हजारों समर्थकों के साथ दिल्ली पहुंचे पिता-पुत्र, कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर राजनीतिक पारी को दिया नया मोड़
नई दिल्ली/मुजफ्फरनगर/शामली।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में बुधवार, 23 सितंबर 2026 को एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला। पूर्व सांसद अमीर आलम खान और उनके पुत्र एवं पूर्व विधायक नवाज़िश आलम खान ने अपने समर्थकों के साथ कांग्रेस पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली।
दोनों नेताओं के कांग्रेस में शामिल होने की खबर पिछले कई दिनों से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई थी। आज आखिरकार उस चर्चा पर विराम लगा और पिता-पुत्र ने कांग्रेस का दामन थामकर अपनी राजनीतिक यात्रा को एक नया मोड़ दिया। इससे पहले दोनों नेताओं ने आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) से इस्तीफा दिया था और 23 सितंबर को कांग्रेस में शामिल होने की बात सार्वजनिक रूप से सामने आई थी।हजारों समर्थकों के साथ दिल्ली का रुख
कांग्रेस में शामिल होने के कार्यक्रम को लेकर अमीर आलम और नवाज़िश आलम के समर्थकों में काफी उत्साह देखने को मिला। मुजफ्फरनगर, शामली और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में समर्थकों के दिल्ली पहुंचने की खबर सामने आई। समर्थकों की मौजूदगी ने इस राजनीतिक घटनाक्रम को और चर्चा में ला दिया। सोशल मीडिया से लेकर स्थानीय राजनीतिक हलकों तक दिनभर दोनों नेताओं के कांग्रेस में शामिल होने को लेकर चर्चाएं होती रहीं। हालांकि किसी राजनीतिक दल में शामिल होने के बाद आगामी चुनावों में किसी नेता की भूमिका क्या होगी या उन्हें किस जिम्मेदारी अथवा टिकट की संभावना होगी, इस बारे में फिलहाल किसी अंतिम निर्णय को आधिकारिक घोषणा के बिना निष्कर्ष के रूप में देखना उचित नहीं होगा।अमीर आलम खान का लंबा राजनीतिक अनुभव
अमीर आलम खान पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं। वे कैराना लोकसभा क्षेत्र से सांसद रह चुके हैं और उत्तर प्रदेश की राजनीति में विधायक, राज्यसभा सदस्य तथा मंत्री के रूप में भी जिम्मेदारियां निभा चुके हैं।उनका राजनीतिक सफर कई दशकों में अलग-अलग राजनीतिक पड़ावों से होकर गुजरा है। यही वजह है कि उनके किसी भी राजनीतिक निर्णय को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के राजनीतिक परिदृश्य में महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तौर पर देखा जाता है।
नवाज़िश आलम की भी रही है सक्रिय राजनीतिक भूमिका
अमीर आलम खान के पुत्र नवाज़िश आलम खान भी सक्रिय राजनीति में अपनी पहचान बना चुके हैं। वर्ष 2012 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में उन्होंने समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी के रूप में बुढ़ाना विधानसभा सीट से चुनाव जीता था। चुनावी रिकॉर्ड में उन्हें उस चुनाव का विजेता दर्ज किया गया है।इसके बाद वर्ष 2017 में उन्होंने मीरापुर विधानसभा सीट से चुनाव भी लड़ा। अलग-अलग राजनीतिक दलों से जुड़ने के बाद अब कांग्रेस उनके राजनीतिक सफर का नया पड़ाव बनी है।
आजाद समाज पार्टी से कांग्रेस तक का सफर
अमीर आलम और नवाज़िश आलम वर्ष 2025 में आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) से जुड़े थे। करीब डेढ़ वर्ष बाद दोनों ने पार्टी से अलग होने का फैसला किया। सितंबर 2026 में उनके इस्तीफे के बाद ही कांग्रेस में शामिल होने की चर्चाएं तेज हो गई थीं।
पार्टी छोड़ने के कारणों को लेकर अलग-अलग मीडिया रिपोर्टों में विभिन्न दावे सामने आए हैं। इसलिए इन दावों को अंतिम तथ्य के रूप में प्रस्तुत करने के बजाय संबंधित पक्षों के बयानों के रूप में ही देखा जाना उचित है।
पश्चिमी यूपी की राजनीति में बढ़ी हलचल
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज होती दिखाई दे रही हैं। ऐसे समय में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के एक अनुभवी राजनीतिक परिवार का कांग्रेस से जुड़ना स्थानीय राजनीतिक चर्चाओं का महत्वपूर्ण विषय बन गया है।
अमीर आलम और नवाज़िश आलम के कांग्रेस में शामिल होने के बाद अब उनके समर्थकों और स्थानीय राजनीतिक कार्यकर्ताओं की आगे की भूमिका पर भी नजर रहेगी। वहीं, आगामी समय में कांग्रेस संगठन में दोनों नेताओं की क्या जिम्मेदारी तय होती है, यह पार्टी के अगले निर्णयों पर निर्भर करेगा।
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि अमीर आलम खान और नवाज़िश आलम खान ने कांग्रेस के साथ अपनी नई राजनीतिक पारी की शुरुआत कर दी है।
विधायक दर्पण — खास रिपोर्ट
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत, देश की राजधानी दिल्ली से प्रसारित राजनीतिक राष्ट्रीय समाचार पत्रिका/न्यूज पोर्टल/यूट्यूब चैनल "विधायक दर्पण" के लिए शामली, उत्तर प्रदेश से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की खास रिपोर्ट।
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