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आपका वोट बना कि नही कैसे जानें


भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार सभी विधानसभा के POLLING बूथों पर जहाँ आप अपना वोट डालते हैं  वहाँ पर आज से 27 -11- 2021 तक अर्थात दिनाकं

 07-11-2021 रविवार

13-11-2021 शनिवार

21-11-2021 रविवार

27-11-2021 शनिवार

समय सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक  फोटो मतदाता सूची प्रदर्शित की जायेगी, जिसे देखकर आप यह सुनिश्चित कर सकते हैं, कि आपका नाम मतदाता सूची में है, या नहीं, यदि है तो उसमें कोई गलती तो नहीं है, यदि कोई गलती है, तो आप सुधारने के लिए फार्म भर सकते हैं।इसके अलावा नए वोटर कार्ड के लिए नए फॉर्म भरें जायेंगें ।


नया वोटर कार्ड बनवाने के लिए ये कागजात साथ लेकर जाएं ।(1) दो रंगीन पासपोर्ट साइज फ़ोटो  (2) राशन कार्ड की फ़ोटो कॉपी या(3) आधार कार्ड की फ़ोटो कॉपी या (4) जन्मतिथि प्रमाण-पत्र की फ़ोटो कॉपी (उम्र 18 वर्ष की चाहिए) (5) घर के किसी एक सदस्य के वोटर कार्ड की फ़ोटो कॉपी,आपसे ये गुज़ारिश है कि यह सूचना अपने सभी जानने वाले के नम्बरों पर व ग्रुप पर भेजें। पोलिंग बूथ पर बी.एल.ओ बैठेंगे, वोटर लिस्ट में अपना नाम जरूर चेक कर लीजिए ,  यदि आपका वोटर लिस्ट मे नाम नहीं है, तो 6 नम्बर फार्म भर कर अपना नाम जरूर शामिल करवा लीजिए।

@Vidhayak Darpan

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उपचुनाव में मिली करारी हार से ज़मीन पर आई मोदी सरकार, घटाए पेट्रोल डीजल के दाम ---उपेंद्र चौधरी,महंगाई से त्रस्त जनता की आवाज को नहीं सुन पा रही थी मोदी सरकार, अडानी-अंबानी का खजाना भरने में लगी मोदी सरकार को वोट की चोट ने दिया झटका


जनविरोधी तीनों काले कानून वापसी की लिया भी देनी होगी भाजपा को वोट की चोट तभी काले कानूनों की वापसी संभव,भारतीय किसान मजदूर सेना के  प्रमुख वह कुंडू खास उत्तर प्रदेश के बाबा उपेंद्र चौधरी ने कहा कि जैसे ही  ये खबर न्यूज़ चैनलों पर फ़्लैश हुई कि केंद्र सरकार ने पेट्रोल डीजल पर एक्साइज ड्यूटी घटाई जिसके बाद पेट्रोल के दाम 5 रुपये और डीजल के दाम में 10 रुपये लीटर की कमी होगी तो एकबारगी यक़ीन नही हुआ मगर फ़ौरन ही याद आ गया कि हालिया उपचुनाव में मिली करारी हार ने अपना रंग दिखा दिया है और नतीजा बहुत जल्द

सामने आ गया है, खास तौर पर हिमाचल में एक लोकसभा सीट और 3 विधानसभा सीटों पर भाजपा की बड़ी हार से भाजपा सकते में आ गई दिख रही है, ऊपर से हिमाचल के मुख्यमंत्री ने मीडिया में बयान दिया कि ये हार बढ़ती महंगाई का नतीजा है, ज़ाहिर बात है महंगाई ने हिमाचल में ही नही देश भर में अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है और ये असर हालिया उपचुनाव ही नही कुछ राज्यों में आने वाले चुनाव में भी अपना असर दिखलायेगा इसकी पूरी संभावना नज़र आ रही है, ट्विटर और बाक़ी सोशल मीडिया पर नज़र डालें तो यूजर खुलकर लिख रहे हैं कि अगर उपचुनाव के नतीजे पेट्रोल डीजल की इतनी कीमत घटवा सकते हैं तो अगर कुछ राज्यो में भाजपा को वोट की चोट दी जाए तो बढ़ती महंगाई पर काफ़ी लगाम लग सकती है,

वोट की चोट काफी ताकतवर होती है इसका अंदाज़ा केंद्र की भाजपा सरकार को शायद 2014 के बाद पहली बार हुआ है और अजय समझी जाने वाली मोदी की भाजपा बखूबी समझ रही होगी कि जिस जनता को वो देशहित जैसे मुद्दों पर भटकाकर आसानी से महंगाई की डोज़ लगातार परोस रही थी वो शायद अब नही चल पाएगा, जनता को कुछ वक्त तक तो फिजूल के मुद्दों में भटकाया जा सकता है मगर काठ की हांडी हमेशा नही चढ़ती और लोगो की जब समझ में आ जाता है तो फिर जनता परिवर्तन कर ही देती है और ऐसा भारत के इतिहास में अक्सर देखने मे आया भी है कि महंगाई से परेशान जनता ने जब मन बनाया तो फिर सरकारें ही बदल गई और हालिया उपचुनाव में बस यही सब हुआ है, बहरहाल जो भी हुआ है जनता के लिए तो खुशखबरी का सबब है


और अगर अब भी महंगाई के मुद्दे पर केंद्र की भाजपा सरकार और राज्य सरकारें नही चेती तो जनता खुद इनको सबक सिखा देगी ऐसा महसूस होने लगा है जनता अब महंगाई डायन को बर्दाश्त करने को बिल्कुल भी तैयार नही दिखती। उपचुनाव में मिली हार से जहां भाजपा आत्ममंथन में लग गई है वहीं आमजन को भी मंथन करना होगा कि भाजपा द्वारा किस तरीके से शोषण किया जा रहा है और जनविरोधी तीन काले कानूनों से आकर कितना लंबा और कितना नुकसान होगा इन सभी आत्मांतन के बाद हम सब को जागरूक होकर बीजेपी सरकार को सबक सिखाने के लिए वोट की चोट देनी होगी क्योंकि यह तीन काले कानून केवल किसान विरोधी नहीं जनविरोधी है इसलिए जन-जन को जागृत होकर देनी होगी बीजेपी को वोट की चोट तभी जनहित में कानून को वापसी लेने को मजबूर होगी केंद्र सरकार इसके लिए हम सभी को देनी होगी वोट की चोट।

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महाराष्ट्र की राजनीति, दीपक तले अंधेरा


महाराष्ट्र की अद्भुत और विचित्र राजनीतिक आंकलन करते समय, हमें न्यूटन के सिद्धांत हर क्रिया के बराबर और विपरीत, प्रतिक्रिया होती है जिसे ऐतिहासिक दृष्टि से क्रान्ति और प्रतिक्रान्ति भी कहा जाता है, दिमाग में रखना होगा। मनुस्मृति आधारित वर्ण व्यवस्था 18वीं सदी में अंग्रेजों की वैज्ञानिक सोच और मानवीय व्यवहार के कारण कुछ कमजोर पड़ने लगीं, तभी ज्योतिबा फुले (जन्म 11अप्रिल 1827 ----मृत्यु 28 नवम्बर 1890) एक छूत शूद्र समाज का समृद्ध जमींदार, ब्राह्मणों के विरोध के बावजूद, पढ़ाई कर, ज्ञान हासिल कर सम्मानित पुरुष होने का दर्जा हासिल कर लेता है। नतीजा, एक ब्राह्मण सहपाठी अपनी शादी में ज्योतिबा फुले को आमंत्रित करता है और वे बारात के साथ- साथ चलने लगते हैं। ब्राह्मणों को बड़ा नागवार गुजरा और बिरोध के कारण फुले को अपमानित होकर बीच रास्ते से लौटना पड़ा। लौटते समय अपमान से इतना व्यथित हुए कि, दुःखी होकर एक पेड़ की छांव में बैठकर सोच ही रहे थे कि---

उसी समय, गले में मटकी और पीछे झाड़ू बांधे कुछ अछूत शूद्र उनकी खिल्ली उड़ाते हुए, हंसते हुए उनके सामने से गुजर गये। उनके इस व्यवहार से उन्हें बहुत आश्चर्य हुआ और सोचने लगें कि, मेरा इतना छोटा सा अपमान हुआ और मैं व्यथित हो गया। इनका इतना बड़ा अपमान हो रहा है, फिर भी इनको कोई फ़र्क नहीं पड़ रहा है। उसी दिन से उन्हें यह एहसास हुआ कि, हिन्दू धर्म व्यवस्था ने, इनके पैदा होते ही, इनके मान सम्मान और स्वाभिमान के ज़मीर को  ख़त्म कर दिया है, इसलिए इनके लिए मान- अपमान कोई मायने नहीं रखता है। उसी दिन से उनके दिलो-दिमाग में ब्राह्मणवादी व्यवस्था के खिलाफ नफ़रत पैदा होने लगती है। परिवार के विरोध के बावजूद, अपने मकान के दरवाजे खोलते हुए अछूतों को भी अपने कूआं से पानी लेने की इजाजत देते हैं। फूले जी के इस व्यवहार से हिन्दू धर्म भ्रष्ट हो गया और ब्राह्मण नाराज़ हो गये। प्रतिक्रिया में, फूले जी के अंदर भी ब्राह्मणों के प्रति नफ़रत और बढ़ गई और बगावत पर उतर आए। बता देना उचित समझता हूं कि इतना क्रूर, निर्दई, अमानवीय दन्डात्मक प्रतिबंध, गले में मटकी, और कमर में झाड़ू, पेशवाई ब्राह्मणों के द्वारा सिर्फ महार जाति पर ही लगाया गया था। इसी की प्रतिक्रिया ने फूले जी को झकझोर कर रख दिया था। परिणाम स्वरुप फूले दम्पति ने अछूतों के उद्धार के लिए अपना पूरा जीवन लगा दिया और इसकी गूंज पूरे महाराष्ट्र में सुनाई देने लगी।

इसका परिणाम यह हुआ कि इनके बाद इस सामाजिक परिवर्तन की लड़ाई को कोल्हापुर के राजर्षि शाहू जी महाराज (जन्म-26 जून 1874--मृत्यू-06 1922) ने चालू रखा और ब्राह्मणों के बिरोध के बावजूद, हिन्दू वर्ण व्यवस्था को नकारते हुए, छुआछूत मिटाते हुए, अपने शासन प्रशासन में शूद्रों को 50% रिजर्वेशन दिया। इसका परिणाम यह हुआ कि, शाहूजी के सहयोग व प्रेरणा से सबसे निचले पायदान पर रहने वाले अछूत  महार जाति के बाबा साहेब आंबेडकर (जन्म-14 अप्रैल1891--मृत्यु-6 दिसंबर 1956) ब्राह्मणों के अपमान की क्रिया के विपरित प्रतिक्रिया से विश्व-विख्यात विद्वान बन गये। बाबा साहेब इन दोनों पिछड़ी जाति के महापुरुषों को अपना गुरु मानते हुए, उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि देते हुए, ब्राह्मणों के विरोध के बावजूद SC ST OBC को संविधान में आरक्षण का प्रावधान किया। ब्राह्मण और भंगी को सामाजिक दृष्टि से बराबरी का दर्जा देते हुए, समता, समानता और बन्धुत्व रुपी संविधान दिया। महाराष्ट्र की सामाजिक पृष्ठभूमि यह रही है कि, हिन्दू धर्म की वर्ण व्यवस्था भी छिन्न-भिन्न है। यहां सिर्फ़ दो ही वर्ण हैं, ब्राह्मण और शूद्र, क्षत्रिय और वैश्य नदारत है। स्वाभाविक हैं, जब जगह खाली है तो, कोई भी जगह लेने का दावा करता रहता है। कुनबी (शाहूजी महाराज वंशज, माली (फुले वंशज) शिवाजी महाराज के साथ यादव वंशज भी पाया जाता है। ज़मीन्दारी इन्हीं लोगों के नाम से जानी जाती है, जिसे मराठा कहते हैं, कुछ लोग अपने आपको क्षत्रिय मानते हैं,

लेकिन इतिहास में दर्ज है कि इन्हें ब्राह्मणों ने कभी क्षत्रिय न मानते हुए शूद्र ही माना है और उनके साथ नीचता का दुर्व्यवहार भी किया है। यहां के ब्राह्मणों का शूद्रों पर अमानवीय व्यवहार, (यहां तक कि मराठा राजाओं पर भी) इस पृष्ठभूमि को देखते हुए, यह सोचने को मजबूर होना पड़ता है कि, काश्मीर, आसाम और तामिलनाडु की तरह 3% ब्राह्मणों के खिलाफ आन्दोलन क्यों नहीं शुरू हुआ? कारणों का अध्ययन करना उचित समझता हूं। बाबा साहेब ज़िन्दगी भर शूद्र रहते हुए, हिन्दू धर्म को सुधारने की कोशिश करते रहे, असफल होते हुए, अंत में आजिज आकर, 1935 के येवला कन्फरेन्स में दुःखी होकर मजबूरन यह कहना पड़ा कि, *दुर्भाग्य से मैं हिन्दू धर्म में पैदा हुआ, यह मेरे बस में नहीं था, लेकिन मैं हिन्दू रहकर मरूंगा नहीं*! बाबा साहेब की इस क्रिया का, शूद्रों पर तो कोई खास फर्क नहीं पड़ा, लेकिन ब्राह्मणों में बौखलाहट के साथ जबरदस्त प्रतिक्रिया हुई। ब्राह्मणों ने जाति शुद्धिकरण मिशन के माध्यम से, महार जाति को छोड़कर, ब्राह्मण जिन जातियों के परछाई से परहेज़ करते थे, अब उन्हीं जातियों के पास जाकर, हाथ जोड़कर, इज्जत देते हुए, यह कहना शुरू किया कि, अम्बेडकर तुम हिन्दुओं को मलिच्छ बनाने की बात कर रहा है, अनर्गल हिंदू धर्म रक्षा की बात करते हुए, महार जाति और बाबा साहेब के खिलाफ दूसरी अछूत जातियों में जबरदस्त नफरत फ़ैलाने में सफल भी हो गये। उस समय सिर्फ महार जाति के लोग बाबा साहेब की बातों को मानकर बौद्ध धर्म ग्रहण कर लिए। महार के अलावा बचीं तीन मुख्य अछूत जातियां चमार, मातंग और ढोर, हिन्दू धर्म की चासनी पीते हुए स्वर्ग महसूस करने लगे।

इसी तरह पिछड़ी जातियों को भी बर्गला कर, उनके साथ रोटी- बेटी का थोडा़ बहुत रिस्ता भी बनाकर पक्का हिन्दू बनाकर अपने साथ रखने में सफल हो गए। इन जातियों को धर्म की अफीम खिलाकर, हिन्दू और बौद्ध में दुश्मनी की इतनी बड़ी दरार पैदा कर दी है कि,आज भी पटने को तैयार नहीं है।ब्राह्मणों की शातिर बुद्धि का कमाल देखना है तो, पूरे भारत में महाराष्ट्र एक नमूना है। बाबा साहेब की क्रिया के विपरीत, प्रतिक्रिया में सभी जातियों को महिमा मंडित किया गया। पता नहीं कहां कहां से ढूढ़कर, शूद्रों की सभी जातियों में मनगढ़ंत कहानियां लिखकर एक-एक महापुरुष पैदा किया, फिर भगवान तक का दर्जा दिला दिया और उन सभी को बाबा साहेब अम्बेडकर से महान बताकर, उन सभी जातियों को, अपनी अपनी जाति के महापुरुषों का अनुवाई बना दिया। इस क्रम में शूद्रों की हर जाति के एक-एक महापुरुष या भगवान पैदा किए गए है,

महापुरुष बनाना उतना खतरनाक नहीं था, जितना कि बाबा साहेब से उन सभी को बड़ा साबित करा देना। जैसे चमार के लिए, संत रविदास जी को। मातंग के लिए, लहू जी को। ढोर के लिए, ककैया जी को। इसी तरह सभी पिछड़ी जातियों में भी पैदा किए गए हैं। सभी अपनी अपनी जाति के महापुरुषों की जयंती मनाते समय एक दूसरे में अतिक्रमण भी नहीं करते है। सब अपना अपना मनाते हैं। बेचारे महार सिर्फ बौद्ध बनकर अकेले बाबा साहेब को लेकर चल रहे हैं। यही नहीं, जय भीम की प्रतिक्रिया में, जय रोहिदास, जय लहू, जय ककैया, जय मल्हार, जय सेवा लाल, जय शिवा जी --- आदि, इस तरह सभी जातियों के सम्बोधन मिल जाएंगे, यदि नहीं है तो पैदा कर लिए जाते हैं। 1982 में कांशीराम जी के बामसेफ ज्वाइन करने के बाद पाया कि, मिशन में 95% तक बुद्धिष्ट लोग ही हैं और वे लोग भी सिर्फ बुद्धिष्ट को ही प्रशिक्षण दे रहें हैं। कुछ मुस्लिम और उत्तर भारतीय शूद्र मिल जाते थे। दूसरों के यहा जाने या उन्हें लाने की कोई कोशिश भी नहीं करता था तो, बहुजन बनने का कोई सवाल ही नहीं बनता था ? कांशीराम जी चमार होते हुए, जय भीम सम्वोधन करते थे। इसी कारण यहां चमारों के नेता स्वीकार नहीं किए गए। बहुजन मिशन होने के कारण यह सवाल मुझे बार-बार उद्वेलित करते रहते थे।

बहुत ही कटु और विचित्र अनुभव देखने को मिलता रहता था। कुछ देना उचित समझता हूं। करीब 88-89 का समय रहा होगा। डाक्टर प्रितिश जलगावकर (MBBS) मातंग समाज के बहुजन समाज पार्टी से जुड़ गए थे। एक बार उन्ही के माध्यम से मुझे भी मातंग समाज की दादर की एक मिटिंग में जाने का मौका मिला। मुझे बोलने का तो सवाल ही नहीं था, लेकिन जब स्टेज से भाषण देने के बाद, डाक्टर साहब ने जय भीम  सम्बोधन कर दिया, अब क्या? पूरे हाल में हंगामा खड़ा हो गया। मातंग समाज का अध्यक्ष उनके हाथ से माइक छीनते हुए, उन्हें धक्के देते हुए मंच से उतार दिया और गुस्से में टेबल को पीटते हुए, जय लहू, जय लहू- --चिल्लाने लगा। मर जाऊंगा, लेकिन जय भीम कभी नहीं बोलूंगा, नहीं बोलूंगा -- मेरे सामने ऐसी विचित्र पहली घटना थी, उस समय डर तो मैं भी गया। लेकिन जय लहू सम्बोधन के साथ, थोड़ी समाज में घुसपैठ मैंने कर ली। कुछ महीनों बाद, उसी अध्यक्ष ने, अपने बच्चे के जन्म दिवस पर मुझे आमंत्रित किया और बोलने का मौका दिया। आधे घंटे के भाषण में पूरा फोकस जय भीम विषय पर ही था। वही अध्यक्ष, उसी समय उस दिन के व्यवहार के लिए मुझ से माफी भी मांगी और जय भीम भी बोला। मैंने महसूस किया कि, एक दूसरी जातियों के बीच सम्वाद की कमी से आपसी मनमुटाव व दूरियां बढ़ी हुई है। उसी दिन मुझे अपने आप में विश्वास जगा  और बहुजन समाज में प्रशिक्षण देना शुरू कर दिया।

धीरे धीरे मैंने अपने तरीके से, बौद्धमय भारत बनाने के प्रशिक्षण के  विपरित, सिर्फ हिन्दू धर्म के पाखंड और अंधविश्वास पर प्रशिक्षण देना शुरू किया।  डिमांड सभी समाज में होने लगी। कुछ तथाकथित पहले से प्रशिक्षण देने वाले बामसेफियो को नागवार गुजरने लगा। मेरे तय प्रशिक्षण को कैंसिल करवाने या खुद हमसे पहले पहुंचकर प्रशिक्षण शुरू कर देने और अन्त तक चिपके रहने, तथा मुझे थोड़ा भी परिचय का भी, मौका न देना असहज होने लगा था। क्योंकि मैं स्थानीय नहीं था, टकराव से बचना भी चाहता था , इसलिए, धीरे-धीरे खुद ही प्रशिक्षण देना छोड़ दिया। विचारों और मिशन का नुक़सान देखकर कयी बार सीनियर से टकराव भी होता रहा, लेकिन मिशन नहीं छोड़ा। मैंने देखा कि सभी नेताओं में मिशन की सफलता से ज्यादा, खुद के वर्चश्व को बनाए रखने की चिंता ज्यादा रहती थी। लोगों में इमानदारी और त्याग की भावना बहुत कम दिखाई देती थी। कमोवेश पूरे देश में बामसेफ के टुकड़े होने और मिशन फेल होने का यही मुख्य कारण भी रहा होगा। अभी एक साल पहले, एक अधिकारी से मेरी किताब *गर्व से कहो हम शूद्र हैं। 

से सम्पर्क होने के कारण, मुझे अपने समाज के सालाना अधिवेशन में बुला लिया। डोइफोडे़ हित वर्धक मंडल, बैनर पर उनकी जाति की कुलदेवी के साथ साथ, संत रोहिदास और बाबा साहेब की फोटो लगी थी। वहीं पता लगाने पर मालूम पड़ा कि चमार जाति की बारह उप जातियों में, यह एक मोची जाति है। मैं मुख्य वक्ता भी था। समाज की बात करने के बाद ज्योही बाबा साहेब की बात शुरू किया, ब्यवधान शुरू हो गया, पब्लिक से कुछ तालियां भी बज रही थी, इसलिए भाषण जारी भी रखा। लेकिन आप को कत्तई विश्वास नहीं होगा कि, जिसने मुझे गेस्ट के रूप में बुलाया था, उसने ही माइक तक बन्द कर दिया। बाबा साहेब की बैनर पर फोटो लगे होने पर, इस अभद्र व्यवहार के लिए लोगों से सवाल उठाया, तो लोगों ने कहा कि हम लोगों ने पहली बार बाबा साहेब के फोटो को बैनर में जगह दी है। इसी तरह बंजारा समाज की एक मीटिंग में भी अनुभव किया। अच्छे पदों पर, पढ़े लिखे लोगों के मुख से सुना, हमारी संस्कृति और सभ्यता हिन्दू धर्म की सबसे पुरानी और सबसे अच्छी है, हर कीमत पर इस हिन्दू धर्म की धरोहर को बचा कर रखना है। उनके भी जाति का कोई एक धर्मगुरु वहां था और सभी लोग उसके पैर छूते और आशीर्वाद लेते थे। और सम्बोधन में, एक दूसरे से "जय सेवा लाल" बोलते थे। एक बार 1989 में मानखूर्द में एक मोची की दुकान पर हिन्दू देवी देवताओं का फोटो देखकर, अनायास ही पूछ लिया और कहा कि उत्तर प्रदेश में मोची अपनी दुकान में बाबा साहेब की फोटो लगाता है और आप यहां क्यो नही? सपाट ज़बाब था, ए हमारे भगवान हैं।

हमारी जिज्ञासा बढ़ती गई, एक सवाल और पूछ लिया? आप बाबा साहेब और गांधी जी में किसको बड़ा मानते हो। बिना झिझके तुरंत जबाव, बाबा साहेब तो शूट व टाई पहनकर अंग्रेजों की दलाली करते थे, गांधी जी हमलोगो की बस्ती में रहकर दलितों की सेवा करते थे। यह सुनकर मैं स्तब्ध रह गया! दूसरे दिन ही उस समय के बसपा के महासचिव डाक्टर सुरेश माने जी से पूछ लिया कि, यह आप के राज्य में, मैं क्या सुन रहा हूं,? उनका कहना था, उसका दोष नहीं है, जो उसको बताया गया है, वही आप से कह रहा है। ब्राह्मणों ने धर्म की चासनी चटाकर हिन्दू दलित और बौद्ध दलित में,  इतनी दुश्मनी खड़ी कर दी कि, अज्ञानता वश, एक भाई, अपने ही दूसरे भाई का दुश्मन बना हुआ है। बता दूं कि, उत्तर भारत में जो चमड़े का काम मरे हुए पशु को उठाने से लेकर जूता बनाने तक सिर्फ एक ही जाति चमार करता है, उसी काम को महाराष्ट्र में पेशवाई ब्राह्मणों ने एक ही बाप के चार बेटों को, चार भागों में काम बांटकर एक दूसरे से ऊंच-नीच बनाकर, क्रमश: महार, ढोर, मातंग और चमार बना दिया। दलितों में चमार अपने को ब्राह्मण समझता है। सिर्फ पका हुआ चमडा़ ही हाथ लगाता है। इसलिए जूते बनाने के व्यवसाय से जुड़ गए और अपने ही भाई महार को जो जूते बनाने के लिए, उन्हें रा मेटिरियल देता था, उसी को छूने से परहेज़ करता था। स्वाभाविक था, अछूतों में सबसे निचले पायदान पर होने के कारण, महार सबसे ज्यादा प्रताड़ित हुवा और बाबा साहेब की बात मानकर, पुस्तैनी धन्धो को लात मारकर, नौकरी धन्धे करने और पढ़ने-पढ़ाने के लिए शहरों की ओर कूच कर गए। बौद्ध बनकर आज, हर क्षेत्र में महाराष्ट्र में ब्राह्मणों के बाद दूसरे स्थान पर है और वहीं हिन्दू दलित - चमार, मातंग और ढोर, शुद्ध हिन्दू बनकर, धर्म की धरोहर बचाने के लिए, बौद्ध धर्म से लड़ने के लिए सबसे आगे रहता है।

आज भी हिन्दू दलितों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हुआ है। राजनीतिक रूप से हिन्दू होने के नाते, जहां जिसको फायदा दिखा वहीं चले जाते हैं। हर जाति के लोग सभी राजनीतिक पार्टियों में मिल जाएंगे। कोई सिद्धांत नहीं है। सभी पिछड़ी जातियों की भी कमोवेश यही हालात हैं। प्रमाण भी आप के सामने है, शुरुआती, महाराष्ट्र का कट्टर अम्बेडकरवादी बड़ा नेता, दिल्ली में, आज जय भीम छोड़कर, जय श्री राम बोलता है और उसका स्वागत भी यहां होता है। समाज में क्या संदेश ए लोग देना चाहते है। यहां के आदिवासियो की हालत सबसे खराब है। शिक्षा के अभाव में, अज्ञानता के कारण, आर्थिक सरकारी सुविधाएं भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाती हैं।

यहां तक कि आदिवासियों को अपने आदिवासी जाति की वैलिडिटी (जाति प्रमाण-पत्र का सत्यापन) कराने के लिए दलालों को लाख, डेढ़ लाख देना पड़ता है। 70 साल की उपलब्धियों के बावजूद, मुम्बई से महज 60 किलोमीटर दूर पालघर जिले (आदिवासी बहुल) में कुछ लोग जंगल की लकड़ी बिनकर जीवन बिताने को मजबूर हैं और यही नहीं, सामाजिक ज्ञान के तौर पर बहुतों को बाबा साहेब का नाम तक नहीं मालूम है। जब कि सभी बामसेफी और मूलनिवासी के जनक यहीं से पैदा हुए हैं। 40 सालों से आदिवासियों में ही मूलनिवासी की भावना नहीं पैदा कर पाएं है। संछेप में कहूं तो, महाराष्ट्र की जातियों में अब छुआछूत की भावना कम हो गई है, जातियों में आपस में शादी विवाह (लव-मैरिज) करने का उतना प्रतिबंध नहीं है। हर जाति का खुद का अपना साम्राज्य है। जाति के लीडर के अधीनता और उसकी बातों की अहमियत सबसे ज्यादा होती है। वहीं राजनीतिक सौदेबाजी भी करता है।

सभी जातियों की रजिस्ट्रर्ड संस्थाएं है। करीब करीब सभी के आफिस के साथ-साथ हाल भी सरकार के सहयोग से मिला हुआ है। सभी के अपने अपने मैरिज ब्यूरो भी खुले हुए हैं। हिन्दू धर्म के सभी त्योहारों और भगवानों में अटूट श्रद्धा है। सबसे बड़ी बात कि, सामाजिक और राजनीतिक रूप से एक दूसरे जाति में किसी तरह का अतिक्रमण नहीं है। आपस की एक दूसरे की जातियों में भाई-चारा की अपेक्षा, बाहरी लोगों के साथ अच्छा व्यवहार रहता है, यह एक मुम्बई वासियों के लिए सुखद बात है, यही गुण कुछ नेताओं को बुरा लगता है। ज़्यादातर लीडरशिप हर जाति की मराठा लोगों के पास है और ये लोग भी ब्राह्मणवादी मानसिकता का ही पालन करते हैं। एक अनुभव, 89-90 के आसपास तक शिव जयंती के समय मुम्बई में चारों तरफ एक बैनर देखने को मिलता था,

गो- ब्राह्मण प्रतिपालक शिवाजी महाराज की जय* सभी मराठा ऐसा ही जय- जयकार करते रहते थे। लगता है अब कुछ समझदारी आ गयी है। हिंदू धर्म के पाखंड और अंधविश्वास की जड़ें इतनी मजबूत हैं कि अंबेडकरी मिशन को इन जातियों में आसानी से सेंध लगाना बहुत मुश्किल है। फुले-साहू-अंम्बेडकरी क्रान्तिकारी मिशन यहीं से पैदा होकर पूरे देश में अलख जगाने में सफल हो गया है। यहां के लिए यह कहावत चरितार्थ होती है-- दीपक तले अंधेरा, कांशीराम जी के यहां असफल होने का कुछ हद तक यही कारण भी रहा होगा। यदि आक्रामक रुख लेकर बड़े पैमाने पर, यदि  मिशन ,गर्व से कहो हम शूद्र हैं। के द्वारा, यहां की जातियों में व्याप्त अंधविश्वास और पाखंड पर प्रहार किया जाए, इनके अंदर संवैधानिक अधिकार और ब्राह्मण से उच्च होने का स्वाभिमान जगाया जाय, तब हो सकता है, सभी शूद्रो की जातियों में आपसी भाई-चारा पैदा हो जाय। इसके बाद बैकडोर से अम्बेडकर मिशन चलाया जाय तो, कुछ हद तक सफलता मिल सकती है। यहां के कुछ लोगों की मुझे इस तरह की सलाह भी है। अन्यथा फिलहाल मुस्किल है। समीक्षा संछेप में, समाज हित में, स्वस्थ भावना से और अनुभव के आधार पर  किया हूं, किसी को कुछ बुरा लगे तो मांफी चाहता हूं। हमारे इस लेख पर आप सभी का तहे दिल से सुझाव का स्वागत है। यदि पसंद आए तो, इसे मराठी में ट्रांस्लेट कर प्रचारित करने की भी उम्मीद करता हूं। धन्यवाद!गर्व से कहो हम शूद्र हैं, शूद्र एकता मंच,आप का समान दर्द का हमदर्द साथी,शूद्र शिवशंकर सिंह यादव, मो०- 7756816035,9869075576

चौपाल के आयोजन हुआ संपन्न चौपाल में पहुंचे मंत्री


आज दिनांक 06-11-2021 को माननीय मंत्री श्रीमान रमाशंकर सिंह पटेल जी ऊर्जा एवं अतिरिक्त स्रोत ऊर्जा राज्य मंत्री उत्तर प्रदेश शासन जी आज ग्राम- बहेरा विकासखंड- राजगढ़ विधानसभा- मड़िहान जिला- मिर्जापुर में श्री अशोक सिंह के घर पर चौपाल का आयोजन किया गया। जिसमें माननीय मंत्री श्रीमान रमाशंकर सिंह पटेल जी ऊर्जा एवं अतिरिक्त स्रोत ऊर्जा राज्य मंत्री उत्तर प्रदेश शासन जी ने चौपाल में सभी ग्रामीणों

के सामने अपने साढ़े 4 वर्ष में कराए गए विधानसभा मड़िहान के विकास कार्यों को गिनाया, और कहा कि जो भी काम अभी छूटे है, उनको भी हम युद्ध स्तर पर कराने काम करेंगे। इस अवसर पर ग्रामीणों ने सिंचाई के संसाधन की व्यवस्था एवं स्मार्ट कार्ड बनवाने की मांग की, जिसपर माननीय मंत्री जी ने कहा कि यह कार्य जल्द से जल्द हो जाएगा। इस अवसर पर अशोक सिंह सत्यनारायण  लल्लन यादव  आलोक  डॉ हरीशचंद जी इस पटेल सुनील केसरी  सहित तमाम लोग उपस्थित रहे।

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आगामी 8 तारीख को आयेंगे कैराना मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, सीएम योगी की जनसभा स्थल का कैबिनेट मंत्री सुरेश राणा ने लिया जायजा।


कैराना। आगामी 8 नवंबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कैराना आएंगे। जहां पर मुख्यमंत्री द्वारा पीएसी कैंप की भूमि के शिलान्यास सहित करोड़ों रुपए की परियोजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास किया जाएगा। वहीं मुख्यमंत्री के कार्यक्रम को लेकर कैबिनेट मंत्री सुरेश राणा विजय सिंह पथिक महाविद्यालय में पहुंचे तथा सीएम की जनसभा स्थल का निरीक्षण किया इसके साथ ही कैबिनेट मंत्री ने भाजपा नेताओं के साथ बैठक कर सीएम की जय सभा को सफल बनाने के लिए खाका तैयार किया।आगामी 2022 विधानसभा चुनाव से पहले 8 नवंबर को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कैराना आएगी मुख्यमंत्री जनसभा के लिए कैराना के विजय सिंह पथिक महाविद्यालय में स्टेज बनाया गया है। वही लोगों के बैठने के लिए भी बड़ी गैलरी बनाई गई है। बताया गया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ऊंचागांव में बनने वाले पीएसी कैंप की भूमि के शिलान्यास सहित करोड़ों रुपए की परियोजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास करेंगे। वहीं मुख्यमंत्री के कार्यक्रम को लेकर शुक्रवार को कैबिनेट मंत्री सुरेश राणा विजय सिंह पथिक महाविद्यालय में पहुंचे तथा मुख्यमंत्री की जनसभा स्थल का जायजा लिया। इस दौरान डीएम और एसपी सुकीर्ति माधव से जनसभा की सुरक्षा व्यवस्था के बारे में विचार विमर्श किया। बाद में कैबिनेट मंत्री सुरेश राणा ने भाजपा सांसद प्रदीप चौधरी, विधायक तेजेंद्र निर्वाल, एमएलसी वीरेंद्र सिंह, वरिष्ठ भाजपा नेता अनिल चौहान, भाजपा नेत्री मृगांका सिंह जिला अध्यक्ष सतेद्र तोमर सहित अन्य पार्टी के नेताओं वे कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की। वही कैबिनेट मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री की जनसभा में अपार जनसमूह जुटेगा।

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मूल निवासियों को गरीब करने के लिए बने त्योहार फिजूल खर्च न करें महंगाई कर बी जे पी सरकार देश के साथ कर रही खिलवाड-गादरे

 


मेरठ:-महंगाई से बी जे पी सरकार का लाभ ही लाभ मूल निवासियों को और भूखो मरने पर मजबूर कर दिया।बहुजन मुक्ति पार्टी के प्रदेश मीडिया प्रभारी एवं मेरठ मंडल अध्यक्ष आर डी गादरे ने कहा कि बढती हुई लगातार महंगाई को मूल निवासियों के ऊपर अत्याचार किया जा रहा है।आने वाले दिनों में देश की एक बड़ी आबादी की जान घर परिवार की मूलभूत जरूरतों को पूरा करने में ही निकल जानी है। त्यौहार मूल निवासियों पर जबरदस्ती थोप गये षडयन्त्र का हिस्सा है। इनसे सिर्फ देश पर षडयन्त्र रचने वाले विशेष वर्ग का ही फायदा होता है। फिलहाल लोगों का ध्यान सिर्फ पेट्रोल डीजल की बढ़ती हुई कीमतों पर ज्यादा जा रहा है। लेकिन ईंधन की कीमतों में हर रोज 10-20 पैसे की बढ़ोतरी ने हर चीज को महंगा कर दिया गया है। ईंटे सीमेंट सरिया और घर बनाने के लिए जरूरी हर समान में सिर्फ पिछले 2 साल के दौरान ही 50 से 100% से ज्यादा की बढ़ोतरी हो गई है? फल सब्जियां, खाने का तेल, LPG और CNG सहित हर चीज बहुत ज्यादा महंगी हो चुकी है। जानकारों के मुताबिक अभी ये कीमतें रुकने वाली नहीं है।

जनता की तरफ से कीमतों पर एक अजीब सी खामोशी छाई हुई है। आम लोगों के पास बहुत धन आ गया हो ऐसा भी नहीं है,भारत में आज भी 65 करोड़ से ज्यादा लोग घोर अभाव में जीवन बसर करते हैं? प्रचारतंत्र की शक्ति अगर किसी को समझनी है तो उसे मोदी सरकार से ट्यूशन लेना चाहिए। मनोविज्ञान से आम जनमानस के मस्तिष्क से खेलकर उन्हें अहम मुद्दों से बहुत दूर दूसरी ही चीजों में व्यस्त कर दिया गया है। बेरोजगारी, बिकते हुए Psu से ज्यादा जनता ये जानने में दिलचस्पी ले रही है कि तालिबान का लीडर मुल्ला बिरादर किधर गुम है

, उन्हें अपने निर्वाचन क्षेत्र से गायब रहने वाले सांसद से कोई मतलब नहीं। पाकिस्तान में 400 रुपए किलो की दर से बिकते टमाटरों की खबर 210 रुपए लीटर सरसों के तेल पर भारी है। बड़े बड़े  विशेषज्ञ TV चैनलों पर दिन रात हिन्दू मुस्लिम सिक्ख, चीन पाकिस्तान, और 'देशद्रोही कौन?' जैसे बेमानी मुद्दों पर चर्चा करते पाए जाते हैं। जादूगर जैसे आंख बांध देते हैं, वैसे ही लोगों की आंखों में धूल झोंकने का काम मीडिया कर रहा है। वाकई मेरा भारत बदल रहा है...इसके सपनों की उड़ान उतनी ही ऊंची है जितना ऊंचा मीडियाई आसमान है.? आर डी गादरे ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को समानता का अधिकार हक शिक्षा एक समान न्याय व्यवस्था सुचारू रूप से करने का कार्य केवल बहुजन मुक्ति पार्टी जो 100 रुपये के स्टाम्प पेपर पर लिखकर देती है। आने वाली 14 नवम्बर को इटावा चलो उत्तर प्रदेश बचाओ। जागो मूल निवासियों बाहर निकलो मकानों से जागो जंग लडो बेईमानो से जय मूल निवासी।

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क्षेत्र के गांव मामोर में कांग्रेस की मिटिंग आयोजित। दर्जनों ने ली पार्टी की सदस्यता।


कैराना।  मंगलवार को क्षेत्र के गांव  ममोर में कांग्रेस का हाथ थामा। सभा मे प्रियंका गांधी की तारीफ की गाँव शामली जिला कांग्रेस कमेटी के नेतृत्व में शामली जनपद के कैराना विधानसभा मैं ग्राम ममोर में कैराना ब्लॉक अध्यक्ष  कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग वकील खान द्वारा कांग्रेस पार्टी की एक  सभा का आयोजन किया गया जिसमें मुख्य अतिथि  कांग्रेस जिला अध्यक्ष दीपक सैनी के जिला शामली मे कायॅ को देखते हुए   ग्राम वासियों ने कांग्रेस का हाथ थामा  सभा की अध्यक्षता कैराना कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अब्दुल हफीज ने की मीटिंग में मौजूद शमशीर खान नगर अध्यक्ष कैराना ने संचालन किया। कांग्रेस,जिला अध्यक्ष दीपक सैनी ने बताया आने वाला समय कांग्रेस का है

जिस तरह से आज किसान मजदूर आत्महत्या करने पर मजबूर हैं जिनकी आवाज जमीनी स्तर पर सिर्फ कांग्रेस पार्टी ही उठा रही है हमारे प्रिय नेता आदरणीय प्रियंका गांधी  लगातार पीड़ितों के मुद्दे को उठाकर भाजपा सरकार को आइना दिखा ने का काम करती आ रही है इसलिए अब वक्त आ गया है हम सब छोटे दलों को नजरअंदाज कर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के साथ अपना भरपूर समर्थन दें। आदरणीय प्रियंका गांधी  के हाथों को मजबूत करें ओर प्रियंका गांधी जी ने उत्तर प्रदेश मे अपनी जनता के लिए जो घोषणा की चाहे किसान व व्यापार व मजदूर ओर छात्रों के लिए की है उसको पुरा करेगी क्योंकि कांग्रेस कभी झुठे वादे नही करती आज महंगाई से हर कोई बहुत दुखी हो रहा है ।

शमशीर खान नगर अध्यक्ष कैराना ने कहा भाजपा की सरकार में पेट्रोल डीजल के भाव आसमान छू रहे है जिससे आम जनजीवन काफी प्रभावित होता जा रहा है आज हालत यह हो गई है कि गरीब मजदूर को अपना जीवन यापन करना भी दुर्लभ हो गया है नोटबंदी जीएसटी फिर करोना की मार ऊपर से तेल के दाम बढ़ाकर जैसे गरीब आदमियों की तो जिंदगी को तबाही के रास्ते पर ला कर इस क्रूर  भारतीय जनता पार्टी ने छोड़ दिया है जिसका जवाब आने वाले विधानसभा 2022 को वोट के माध्यम से भाजपा सरकार को दिया जाएगा  कांग्रेस एससी एसटी के जिलाध्यक्ष लोकेश कटारिया ने कहा अगर अपने देश का अपने बच्चों का मुस्तकबिल बनाना चाहते हो तो हम सबको कांग्रेस पार्टी के साथ ही आना होगा वही जिला उपाध्यक्ष अब्दुल हफीज ने बताया आदरणीय प्रियंका गांधी जी द्वारा लगातार जनता के लिए महत्वपूर्ण घोषणा है की जा रही है

जो सिर्फ घोषणा नहीं बल्कि इन घोषणाओं को सरकार बनते ही इन सब बातों को पूरा कर दिया जाएगा मीटिंग के संयोजक वकील खान ने आश्वासन दिया गांव का एक एक वोट कांग्रेस पार्टी को जाएगा मीटिंग में मौजूद महिला जिला उपाध्यक्ष सीमा जाटव जिला महासचिव चौधरी राशिद अली अल्पसंख्यक जिला अध्यक्ष नफीस अहमद जिला सचिव सलमान राहुल शमाॅ जिला सचिव  किसान कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष इंतजार संदीप शमाॅ जिला सचिव अश्वनी शमाॅ युवा कांग्रेस प्रदेश महासचिव  जितेन्द्र कश्यप बिटटू गोस्वामी अरूण सैनी युवा कांग्रेस आदि कांग्रेसी शामिल रहे  ।

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