मुजफ्फरनगर/शामली। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। पूर्व सांसद अमीर आलम खान और उनके पुत्र, पूर्व विधायक नवाज़िश आलम खान, ने आज़ाद समाज पार्टी से अलग होने के बाद अब कांग्रेस में शामिल होने का ऐलान किया है। दोनों नेताओं के 23 सितंबर 2026 को नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में पार्टी की सदस्यता ग्रहण करने की बात सामने आई है।
शुक्रवार, 18 सितंबर को नवाज़िश आलम ने सोशल मीडिया के माध्यम से आज़ाद समाज पार्टी से अलग होने की जानकारी सार्वजनिक की थी। इसके बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश के राजनीतिक हलकों में उनके अगले कदम को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। अलग-अलग राजनीतिक दलों को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे थे, लेकिन अब कांग्रेस में जाने की घोषणा के साथ तस्वीर काफी हद तक स्पष्ट हो गई है।
आसपा से अलग होने के बाद कांग्रेस का रुख
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार अमीर आलम और नवाज़िश आलम ने आज़ाद समाज पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दिया है। अमीर आलम ने पार्टी नेतृत्व के साथ किए गए वादों के पूरा न होने और संवाद की कमी की बात कही है, जबकि नवाज़िश आलम की ओर से भी पार्टी में अपेक्षित सम्मान नहीं मिलने की बात सामने आई है। हालांकि, आसपा से जुड़े नेताओं की ओर से अलग-अलग कारण बताए गए हैं और सीटों की दावेदारी को लेकर भी मतभेद की चर्चा सामने आई है।
अब दोनों नेताओं ने कांग्रेस के साथ अपनी अगली राजनीतिक पारी शुरू करने की तैयारी कर ली है। 23 सितंबर को दिल्ली में होने वाला कार्यक्रम इस पूरे घटनाक्रम का अगला महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।
अमीर आलम का लंबा राजनीतिक सफर
अमीर आलम खान पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं। उन्होंने 1985 में थानाभवन विधानसभा सीट से अपनी चुनावी राजनीति की शुरुआत की। इसके बाद मोरना और फिर थानाभवन से विधानसभा पहुंचे। बाद में वह कैराना लोकसभा सीट से सांसद और राज्यसभा सदस्य भी रहे।
उनके राजनीतिक सफर में अलग-अलग समय पर कई दलों के साथ जुड़ाव रहा है। वर्ष 2018 में वह अपने पुत्र नवाज़िश आलम के साथ राष्ट्रीय लोकदल में गए थे। इसके बाद वर्ष 2025 में पिता-पुत्र ने आज़ाद समाज पार्टी का दामन थामा था। अब करीब डेढ़ साल बाद आसपा से अलग होकर कांग्रेस में जाने की घोषणा की गई है।
नवाज़िश आलम भी रह चुके हैं विधायक
अमीर आलम के पुत्र नवाज़िश आलम ने भी सक्रिय राजनीति में अपनी पहचान बनाई। वर्ष 2012 में वह समाजवादी पार्टी के टिकट पर बुढ़ाना विधानसभा सीट से विधायक चुने गए थे। इसके बाद उन्होंने अलग-अलग राजनीतिक दलों के साथ अपनी राजनीतिक यात्रा जारी रखी। अब वह एक बार फिर अपने पिता के साथ नई राजनीतिक पारी की ओर बढ़ रहे हैं।
पश्चिमी यूपी की राजनीति पर नजर
अमीर आलम और नवाज़िश आलम के कांग्रेस में शामिल होने के फैसले को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के राजनीतिक घटनाक्रम के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि इस कदम का आगामी चुनावी राजनीति पर वास्तविक प्रभाव क्या होगा, यह आने वाले समय में ही स्पष्ट होगा।फिलहाल इतना साफ है कि आज़ाद समाज पार्टी छोड़ने के बाद पिता-पुत्र ने अपने अगले राजनीतिक पड़ाव के रूप में कांग्रेस को चुना है और 23 सितंबर को दिल्ली में प्रस्तावित सदस्यता ग्रहण कार्यक्रम पर अब राजनीतिक हलकों की निगाहें टिकी हुई हैं।
विधायक दर्पण — विशेष रिपोर्ट
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत
देश की राजधानी दिल्ली से प्रकाशित राष्ट्रीय राजनीतिक समाचार पत्रिका
रिपोर्ट: ज़मीर आलम, पत्रकार
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