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अमीर आलम खान और नवाज़िश आलम खान ने आज़ाद समाज पार्टी को कहा अलविदा!

2027 से पहले पश्चिमी यूपी की सियासत में फिर हलचल, अब किस राजनीतिक राह पर बढ़ेगा पिता-पुत्र का कदम?

शामली/मुजफ्फरनगर।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। पूर्व सांसद अमीर आलम खान और उनके पुत्र, पूर्व विधायक नवाज़िश आलम खान के आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) से अलग होने की खबर सामने आने के बाद मुजफ्फरनगर, शामली और आसपास के राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।

नवाज़िश आलम खान की ओर से सोशल मीडिया के माध्यम से अपने और अपने पिता अमीर आलम खान के आज़ाद समाज पार्टी से इस्तीफे की जानकारी साझा किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, इस्तीफे के पीछे की वजह और आगे की राजनीतिक रणनीति को लेकर अभी कोई विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में इस घटनाक्रम को लेकर कई तरह की चर्चाएं जरूर शुरू हो गई हैं, लेकिन अंतिम तस्वीर आने में अभी समय लग सकता है।

पश्चिमी यूपी की राजनीति में लंबा अनुभव

अमीर आलम खान पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति का जाना-पहचाना नाम हैं। वह कैराना से लोकसभा सांसद रह चुके हैं और उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सदस्य के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। इसके अलावा वह उत्तर प्रदेश विधानसभा में थानाभवन और मोरना क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।

वहीं उनके पुत्र नवाज़िश आलम खान वर्ष 2012 से 2017 तक बुढ़ाना विधानसभा क्षेत्र से विधायक रहे। 2012 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी के रूप में बुढ़ाना सीट पर जीत दर्ज की थी।

यही राजनीतिक पृष्ठभूमि इस ताजा घटनाक्रम को पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिहाज से चर्चा का विषय बना रही है।

रालोद से आज़ाद समाज पार्टी तक का सफर

अमीर आलम खान और नवाज़िश आलम खान ने राष्ट्रीय लोकदल से अलग होने के बाद आज़ाद समाज पार्टी का रुख किया था। वर्ष 2025 की एक रिपोर्ट में दोनों को रालोद छोड़कर आज़ाद समाज पार्टी से जुड़ने वाले प्रमुख मुस्लिम नेताओं में शामिल बताया गया था।

इसके बाद नवाज़िश आलम खान पार्टी की पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गतिविधियों में सक्रिय नजर आए। जुलाई 2026 में मुजफ्फरनगर में आज़ाद समाज पार्टी के एक प्रदर्शन का नेतृत्व भी पूर्व विधायक नवाज़िश आलम खान के साथ पार्टी के स्थानीय पदाधिकारियों द्वारा किया गया था।

इससे साफ है कि पार्टी से अलग होने की मौजूदा खबर से पहले तक नवाज़िश आलम पार्टी की गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे।

2027 की तैयारी और चुनावी चर्चाएं

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को देखते हुए पश्चिमी उत्तर प्रदेश में राजनीतिक गतिविधियां पहले से ही तेज हैं। ऐसे समय में अमीर आलम खान और नवाज़िश आलम खान का आज़ाद समाज पार्टी से अलग होना स्वाभाविक रूप से राजनीतिक चर्चाओं को जन्म दे रहा है।

मिली जानकारी के मुताबिक अमीर आलम खान ने मुजफ्फरनगर सदर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने की तैयारी और घोषणा की थी, जबकि नवाज़िश आलम खान के बुढ़ाना क्षेत्र में सक्रिय होने की चर्चा थी। 

अब सबसे बड़ा सवाल—अगला कदम क्या?

अमीर आलम खान और नवाज़िश आलम खान के आज़ाद समाज पार्टी से अलग होने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि उनकी अगली राजनीतिक दिशा क्या होगी?

क्या पिता-पुत्र किसी पुराने राजनीतिक दल में वापसी करेंगे?
क्या किसी नए राजनीतिक गठजोड़ का हिस्सा बनेंगे?
क्या 2027 के विधानसभा चुनाव में दोनों अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों से मैदान में उतरेंगे?
या फिर चुनावी राजनीति को लेकर कोई नया फैसला सामने आएगा?

इन सभी सवालों के जवाब आने वाले दिनों में राजनीतिक घटनाक्रम के साथ स्पष्ट हो सकते हैं।

फिलहाल इतना जरूर है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में अमीर आलम खान का लंबा राजनीतिक अनुभव और नवाज़िश आलम खान की क्षेत्रीय सक्रियता इस घटनाक्रम को महत्वपूर्ण बनाती है। लेकिन अगली राजनीतिक पारी किस दिशा में जाएगी, इसका फैसला स्वयं अमीर आलम खान और नवाज़िश आलम खान के आगामी बयानों और राजनीतिक निर्णयों से ही स्पष्ट होगा।

क्या फिर बदलेगा पश्चिमी यूपी का राजनीतिक समीकरण?

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में चुनाव से पहले नेताओं का दल बदलना कोई नई बात नहीं है। लेकिन जब किसी अनुभवी पूर्व सांसद और पूर्व विधायक की राजनीतिक दिशा बदलती है, तो उसका असर स्थानीय राजनीतिक समीकरणों पर चर्चा का विषय जरूर बनता है।

अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि अमीर आलम खान और नवाज़िश आलम खान किस दल में जाएंगे या 2027 में किस सीट से चुनाव लड़ेंगे। राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं जरूर तेज हैं, लेकिन आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना ही उचित होगा।

अब सबकी निगाहें अमीर आलम खान और नवाज़िश आलम खान के अगले राजनीतिक कदम पर टिकी हैं।

विधायक दर्पण की यह रिपोर्ट उपलब्ध जानकारी और राजनीतिक घटनाक्रम के आधार पर तैयार की गई है। जैसे ही दोनों नेताओं की अगली राजनीतिक रणनीति या किसी नए दल में शामिल होने को लेकर आधिकारिक जानकारी सामने आती है, पाठकों तक उसकी तथ्यात्मक जानकारी पहुंचाई जाएगी।


विधायक दर्पण — खास रिपोर्ट

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत, देश की राजधानी दिल्ली से प्रसारित राजनीतिक समाचार मंच "विधायक दर्पण" के लिए उत्तर प्रदेश से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की विशेष रिपोर्ट।

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