उत्तराखंड की राजनीति में पिरान कलियर विधानसभा हमेशा से सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील सीट मानी जाती रही है। दरगाह साबिर पाक की पहचान रखने वाला यह इलाका केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि विकास, बेरोजगारी, सड़क, जलभराव और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों से भी लगातार जूझता रहा है।
ऐसे में तीन बार विधायक बनने वाले हाजी फुरकान अहमद का तीसरा कार्यकाल जनता के बीच चर्चा और बहस दोनों का विषय बना हुआ है। समर्थक उन्हें “विकास पुरुष” बताते हैं, जबकि विरोधियों का आरोप है कि ज़मीनी गति अभी भी उम्मीद से कम है।
तीन बार की जीत क्या कहती है?
हाजी फुरकान अहमद ने पहली बार वर्ष 2012 में पिरान कलियर विधानसभा सीट से जीत हासिल की थी। उसके बाद 2022 में कांग्रेस के टिकट पर दोबारा विधायक बने और अब अपना तीसरा कार्यकाल पूरा कर रहे हैं।
लगातार चुनाव जीतना यह संकेत देता है कि क्षेत्र में उनका एक स्थायी जनाधार मौजूद है। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि उनकी शैली आक्रामक राजनीति से अलग रही है। वे स्वयं कई मंचों पर कह चुके हैं कि वे “तोड़-फोड़ की राजनीति नहीं, बल्कि समन्वय और संवाद की राजनीति” में विश्वास रखते हैं।
इसी बीच पार्टी संगठन ने उन्हें हरिद्वार जिला कांग्रेस अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी सौंपी, जिससे कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा दिखाई दी। स्थानीय स्तर पर कांग्रेस संगठन को सक्रिय करने का श्रेय भी उनके समर्थक उन्हें देते हैं।
विकास कार्यों का दावा: क्या बदला पिरान कलियर?
पुल निर्माण की बड़ी घोषणा
क्षेत्र में सबसे चर्चित परियोजनाओं में दो पुलों की मंजूरी शामिल रही।
पहला पुल रामपुर चुंगी-मंडी से नागल होते हुए कलियर बाईपास मार्ग पर प्रस्तावित है, जबकि दूसरा हलवाहेड़ी से NH-58 तक रतमऊ नदी पर बनने वाला 150 मीटर लंबा पुल है।
दोनों परियोजनाओं के लिए राज्य योजना में लगभग ₹28.30 लाख-₹28.30 लाख की स्वीकृति और पहली किस्त के रूप में ₹20.20 लाख जारी होने की जानकारी सामने आई।
यदि ये पुल समय पर बनते हैं तो ग्रामीणों को आवागमन में बड़ी राहत मिल सकती है, खासकर बरसात के मौसम में जब कई संपर्क मार्ग बाधित हो जाते हैं।
स्वास्थ्य सुविधाओं पर फोकस
दरगाह साबिर पाक के आसपास स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी लंबे समय से स्थानीय मुद्दा रही है।
इसी क्रम में सीलिंग भूमि पर करीब ₹1.76 करोड़ की लागत से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) का शिलान्यास और उद्घाटन क्षेत्र की बड़ी उपलब्धि के रूप में प्रचारित किया गया।
विधायक फुरकान अहमद ने इस परियोजना को अपने विरोधियों के लिए “करारा जवाब” बताया था।
हालांकि स्थानीय लोग अब यह देखना चाहते हैं कि यह स्वास्थ्य केंद्र पूरी क्षमता के साथ कब तक आम जनता के लिए कार्य करना शुरू करेगा।
सड़कें, इंटरलॉकिंग और मोहल्ला विकास
विधायक द्वारा विभिन्न इलाकों में छोटी लेकिन उपयोगी परियोजनाओं का भी लगातार उल्लेख किया गया है।
- गुम्मावाला क्षेत्र में लगभग ₹9.40 लाख की सड़क परियोजना
- जमाईखेड़ा में इंटरलॉकिंग सड़क निर्माण
- शांताशाह में लगभग ₹35 लाख की सड़क विकास योजना
इन कार्यों को समर्थक “धीरे-धीरे लेकिन लगातार विकास” बताते हैं।
हालांकि कई ग्रामीणों का कहना है कि मुख्य संपर्क मार्गों की हालत अभी भी बेहद खराब है।
नगर पंचायत का बजट और स्थानीय फैसले
वर्ष 2024-25 में पिरान कलियर नगर पंचायत बोर्ड द्वारा लगभग ₹27 करोड़ का बजट पारित किया गया।
इस बजट में सफाई व्यवस्था, स्ट्रीट लाइट, पेयजल, नहर किनारे सुरक्षा जाल और अन्य बुनियादी सुविधाओं पर चर्चा हुई।
इसी दौरान “शैतान चौक” का नाम बदलकर “साबरी चौक” किए जाने का निर्णय भी चर्चा में रहा।
समर्थकों ने इसे क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा कदम बताया।
दरगाह और धरोहर संरक्षण का मुद्दा
पिरान कलियर की पहचान दरगाह साबिर पाक से जुड़ी हुई है।
क्षेत्र की कई धार्मिक और ऐतिहासिक इमारतों की जर्जर स्थिति को लेकर विधायक ने जिलाधिकारी हरिद्वार को ज्ञापन सौंपा।
स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि दरगाह क्षेत्र का संरक्षण बेहतर तरीके से किया जाए तो धार्मिक पर्यटन को भी बड़ा लाभ मिल सकता है।
सोशल मीडिया पर जनता का मूड: समर्थन भी, शिकायत भी
आज के दौर में जनता की राय सोशल मीडिया पर साफ दिखाई देती है और हाजी फुरकान अहमद के मामले में भी यही स्थिति है।
फरवरी 2026 में विधायक द्वारा CDO हरिद्वार के साथ सड़क, पानी और शिक्षा जैसे मुद्दों पर बैठक की तस्वीरें साझा की गईं।
इन पोस्टों पर लोगों की प्रतिक्रियाएं मिली-जुली रहीं।
कुछ समर्थकों ने लिखा —
“फुरकान विधायक जिंदाबाद”
“विकास पुरुष हाजी विधायक फुरकान अहमद जी जिंदाबाद”
वहीं कई लोगों ने सीधे अपनी समस्याएं भी रखीं।
किसी ने बहादरपुर सैनी से पथरी पुल तक खराब सड़क की शिकायत की, तो किसी ने कलियर में क्रिकेट ग्राउंड की मांग उठाई।
कुछ लोगों ने बाईपास निर्माण और सीलिंग भूमि के हस्तांतरण जैसे मुद्दे भी उठाए।
इससे साफ है कि विधायक का समर्थक वर्ग सक्रिय है, लेकिन जनता अब केवल नारों से संतुष्ट नहीं, बल्कि ठोस परिणाम चाहती है।
विवाद और आलोचनाएं भी पीछा नहीं छोड़ रहीं
आपराधिक मामलों को लेकर विरोधाभास
राजनीतिक हलफनामों में दर्ज सूचनाओं को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं।
एक एफिडेविट में IPC की धारा 188, 269 और 270 के तहत चार मामलों का उल्लेख सामने आया, जबकि 2022 के चुनावी हलफनामे में “शून्य आपराधिक मामले” दर्ज बताए गए।
हालांकि ये धाराएं आमतौर पर लॉकडाउन उल्लंघन जैसे मामलों से जुड़ी मानी जाती हैं और गंभीर अपराध की श्रेणी में नहीं आतीं, लेकिन विपक्ष इन्हें राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश करता रहा है।
कानून-व्यवस्था पर उठते सवाल
क्षेत्र में अवैध मांस कटाई और गौ-तस्करी की शिकायतें भी समय-समय पर सामने आती रही हैं।
स्थानीय लोगों द्वारा मुख्यमंत्री तक शिकायतें पहुंचाने की खबरें भी चर्चा में रहीं।
हालांकि इन मामलों में विधायक पर प्रत्यक्ष आरोप नहीं लगाए गए, लेकिन विपक्ष “विकास के साथ सुरक्षा” का मुद्दा उठाकर सरकार और स्थानीय नेतृत्व दोनों को घेरने की कोशिश करता है।
आखिर जनता का फैसला क्या हो सकता है?
हाजी फुरकान अहमद का तीसरा कार्यकाल पूरी तरह विफल भी नहीं कहा जा सकता और पूरी तरह ऐतिहासिक भी नहीं।
उनके कार्यकाल में कुछ ठोस योजनाएं जमीन पर आती दिखाई दी हैं —
स्वास्थ्य केंद्र, पुलों की मंजूरी, मोहल्ला सड़कें, नगर पंचायत बजट और प्रशासनिक बैठकों की सार्वजनिक जानकारी जैसे कदम सकारात्मक माने जा सकते हैं।
लेकिन दूसरी ओर क्षेत्र में आज भी सड़क, जलनिकासी, खेल सुविधाएं, शिक्षा और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दे अधूरे दिखाई देते हैं।
जनता की सबसे बड़ी शिकायत विकास कार्यों की धीमी रफ्तार को लेकर है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2027 विधानसभा चुनाव से पहले यदि पुल निर्माण, PHC संचालन, पेयजल व्यवस्था और मुख्य सड़कें वास्तविक रूप से बेहतर होती हैं, तो हाजी फुरकान अहमद अपनी राजनीतिक पकड़ और मजबूत कर सकते हैं।
लेकिन यदि योजनाएं केवल घोषणाओं तक सीमित रहीं, तो विरोधियों को बड़ा मुद्दा मिल सकता है।
निष्कर्ष
पिरान कलियर की राजनीति फिलहाल “काम जारी है” और “जनता इंतजार में है” वाले दौर से गुजर रही है।
हाजी फुरकान अहमद की छवि एक ऐसे नेता की बनती है जो टकराव से ज्यादा समन्वय की राजनीति करते हैं, लेकिन आज की राजनीति में केवल संतुलन नहीं, तेज़ और दिखने वाला विकास भी जरूरी माना जाता है।
अब देखना यह होगा कि तीसरे कार्यकाल के अंतिम चरण में वे अधूरे वादों को पूरा कर पाते हैं या नहीं।
क्योंकि आने वाले चुनाव में जनता केवल भाषण नहीं, बल्कि सड़क, पानी, स्वास्थ्य और रोजगार का हिसाब मांगने वाली है।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत देश की राजधानी दिल्ली से प्रसारित राष्ट्रीय राजनीतिक समाचार पत्रिका / न्यूज़ पोर्टल / यूट्यूब चैनल “विधायक दर्पण” के लिए पिरान कलियर, रुड़की, हरिद्वार (उत्तराखंड) से पत्रकार तसलीम अहमद की विशेष रिपोर्ट।
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