आज़ाद समाज पार्टी से अलग होना स्वाभाविक रूप से राजनीतिक चर्चाओं को जन्म दे रहा है।

मिली जानकारी के मुताबिक अमीर आलम खान ने मुजफ्फरनगर सदर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने की तैयारी और घोषणा की थी, जबकि नवाज़िश आलम खान के बुढ़ाना क्षेत्र में सक्रिय होने की चर्चा थी। 

अब सबसे बड़ा सवाल—अगला कदम क्या?

अमीर आलम खान और नवाज़िश आलम खान के आज़ाद समाज पार्टी से अलग होने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि उनकी अगली राजनीतिक दिशा क्या होगी?

क्या पिता-पुत्र किसी पुराने राजनीतिक दल में वापसी करेंगे?
क्या किसी नए राजनीतिक गठजोड़ का हिस्सा बनेंगे?
क्या 2027 के विधानसभा चुनाव में दोनों अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों से मैदान में उतरेंगे?
या फिर चुनावी राजनीति को लेकर कोई नया फैसला सामने आएगा?

इन सभी सवालों के जवाब आने वाले दिनों में राजनीतिक घटनाक्रम के साथ स्पष्ट हो सकते हैं।

फिलहाल इतना जरूर है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में अमीर आलम खान का लंबा राजनीतिक अनुभव और नवाज़िश आलम खान की क्षेत्रीय सक्रियता इस घटनाक्रम को महत्वपूर्ण बनाती है। लेकिन अगली राजनीतिक पारी किस दिशा में जाएगी, इसका फैसला स्वयं अमीर आलम खान और नवाज़िश आलम खान के आगामी बयानों और राजनीतिक निर्णयों से ही स्पष्ट होगा।

क्या फिर बदलेगा पश्चिमी यूपी का राजनीतिक समीकरण?

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में चुनाव से पहले नेताओं का दल बदलना कोई नई बात नहीं है। लेकिन जब किसी अनुभवी पूर्व सांसद और पूर्व विधायक की राजनीतिक दिशा बदलती है, तो उसका असर स्थानीय राजनीतिक समीकरणों पर चर्चा का विषय जरूर बनता है।

अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि अमीर आलम खान और नवाज़िश आलम खान किस दल में जाएंगे या 2027 में किस सीट से चुनाव लड़ेंगे। राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं जरूर तेज हैं, लेकिन आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना ही उचित होगा।

अब सबकी निगाहें अमीर आलम खान और नवाज़िश आलम खान के अगले राजनीतिक कदम पर टिकी हैं।

विधायक दर्पण की यह रिपोर्ट उपलब्ध जानकारी और राजनीतिक घटनाक्रम के आधार पर तैयार की गई है। जैसे ही दोनों नेताओं की अगली राजनीतिक रणनीति या किसी नए दल में शामिल होने को लेकर आधिकारिक जानकारी सामने आती है, पाठकों तक उसकी तथ्यात्मक जानकारी पहुंचाई जाएगी।


विधायक दर्पण — खास रिपोर्ट

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत, देश की राजधानी दिल्ली से प्रसारित राजनीतिक समाचार मंच "विधायक दर्पण" के लिए उत्तर प्रदेश से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की विशेष रिपोर्ट।

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मस्जिद तोड़े जाने के विरोध में AIMIM नेता हाऊस अरेस्ट बिडोली में प्रदर्शन की आशंका पर पुलिस ने रोका, इनाम ने इसे लोकतंत्र का हनन बताया।

बिड़ौली/झिंझाना। कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को ध्वस्त किए जाने के विरोध में प्रदर्शन की आशंका के चलते पुलिस ने एआईएमआईएम के पश्चिम प्रदेश संयुक्त सचिव हाफिज मोहम्मद इनाम को हाउस अरेस्ट कर लिया। पुलिस की कार्रवाई के बाद उनके आवास के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी गई।

बताया गया कि कलेक्ट्रेट मस्जिद को लेकर क्षेत्र में राजनीतिक और सामाजिक संगठनों में नाराजगी है। एआईएमआईएम नेता हाफिज इनाम ने मस्जिद ध्वस्तीकरण को लेकर पार्टी का एक डेलिगेशन मस्जिद की कमेटी से मिलना था ओर हम सहारनपुर जाने की तैयारी कर रहे थे । इसी को देखते हुए पुलिस ने उन्हें घर से बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी।

हाउस अरेस्ट की सूचना मिलते ही समर्थकों में भी चर्चा तेज हो गई। हाफिज इनाम ने इसे सरकार की तानाशाही करार दिया है ओर लोकतंत्र का हनन बताया है उन्होंने कहा लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखना उनका अधिकार है। वहीं, पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियाती कदम उठाया गया है।

शिक्षक का सम्मान, राष्ट्र का सम्मान — मोहित बेनीवाल

जनपद शामली के विकास भवन सभागार में शिक्षक दिवस के अवसर पर बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित “शिक्षक सम्मान समारोह” का आयोजन हर्षोल्लास के साथ किया गया। कार्यक्रम में विधान परिषद सदस्य एवं मुख्य अतिथि माननीय श्री मोहित बेनीवाल जी ने सहभागिता की।

इस अवसर पर माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी के गोरखपुर से आयोजित शिक्षक दिवस कार्यक्रम का लाइव प्रसारण देखा गया। इसके उपरांत जनपद शामली के उत्कृष्ट, समर्पित एवं प्रतिभाशाली शिक्षकों को उनके शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।

मुख्य अतिथि माननीय श्री मोहित बेनीवाल जी ने सभी सम्मानित शिक्षकों को बधाई देते हुए कहा कि “शिक्षक समाज और राष्ट्र के निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। एक शिक्षक केवल विद्यार्थियों को शिक्षा ही नहीं देता, बल्कि उनके चरित्र, संस्कार और भविष्य का निर्माण भी करता है। शिक्षक का सम्मान वास्तव में राष्ट्र के भविष्य और राष्ट्र निर्माण का सम्मान है।”

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन एवं मुख्यमंत्री माननीय श्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ एवं आधुनिक बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। शिक्षकों के सम्मान और उनके योगदान को उचित पहचान देना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

कार्यक्रम में उपस्थित सभी शिक्षकों एवं शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने शिक्षक दिवस के अवसर पर शिक्षा के क्षेत्र को और अधिक सशक्त बनाने का संकल्प लिया।

अंत में मुख्य अतिथि मोहित बेनीवाल जी ने सभी सम्मानित शिक्षकों को हार्दिक बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ दीं।

सरधना में अब 20 सितंबर के आसपास होगा निःशुल्क साइकिल वितरण कार्यक्रम, मेधावी छात्राओं को मिलेगी सौगात

6 सितंबर को प्रस्तावित कार्यक्रम में हुआ बदलाव, मिर्जा जुनैद हयात ने दी जानकारी—नई तारीख से जुड़ी आधिकारिक जानकारी जल्द साझा की जाएगी

मेरठ, उत्तर प्रदेश।
कस्बा सरधना, जिला मेरठ में मिर्जा समाज की छात्राओं के लिए प्रस्तावित निःशुल्क साइकिल वितरण कार्यक्रम की तारीख में बदलाव किया गया है। पहले यह कार्यक्रम 6 सितंबर 2026 को आयोजित किया जाना प्रस्तावित था, लेकिन अब इसमें फेरबदल करते हुए कार्यक्रम लगभग 20 सितंबर 2026 के आसपास आयोजित किए जाने की संभावना जताई गई है।

इस संबंध में खिदमतगार जुनैद हयात मिर्जा ने जानकारी देते हुए बताया कि कार्यक्रम की तारीख में किन्हीं कारणों से बदलाव किया गया है। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम से संबंधित जो भी नई और पुख्ता जानकारी सामने आएगी, उसे सभी संबंधित लोगों के साथ साझा किया जाएगा।

विधायक अतुल प्रधान के सौजन्य से प्रस्तावित है कार्यक्रम

मिर्जा जुनैद हयात के अनुसार, माननीय विधायक अतुल प्रधान जी के सौजन्य से तथा आगा मोहम्मद अली शाह की सरपरस्ती में कस्बा सरधना में यह निःशुल्क साइकिल वितरण कार्यक्रम प्रस्तावित है।

कार्यक्रम का उद्देश्य पढ़ाई में अच्छा प्रदर्शन करने वाली मिर्जा समाज की बच्चियों को प्रोत्साहित करना और उन्हें शिक्षा के लिए आवश्यक सुविधा उपलब्ध कराने में सहयोग करना बताया गया है। प्रस्तावित कार्यक्रम के तहत पात्र छात्राओं को निःशुल्क साइकिल वितरित किए जाने की योजना है।

शिक्षा को प्रोत्साहन देने की पहल

आज के समय में ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में विद्यार्थियों के लिए स्कूल या शिक्षण संस्थान तक आने-जाने की सुविधा भी उनकी पढ़ाई का महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाती है। ऐसे में साइकिल जैसी उपयोगी सुविधा विद्यार्थियों के लिए आवागमन को आसान बनाने के साथ-साथ उनकी शिक्षा जारी रखने में भी सहायक हो सकती है।

मिर्जा जुनैद हयात ने बताया कि मिर्जा समाज की बच्चियों ने शिक्षा के क्षेत्र में अच्छा योगदान और प्रदर्शन किया है। इसी को ध्यान में रखते हुए उन्हें प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से निःशुल्क साइकिल उपलब्ध कराने का कार्यक्रम रखा गया है।

कार्यक्रम की नई तारीख को लेकर क्या कहा गया?

जुनैद हयात मिर्जा के मुताबिक, फिलहाल 20 सितंबर 2026 के आसपास कार्यक्रम आयोजित होने की संभावना है। कार्यक्रम की अंतिम तारीख, समय और स्थान से संबंधित जानकारी में यदि कोई बदलाव होता है तो उसकी सूचना भी लोगों के साथ साझा की जाएगी।

इसलिए कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोगों से अनुरोध है कि वे अंतिम कार्यक्रम संबंधी सूचना की पुष्टि के बाद ही अपनी उपस्थिति की योजना बनाएं।

समाज की सेवा में सक्रिय रहने की बात

जुनैद हयात मिर्जा समाज और बिरादरी के लोगों के बीच विभिन्न सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय रहने के लिए जाने जाते हैं। उनके द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इस कार्यक्रम के माध्यम से शिक्षा के क्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन करने वाली छात्राओं को सम्मान और सहयोग देने का प्रयास किया जा रहा है।

ऐसे कार्यक्रमों का महत्व केवल किसी वस्तु के वितरण तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे विद्यार्थियों में आगे बढ़ने और बेहतर शिक्षा हासिल करने के लिए प्रोत्साहन की भावना भी पैदा हो सकती है।

कार्यक्रम की अंतिम तारीख और अन्य विवरण सामने आने के बाद उसे सार्वजनिक रूप से साझा किए जाने की बात कही गई है।


विधायक दर्पण की खास रिपोर्ट

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत, देश की राजधानी दिल्ली से प्रसारित "विधायक दर्पण" संपूर्ण राजनीतिक राष्ट्रीय समाचार पत्रिका, न्यूज पोर्टल एवं यूट्यूब चैनल है।

उत्तर प्रदेश से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की खास रिपोर्ट।

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नोट: कार्यक्रम की तारीख और अन्य विवरण आयोजकों/संबंधित पक्ष द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी पर आधारित हैं। अंतिम कार्यक्रम संबंधी जानकारी में परिवर्तन संभव है।