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झिंझाना 17 नवंबर। मोदीनगर की भाजपा विधायक डॉ मंजू चौधरी ने कैराना विधानसभा क्षेत्र का तूफानी दौरा कर भाजपा कार्यकर्ताओं में जोश भरा।


उन्होंने कहा कि मोदी एवं योगी  के नेतृत्व में देश में जबरदस्त विकास हो रहा है। बुधवार को मोदीनगर की भाजपा विधायक डॉक्टर मंजू चौधरी ने कस्बा झिंझाना में किसान मोर्चा के नेता बंटी चौधरी, गांव आम वाली में मोनू तोमर, बाड़ीमाजरा में गांव प्रधान देवेंद्र तोमर , गांव सिंगरा में

रामवीर, मछरौली में चौधरी पिंटू, गांव बझेड़ी में रूबी चौधरी, गांव ढिंढाली में बब्लू चौधरी के निवास स्थान पर किसान भाइयों की नुक्कड़ सभाओं को संबोधित कर भाजपा सरकार की रीति नीति एवं विकास कार्यों की जानकारी दी और भाजपा की जीत में ही देश व प्रदेश का विकास होने

का दावा किया। इस अवसर पर भाजपा की रूबी, प्रविता चौधरी, भूपेंद्र शर्मा ,ओम प्रकाश ,मोनू चौधरी, हरेंद्र चौधरी, विनीत चौधरी, नवनीत ,विवेक चौधरी आदि कार्यकर्ता साथ रहे। संचालन किसान मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष बंटी चौधरी ने किया। प्रेम चन्द वर्मा

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उत्तर प्रदेश में 'भाजपा हराओ - उत्तर प्रदेश बचाओ' अभियान चलाया जाएगा

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संविधान बचाओ - देश बचाओ सम्मेलन' लखनऊ में 12 दिसंबर को होगा, उत्तरप्रदेश में जिले स्तर पर 'संविधान बचाओ- देश बचाओ' समितियों का गठन किया जाएगा, संविधान बचाओ, देश बचाओ' अभियान कार्यक्रम के संयोजक एवं राष्ट्रीय संचालन समिति के सदस्य अरुण श्रीवास्तव ने आगरा में प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र सरकार द्वारा देश पर थोपी जा रही नीतियों के चलते लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता के मूल्य खतरे में पड़ गए हैं । गैर बराबरी, बेरोजगारी, महंगाई चरम पर है। सार्वजनिक संपत्ति को मिट्टी के दाम पर चंद घरानों को बेचा जा रहा है। 356 दिन से चल रहे किसान आंदोलन में 700 से अधिक किसान शहीद हो चुके हैं, लेकिन सरकार सुनवाई करने को तैयार नहीं है। किसान ,किसानी और गांव को नष्ट कर सरकार किसानों की जमीन और खेती को अडानी - अम्बानी को सौंपने को आमादा है। चार श्रम कानूनों को समाप्त कर चार लेबर कोड देश के मजदूरों पर थोपे जा रहे हैं। समाज में साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण की राजनीति को थोपा जा रहा है तथा अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाने वालों पर फर्जी मुकदमे लगाकर जेल में डाला जा रहा है।

ऐसी परिस्थितियों में  संविधान और देश को बचाने के लिए संपूर्ण विपक्ष का एकजुट होना आवश्यक है।अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि 'संविधान बचाओ, देश बचाओ अभियान' में आगामी 12 दिसंबर को रविंद्रालय, लखनऊ में संविधान बचाओ, देश बचाओ सम्मेलन आयोजित किया है। जिसमें उत्तर प्रदेश में '*भाजपा  हराओ -उत्तर प्रदेश बचाओ' अभियान की शुरुआत की जाएगी। कार्यक्रम के संयोजक अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि 'संविधान बचाओ, देश बचाओ' अभियान के तहत उत्तर प्रदेश के जिस जिले में बैठक आयोजित की जा चुकी है तथा आज आगरा में हुई बैठक में आगरा मंडल में अभियान को जोर -शोर से चलाने की रणनीति तय की गई। उन्होंने कहा कि

यदि विपक्ष एकजुट नहीं होगा तो उत्तरप्रदेश के मतदाता बंगाल के मतदाताओं की तरफ एकजुट होकर जनविरोधी योगी सरकार को हटाएगी । अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि 29 अगस्त को  कांस्टीट्यूशन क्लब, दिल्ली में 'संविधान बचाओ, देश बचाओ सम्मेलन' आयोजित कर 15 सूत्रीय न्यूनतम साझा कार्यक्रम तय किया गया है,*जिसके आधार पर विपक्षी एकता कर देश को बचाया जा सकता है*। न्यूनतम साझा कार्यक्रम में कहा गया है कि 1.भारत का संविधान तथा इसके मौलिक सिद्धांत, धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक मूल्य, विचार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, असहमति और शांतिपूर्ण प्रतिरोध की आजादी भाजपा की  मोदी सरकार के सात वर्षीय शासन में गंभीर खतरे में है अतः हम भारत के गणतांत्रिक संविधान को बचायेंगे तथा इसके मूल्यों की रक्षा करेंगे। 

2. केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार की निरंतर  जन - विरोधी आर्थिक नीतियों तथा कोरोना महामारी से निपटने में भारी विफलता के कारण देश की अर्थव्यवस्था भयंकर संकट का सामना कर रही है जिसके परिणामस्वरूप लाखों नौकरियों का अभूतपूर्व  नुकसान हुआ है और बेरोजगारी में तेजी से वृद्धि हुई है, अतः हम ऐसी जनहितकारी एवं रोजगार मूलक आर्थिक नीतियां बनाएंगे ताकि देश के युवाओं को प्रतिवर्ष लाखों नौकरियां तथा रोजगार के अवसर मिले और वे सम्मान से जी सकें। खेती और उद्योगों में रोजगार मूलक तकनीक को प्राथमिकता देंगे तथा मनरेगा में कार्य दिवस और पारिश्रमिक बढ़ाएंगे।

3. कोरोना महामारी में लाखों लोगों को अस्पताल की कमी, समुचित स्वास्थ्य सेवा के अभाव, आवश्यक जीवन रक्षक दवाओं की भारी कमी और ऑक्सीजन न मिलने से असमय जान से हाथ धोना पड़ा । अतः हम संपूर्ण देश में  सार्वभौमिक स्वास्थ्य सेवा तथा ग्रामीण और शहरी भारत के प्रत्येक जिले के प्रखंड में एक सरकारी अस्पताल का निर्माण करेंगे तथा सबसे निचली प्रशासनिक इकाई में स्वास्थ्य एवं उपचार की समुचित व्यवस्था करेंगे।


4. शिक्षा किसी समाज की सफलता तथा विकास की कुँजी है किंतु नरेंद्र मोदी  सरकार लगातार सरकारी शिक्षण संस्थानों को बर्बाद कर रही है और स्कूल से लेकर उच्च शिक्षण संस्थानों को निजीकरण की ओर धकेल कर शिक्षा का बाजारीकरण कर रही है। इसके कारण समाज के वंचित और हाशिये पर स्थित लोग शिक्षा नहीं ले पायेंगे। अतः हम सरकार के द्वारा सभी के लिए कक्षा 12 वर्ग तक समान तथा गुणवत्तापूर्ण मुफ़्त शिक्षा सुनिश्चित करेंगे। 

5. कृषि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की आधारशिला है किंतु नरेंद्र मोदी सरकार ने संसद में अलोकतांत्रिक तरीक़े से तीन कृषि विरोधी कानून  पारित कराकर खेती को कारपोरेट के हवाले करने का षड्यंत्र किया है और किसानों के कृषि उत्पाद पर न्यूनतम समर्थन मूल्य समाप्त कर  दिया है । केंद्र सरकार सोच समझकर कृषि के निजीकरण को बढ़ावा देकर पूंजीपतियों और निगमों को उनके लाभ के लिए सौंप रही है। अतः हम ऐसे तीनों कृषि विरोधी कानूनों को तुरंत निरस्त कर , कृषि उत्पाद के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी सुनिश्चित करेंगे। हम संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा 9 माह से चलाए जा रहे आंदोलन का पुरजोर समर्थन करते हैं और आंदोलन में शहीद किसानों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।


6. विकास के नाम पर ग्रामीण और नगरीय क्षेत्रों के जमीन, जल और जंगल पर कब्जा तथा जीवन के संसाधनों को छीनकर बनती महाकाय करोड़ों की योजनाओं के कारण आदिवासी, किसान, मछुआरे, शहरी गरीब आदि समुदाय विस्थापित और वंचित हो रहे हैं। अतः हम स्थानीय समाज का संसाधनों पर अधिकार ग्राम सभा के 'पेशा कानून' के तहत तथा संवैधानिक दायरे में उनकी हकदारी सुनिश्चित करेंगे

7. केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार श्रमिकों के प्रतिरोध और हड़ताल के लोकतांत्रिक अधिकार को समाप्त करने के लिए मजदूर एवम श्रमिक विरोधी चार श्रम संहिता लाई है। अतः हम ऐसे सभी श्रमिक विरोधी लेबर कोड को तुरंत रद्द करेंगे और श्रमिकों के प्रतिरोध और हड़ताल के लोकतांत्रिक अधिकार सुनिश्चित करेंगे। 

8. राजद्रोह  कानून (sedition law), राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम(NSA),  गैर- कानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) जैसे तमाम नागरिक स्वतंत्रता विरोधी कानूनों का  नरेंद्र मोदी सरकार के काल में पुलिस तथा  अन्य सुरक्षा एजेंसियों के द्वारा नागरिक समाज और मानव अधिकार संगठनों के लोकतांत्रिक आंदोलन के दमन के लिए नग्न दुरूपयोग आम बात हो गयी है जो सीधे सीधे संविधान और लोकतंत्र पर हमला है। अतः हम ऐसे तमाम नागरिक स्वतंत्रता विरोधी कानूनों को तुरंत समाप्त करेंगे और नागरिकों के शांतिपूर्ण प्रतिरोध और असहमति के अधिकार को सुनिश्चित करेंगे।


9. मोदी सरकार के काल में लगातार दलितों, आदिवासियों, अल्पसंख्यकों का उत्पीड़न बढ़ता जा रहा है और सरकारी एजेंसियां तथा उनके अधिकारों की रक्षा करने वाले संवैधानिक और सरकारी आयोग मूकदर्शक बनी हुई है। अतः हम ऐसे सख्त कानून बनाएंगे और उसे प्रभावकारी तरीके से लागू करेंगे ताकि ऐसे अपराधियों को सख्त से सख्त सजा मिल सकें।

10. संवैधानिक तथा सरकारी संस्थाओं की स्वतंत्रता के लिए  नरेंद्र मोदी सरकार  की अधिनायकवादी कार्यप्रणाली तथा उनके उग्र  समर्थकों  के  कारण ऐसी संस्थाओं की स्वतंत्रता के लिए लगातार खतरा बढ़ रहा है और ये संवैधानिक संस्थायें स्वतंत्र तथा निर्भीक होकर अपने संवैधानिक दायित्वों तथा  कर्तव्यों का पालन नहीं कर पा रही हैं अतः हम ऐसे राजनैतिक वातावरण का निर्माण करेंगे ताकि ये संवैधानिक संस्थायें तथा सरकारी एजेंसियां तथा न्यायपालिका, चुनाव आयोग, आर.बी.आई.,  सी.ए.जी., सी.बी.आई.,  ई,डी आदि स्वतंत्र  तथा निर्भय होकर संवैधानिक जिम्मेदारियों का निर्वाह कर सकें। 

11. निजीकरण  तथा मोनेटाइजेशन के नाम पर सरकारी  बैंक और  बीमा कंपनियों सहित सार्वजनिक उपक्रमों  की नीलामी, सरकारी संपत्तियों की औने-पौने दाम पर मेगा बिक्री,  खास  पूंजीपतियों  की  सहयोगी भाजपा की नरेंद्र मोदी सरकार के आर्थिक मंत्र हैं। अतः हम सार्वजनिक उपक्रमों और  सरकारी संपत्तियों की रक्षा करेंगे और इसे अधिक से अधिक सशक्त बनायेंगे ताकि इसमें अधिक रोजगार के अवसर बढ़े और जनहित का कार्य हो। 

12. मीडिया लोकतंत्र की जीवन - रेखा है किंतु  मीडिया  संस्थानों पर निगमों के वित्तीय नियंत्रण तथा नरेंद्र मोदी सरकार के काल में सरकारी एजेंसियों के भय के कारण मीडिया मोदी सरकार तथा उसके वैचारिक संगठनों  के मुख-पत्र का कार्य कर रही है इसलिए हम ऐसा राजनीतिक वातावरण सुनिश्चित करेंगे ताकि मीडिया स्वतंत्रतापूर्वक व भयमुक्त होकर लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ तथा नागरिक  स्वतंत्रता के सजग प्रहरी के रूप में कार्य कर सके। 

13. भाजपा और नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में भारतीय राज्य तेजी से एक फासीवादी राज्य में बदलता जा रहा है इसलिए हम लोकतंत्र की रक्षा करेंगे, धर्म निरपेक्षता तथा बहुलता को पुनर्स्थापित करेंगे और सबसे बढ़कर भारतीय राज्य को एक सच्चा कल्याणकारी राज्य बनायेंगे ताकि दलितों, आदिवासियों, पिछड़े, अल्पसंख्यक व महिलाओं के लिए सामाजिक न्याय सुनिश्चित हो सके। 

14. भ्रष्टाचार व अपराधी मुक्त राजनीति और ई वी एम मुक्त निर्वाचन के प्रति हम प्रतिबद्धता व्यक्त करते हैं। हम राजनीतिक दलों के वित्तीय संसाधनों को सूचना के अधिकार कानून के दायरे में लाकर राजनीति को पारदर्शी तथा उत्तरदाई बनाएंगे। हम चुनाव सुधार करके राज्य के द्वारा निर्वाचन के लिए वित्तीय कोष का प्रावधान करेंगे ताकि निर्वाचन में धन शक्ति का प्रभाव न्यूनतम किया जा सकें आदि शामिल है।

15 सम्मेलन में जाति जनगणना के लिए चलाए जा रहे आंदोलन और उसकी मांगों का समर्थन करते हुए कहा गया कि विकास की नीति को सही तरीके से बनाने में पिछड़े वर्गों और अन्य जातियों की जनगणना सहायक होगी ,जिससे वंचित वर्गों को उचित प्रतिनिधित्व भी सुनिश्चित किया जा सकेगा। सम्मेलन की आयोजन समिति में  जस्टिस कोलसे पाटील( महाराष्ट्र), श्री अरुण कुमार ( बिहार), श्री बी आर पाटिल( कर्नाटक ) , श्री श्याम रजक( बिहार) , श्री अरुण श्रीवास्तव( यू पी) , डॉ सुनीलम( मध्यप्रदेश) , श्री शंकर आजाद( झारखंड ) , श्री कमल किशोर कठेरिया (यू पी ),श्री लारेबअकरम( यू पी) , श्री शशि शेखर सिंह( दिल्ली) , यादव रेड्डी (हैदराबाद) शामिल है । आगरा की मीटिंग की अध्यक्षता इतिहासकार dr आर सी शर्मा ने की, मंच पर dr अरशद, प्रोफेसर इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल सिसाइंस,आगरा यूनिवर्सिटी, श्री  देव प्रकाश शर्मा पर रहे। इस प्रोग्राम में डाक्टर सी पी राय,श्री शिरोमणि सिंह, श्री विनोद गोयल , Shri जितेंद्र यादव, श्री मजाज कुरेशी, श्री इरशाद, आदि उपस्थिति रही। श्री हरीश चिमटी ने मंच का संचालन किया। विधायक दर्पण न्यूज़ उत्तर प्रदेश आगरा से पत्रकार अमीन अहमद की रिपोर्ट

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चरथावल विधानसभा सीट को लेकर गठबंधन का मामला आ सकता है खटाई में ?.

 


समाजवादी व रालोद दोनों ही चरथावल सीट पर पेश कर चुके हैं अपना जबरदस्त दावा, जहां हरेंद्र मलिक को पंकज मलिक के आने से समाजवादी पार्टी चरथावल सीट पर अपना मजबूत दावा पेश कर रही है। वहीं रालोद भी चरथावल सीट को छोड़ने के मूड में नहीं है। 2017 के चुनाव में पंकज मलिक द्वारा रालोद का शामली विधानसभा का टिकट बीच में ठुकराना माना जा रहा है इसका प्रमुख कारण, पंकज मलिक को रोकने को रालोद ने ठोका चरथावल विधानसभा  सीट पर अपना दावा जिसके चलते 20 को बघरा में होगी रैली, ऐसा नहीं चरथावल में समाजवादी के पास केवल एक ही चेहरा

पंकज मलिक ही नहीं है एक और चेहरा है दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री एवं प्रमुख मुकेश चौधरी के साथ-साथ वर्तमान भाजपा सरकार में केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान के भाई वर्तमान जिला पंचायत सदस्य एवं जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव हार चुके सत्येंद्र बालियान उर्फ दीवान जी भी है प्रमुख दावेदार, लेकिन सपा में पंकज मलिक के शामिल होने से मुकेश चौधरी व सत्येंद्र बालियान उर्फ दीवान जी को लगा झटका छाई मायूसी, रालोद द्वारा चरथावल विधानसभा सीट पर मजबूत दावा पेश करने से

मलिक परिवार में मायूसी है वही मुकेश चौधरी व सत्येंद्र बालियान के चेहरे पर मुस्कुराहट क्योंकि वह मानते हैं सपा प्रमुख द्वारा उनके साथ हुआ था विश्वासघात, लेकिन गठबंधन में सीट किसी पर भी आए जानकार सूत्रों के अनुसार मुकेश चौधरी लड़ेंगे चुनाव जिससे बिगड़ सकता है किसी का भी खेल, रालोद के पास चरथावल विधानसभा सीट

पर दावेदारों की लंबी सूची, जिनमें पूर्व विधायक नूर सलीम राणा पूर्व विधायक नवाजिश आलम पूर्व एमएलसी मुस्ताक चौधरी के पुत्र के साथ पूर्व प्रमुख रंजन वीर व युवा चेहरा जिला पंचायत चुनाव में जबरदस्त फाइट पा चुके गौरव बालियान निवासी मंडी भी है प्रमुख दावेदार, वहीं

समाजवादी ज्वाइन करने के बावजूद भी पूर्व सांसद कादिर राणा की चुप्पी भी अभी खिला सकती है गुल, आपको बता दें कि चरथावल विधानसभा रालोद में समाजवादी गठबंधन में दरार का प्रमुख कारण बन सकती है इसके पीछे के गणित को समझने की आवश्यकता है जहां कश्यप सम्मेलन में साफ तौर से समाजवादी प्रमुख माननीय अखिलेश द्वारा गठबंधन की तरफ साफ इशारा किया गया कि गठबंधन तय है वही पंकज मलिक हरेंद्र मलिक के घर आकर चरथावल विधानसभा पर पंकज मलिक की मजबूती का एहसास करा गए वही यही एहसास रालोद प्रमुख को खटक गया क्योंकि 2017 के विधानसभा चुनाव में पंकज मलिक द्वारा रालोद के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह से वार्ता के



बाद शामली विधानसभा सीट से रालोद के टिकट से चुनाव लड़ने की बातें करने के बावजूद टिकट लेने नहीं पहुंचे थे दिल्ली , यदि जानकार सूत्रों की माने तो उसी को दिल से लगाए बैठे हैं वर्तमान रालोद प्रमुख जयंत चौधरी और इसी का कारण है कि चरथावल विधानसभा सीट पर 20 तारीख को रैली कर पेश कर रहे हैं अपना मजबूत दावा, चरथावल विधानसभा सीट पर कई बार समीकरण बनते बिगड़ते नजर आए क्या पिछले 4 साल से चरथावल विधानसभा सीट पर समाजवादी का मजबूत कैंडिडेट पूर्व

राज्य दर्जा प्राप्त मंत्री मुकेश चौधरी को माना जा रहा था वही अचानक कैराना विधायक नाहिद हसन द्वारा भाजपा सरकार में केंद्रीय राज्य मंत्री संजीव बालियान के भाई वर्तमान जिला पंचायत सदस्य सत्येंद्र बालियान उर्फ दीवान जी को समाजवादी ज्वाइन करा कर दिया था बड़ा झटका जिससे क्षेत्र में साफ चर्चा थी कि सत्येंद्र बालियान को मिलेगा टिकट वही अचानक पूर्व सांसद कादिर राणा द्वारा समाजवादी ज्वाइन करने से एक बार फिर अकड़े हुए थे तेज कि बदल सकते हैं  समीकरण तथा विधानसभा के , क्योंकि कादिर राणा की राजनीति में पकड़ किसी से छिपी नहीं है । लेकिन उन्होंने चुप्पी में ही भलाई समझा, लेकिन

समाजवादी के सभी दावेदारों को उस वक्त झटका लगा जब दो बार के विधायक पंकज मलिक और उनके पिता जो किसी परिचय के मोहताज नहीं है पूर्व राज्यसभा सदस्य हरेंद्र मलिक द्वारा समाजवादी ज्वाइन कर लेना और केवल ज्वाइन करना ही नहीं उनके आवास पर समाजवादी प्रमुख का आना सभी चर्चाओं पर विराम लगा गया जिससे बिल्कुल साफ साफ  निर्धारित हो गया कि चरथावल विधानसभा से पंकज मलिक ही होंगे समाजवादी के दावेदार और यही बात रालोद वालों को हजम नहीं हुई और चरथावल विधानसभा पर अपना दावा ठोकने के लिए 20

तारीख को रैली के आयोजन की कर दी घोषणा लेकिन यह कहना गलत होगा कि मात्र पंकज मलिक से बदला लेने की नीयत से दावा पेश किया है नहीं रालोद के पास भी मजबूत दावेदारों की एक लंबी सूची है जिनमें पूर्व विधायक नूर सलीम राणा पूर्व विधायक नवाजिश आलम और एमएलसी मुस्ताक चौधरी के पुत्र पूर्व ब्लाक प्रमुख रंजन वीर युवा चेहरा गौरव बालियान के साथ-साथ अनुभवी नेता श्री राम तोमर जी प्रमुख दावेदार है लेकिन कहीं ना कहीं मुकेश चौधरी की जो अपने चुनाव की तैयारी चल रही है वह सभी को परेशानी में डाल रही हैं यदि जानकार सूत्रों की सच

माने तो मुकेश चौधरी किसी भी कीमत पर लड़ेंगे चुनाव समाजवादी टिकट दे या ना दे सीट किसी भी पार्टी के हिस्से में आए या ना आए लेकिन पूर्व दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री मुकेश चौधरी के चुनाव लड़ने की चर्चा ने सभी को परेशानी में डाल रखा है अब ऐसे में दोनों ही पार्टी चरथावल

विधानसभा सीट को मूंछ का सवाल बनाती नजर आ रही है अब देखना यह होगा कि कौन सी पार्टी झुकती है लेकिन इतना तय माना जा रहा है

कि कहीं ना कहीं चरथावल विधानसभा सीट गठबंधन में एक दरार का काम कर सकती है क्योंकि दोनों ही पार्टी प्रमुखों के इरादे से साफ जाहिर होता है कि कोई सा भी हटने के मूड में नहीं है अब देखना यह होगा कि

क्या चरथावल विधानसभा रालोद के हिस्से में आती है या फिर समाजवादी के क्या इस सीट को लेकर टूटेगा गठबंधन या नहीं यह सब आने वाला समय ही बताएगा। वरिष्ठ पत्रकार उपेंद्र चौधरी की विशेष रिपोर्ट।
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उपाध्याय जोगी चेतना मंच के प्रदेश अध्यक्ष व समाजवादी पार्टी पिछड़ा वर्ग शामली के जिलाध्यक्ष संजय उपाध्याय कि 25 वर्षीय पुत्री बनीता उपाध्याय व 12 माह की नन्ही बच्ची मिस्टी उपाध्याय की 12 नवम्बर को बुडाना के निकट दर्दनाक वाहन सड़क दुर्घटना में मौत हो गयी


उपाध्याय चेतना मंच के प्रदेश सचिव विपिन पुण्डीर उपाध्याय ने जानकारी देते हुए बताया कि  संजय उपाध्याय की  बेटी और धेवती की इस दर्दनाक घटना से उपाध्याय समाज  के लोग व सभी  बहुत दुखी है  , उन्होंने बताया कि दिसंबर 2019 में  बनीता उपाध्याय की शादी मु0नगर के गांव सोहजनी जाटान में सुरेश कुमार के संग हुई थी जो 12 तारिक को एस आई की परीक्षा देने मेरठ जा रही थी साथ मे बनीता की जिठानी रूबी उपाध्याय व पड़ोस का लड़का विपिन भी था जो सभी इस घटना में मौत हो गई , संजय उपाध्याय मूल रूप से गांव खेड़ी बैरागी के रहने वाले है  और परिवार वही रहता है बनीता उपाध्याय व नन्ही बच्ची के सड़क घटना में मौत से पूरे गांव में गम छाया हुआ है और पीड़ित परिवार में कोहराम मचा हुआ है , मौहल्ला बनखंडी में संजय उपाध्याय का आवास है जहाँ  बड़ी संख्या में सामाजिक ,राजनीतिक संगठन के लोग  आवास पर जाकर दुख प्रकट  कर रहे है और हिम्मत दे रहे है इस दौरान कल देर शाम तक लोगो का आना जाना जारी है  , पूर्व मंत्री किरणपाल कश्यप, पूर्व शामली चैयरमैन अरविन्द संगल, समाजवादी पार्टी पिछड़ा वर्ग के प्रदेश कोषाध्यक्ष इंजीनियर बिरजेश शर्मा, प्रदेश सचिव धूमसिंह सैनी ,

मु0 नगर से समाजसेवी नरेंद्र उपाध्याय, श्रवण आर्य, चमन सिंह, सुभाष चंद्र उपाध्याय, नकुल उपाध्याय, मांगेराम उपाध्याय , एम पी उपाध्याय, के पी उपाध्याय, जितेंद्र उपाध्याय, हरियाणा फरीदाबाद से वरिष्ठ समाजसेवी योगी तेजपाल उपाध्याय, रामनिवास राठी, सुशील पांचाल, प्रवीन प्रजापति, देवेंद्र धीमान, शामली प्रभारी ममरेज राणा, रामबीर पंछी, राजपाल चौहान, सतीश उपाध्याय मेरठ से जगमाल आर्य, ,गाजियाबाद से रोशन आर्य, उपाध्याय सेवा समिति के अध्यक्ष बाबूराम उपाध्याय, राकेश उपाध्याय, शामली सभासद अनिल उपाध्याय, धर्मपाल भारद्वाज,

सतपाल उपाध्याय, बबली उपाध्याय, संजय कुमार , सतेंद्र उपाध्याय, समाजवादी पिछड़ा वर्ग शामली संगठन से कुलदीप तोमर, रविन्द्र पाल, भूपसिंह सैनी, नॉशाद, रहीश मिर्जा, साजिद चौधरी, रमेश चंद चौहान सतीश गुज्जर, बिजेंद्र चौहान, हासिम, नीरज प्रजापति, विपिन पुण्डीर जोगी आदि गणमान्य लोगों ने संजय उपाध्याय के आवास पर पहुचकर बहुत दुख प्रकट किया और ईश्वर से पीड़ित परिवार को दुख सहन करने की प्रर्थना की

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अफगानिस्तान में तालिबानों को लगता था इस्लाम खतरे में है, फिर वो सक्रिय हुए,,, सारा अफगानिस्तान बर्बाद हो गया,,।

 


सीरिया में बगदादी के गिरोह को लगा कि इस्लाम खतरे में है,,,,, फिर सीरिया बर्बाद हो गया ,। ओसामा बिन लादेन को भी लगता था कि इस्लाम खतरे में है,,,,। खुद भी खत्म हुआ तब जब उसने मुसलमानों के कई पीढ़ी की करोड़ो आबादी बर्बाद कर दी। लिट्टे को लगता था श्रीलंका में तमिल खतरे में है। लिट्टे खत्म,,, लाखो तमिल खत्म,,,। हिटलर चीखता था कि यहूदी से देश को खतरा है। धर्मांध होकर वहशी हो गया,,, नतीजतन जर्मनी बर्बाद और हिटलर भी खत्म,,,। अब भारत में हिन्दू खतरे में है,,, हिंदुत्व खतरे में है,,,,, परिणाम तो सुनिश्चित ही है। बर्बाद तो राष्ट्र को ही होना है। खत्म आबादी को होना है। 1 अरब से भी अधिक हिन्दू आबादी वाले देश में कोई कहता है कि हिन्दू खतरे में है तो तय मानिए वो लोगो को मौत की ओर घसीट कर ले जा रहा है। अगर वो जनता है तो बुद्धिविहीन मानवीय ढांचा मात्र है। अगर वो नेता है तो निश्चित ही देश को बर्बाद करने वाला साजिशकर्ता है। जो नेता पहले मंहगाई, किसान, महिला सुरक्षा, अपराध दर, पेट्रोल डीजल की कीमत पर नारे सुना रहा था,,, लोगो से वोट मांग रहा था। अब जब वो लोगो को धर्म, धर्मांधता, धार्मिक नफरत, हिन्दू खतरे में है,,,, हिंदुत्व खतरे में है,,, मंदिर, मूर्ति,, आदि की बात कह वोट देने की अपील कर रहा है तो समझिए अजगर ने लोगो के चारो ओर से जकड़ लिया है। अब ये जकड़न बढ़ती जायेगी,,,,, फिर एक दिन उस जकड़न से लोग बौद्धिक दम तोड़ देंगे,,, तब वो अराजक अजगर लोगो को निगल जायेगा,,,,।

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मूलभूत अधिकार क्या होते हैं ???


ऐसे अधिकार जिनके  बिना जीवन जीना संभव नहीं हो वे अधिकार जीवन के मूलभूत अधिकार कहे जाते हैं,और ऐसे अधिकार हैं~ शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, रोटी ,कपड़ा और मकान....रोटी, कपड़ा, मकान, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार हर नागरिक के जीवन की मूलभूत जरूरतें हैं इनके अभाव में कोई भी नागरिक अपना जीवन नहीं जी सकता है, और ना ही अपना समुचित विकास कर सकता है। क्योंकि हर नागरिक को अपनी भूख मिटाने के लिए रोटी चाहिए अपना तन ढकने के लिए कपड़ा चाहिए और रहने के लिए मकान चाहिए यदि वह मानवीय गरिमा के साथ जीना चाहता है तो उसे शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार भी चाहिए। लेकिन विडंबना इस बात की है कि भारत के संविधान में जीवन के वास्तविक मूल अधिकारों को कोई जगह नहीं दी गई और मूल अधिकारों के नाम पर हमारे साथ संविधान निर्माताओं ने धोखा किया एक ऐसा धोखा जिसे देश के नागरिक समझ ही नहीं रहे हैं। संविधान के भाग 3 में अनुच्छेद 12 से लेकर 35 तक नाम मात्र के मूल अधिकार दिए गए हैं

~अनुच्छेद 12 राज्य की परिभाषा बताता है, अनुच्छेद 13,14 में मूलभूत सिद्धांत हैं (इनमें कोई अधिकार नहीं है। अनुच्छेद 15 और 16 राज्य के लिए निर्देश हैं कि वह अपने नागरिकों के लिए शिक्षा और नौकरियों में चाहे तो  प्रावधान कर सकता है.....अनुच्छेद 17 अस्पृश्यता का अंत करता है और उसे दंडनीय बनाता है, इस अनुच्छेद में संविधान निर्माताओं ने बड़ा ही संयंत्र किया है अस्पृश्यता जिस कारण से पैदा हो रही है उस कारण का निवारण नहीं किया अस्पृश्यता के पैदा होने का मूल कारण है जाति और जाति को खत्म नहीं किया बल्कि अस्पृश्यता को दंडनीय घोषित किया...वैसे यह हमारा कोई अधिकार नहीं है यह एक दंडात्मक प्रावधान है जैसे दंडात्मक विधि में होना चाहिए था ना कि संविधान के मूल अधिकारों में अनुच्छेद 18 में उपाधियों का अंत किया गया है फिर भी सरकार के द्वारा धड़ाधड़ उपाधियां बांटी जा रही हैं, आम नागरिकों को इस अनुच्छेद से किसी प्रकार का कोई फायदा नहीं है न ही यह अनुच्छेद किसी नागरिक को किसी प्रकार का कोई अधिकार प्रदान करता है। अनुच्छेद 19 में हमें वाक और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता मिली हुई है...किस अनुच्छेद में हमें स्वतंत्रता नाम मात्र के लिए एक हाथ से दी गई है तो दूसरे हाथ से छीन ली गई है,यानी अनुच्छेद 19 में जिसे हम मूल अधिकार समझ रहे हैं वे सरकार के रहमों करम पर हैं सरकार चाहे तब उन पर रोक लगा सकती है। वैसे स्वतंत्रता शर्तों के अधीन नहीं होती जैसे ही स्वतंत्रता पर शर्तें लगती है वह स्वतंत्रता परतंत्रता में बदल जाती है।

अनुच्छेद 20~ इस अनुच्छेद का लाभ हमें तभी मिलेगा जब हम किसी अपराध में फंस जाएंगे इससे पहले इस अनुच्छेद का हमें कोई लाभ नहीं है, अनुच्छेद 21~ अनुच्छेद 21 कहता है कि यदि किसी भी व्यक्ति की प्राण और दैहिक स्वतंत्रता को सरकार चुनना चाहती हैं तो वह विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया से ही छीन सकती है अन्यथा नहीं। यह अनुच्छेद भी अपराधियों के लिए है । यह हमें कोई अधिकार नहीं देता है। अनुच्छेद 22~ गिरफ्तारी से संरक्षण ~इस अनुच्छेद का लाभ ज्यादातर अपराधियों और अपराध के आरोपियों को मिलता है....अनुच्छेद 23 और 24 में दंडात्मक प्रावधान है जिससे हमें किसी भी प्रकार का कोई मूल अधिकार नहीं मिलता है। अनुच्छेद 25 से लेकर 28 तक धार्मिक आजादी दी गई है जिसे मूल अधिकारों में कतई नहीं होना चाहिए था लेकिन संविधान निर्माताओं ने देशवासियों के साथ धोखा करके इसे मूल अधिकारों में को रख दिया है। अनुच्छेद 29 और 30 में अल्पसंख्यकों के सांस्कृतिक अधिकार दिए गए हैं। (जो कोई मूल अधिकार नहीं है।) अनुच्छेद 31 में संपत्ति को मूल अधिकार घोषित किया गया था जिसे बाद में हटा दिया गया, अनुच्छेद 32 में संवैधानिक उपचारों का अधिकार दिया गया है

~यह अधिकार देखने में तो बड़ा सुंदर लगता है लेकिन हकीकत में यह षड्यंत्र है अगर हमारे खिलाफ कोई छोटा से छोटा अपराध हो जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई करने की प्रक्रिया बहुत सरल है यदि हमारे कथित मूल अधिकारों का उल्लंघन होता है तो इसकी प्रक्रिया बड़ी जटिल है आपको सुप्रीम कोर्ट ही जाना पड़ेगा,अमीर आदमी सुप्रीम कोर्ट में आसानी से जा सकता है लेकिन गरीब आदमी सुप्रीम कोर्ट की दहलीज तक नहीं पहुंच सकता है। (अनुच्छेद 32 से ही अंदाजा लगा सकते हैं कि जो भी मूल अधिकार हैं वे अमीरों के लिए हैं गरीबों के लिए नहीं) मूल अधिकारों को लागू कराने की प्रक्रिया बहुत सरल होनी चाहिए थी यदि किसी व्यक्ति के मूल अधिकार का उल्लंघन हो तो पुलिस थाने में जाकर के f.i.r. कराएं या अपने समीप के किसी कोर्ट में जाकर अर्जी दे लेकिन संविधान निर्माताओं ने इस प्रकार की व्यवस्था मूल अधिकारों को लागू कराने के लिए नहीं की, अनुच्छेद 33,34, 35 में भी नागरिकों को किसी प्रकार का मूल अधिकार नहीं मिलता है। संविधान के भाग 3 में जो कुछ भी दिया है वह राज्य के लिए निर्देश है......अनुच्छेद 12 से लेकर 35 तक नागरिकों का कोई भी अधिकार नहीं है नागरिकों के मूल अधिकार होने चाहिए थे शिक्षा,स्वास्थ्य, रोजगार,रोटी कपड़ा और मकान। सरकार हर नागरिक को निशुल्क शिक्षा प्रदान कराती, निशुल्क इलाज की व्यवस्था कराती और सभी नागरिकों को रोजगार की गारंटी देती तो हर नागरिक अपने रोटी, कपड़ा और मकान का भी इंतजाम कर लेता लेकिन विडंबना इस बात की है कि संविधान निर्माताओं ने जीवन से जुड़े हुए मूलभूत अधिकारों को संविधान में कोई जगह प्रदान ही नहीं की, जिसे हर नागरिक को समझना चाहिए।नोट~ मूल अधिकार और अल्पसंख्यक समुदाय तथा कबायली क्षेत्रों की समिति के अध्यक्ष सरदार बल्लभ भाई पटेल थे, इसी समिति ने संविधान के मूलभूत अधिकारों को तय किया था। सरदार दिनेश सिंघ एलएल.एम.  

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मोदी एवं योगी सरकार ने भयमुक्त वातावरण दिया और अभूतपूर्व विकास हो रहा हैं - वीरेंद्र सिंह


झिंझाना 13 नंबर। किसान आंदोलन के सहारे केवल लोकदल को खड़ा करने का काम हो रहा है। जबकि किसान अपने खेत में मस्त और व्यस्त है। मोदी योगी सरकार में जनता भयमुक्त वातावरण के साथ अभूतपूर्व विकास देख रही है। निकटवर्ती गांव पावटी कला में शादी समारोह में शामिल होने पहुंचे विधान परिषद सदस्य चौधरी वीरेंद्र सिंह जासाला

ने पत्रकार से वार्ता में उपरोक्त विचार व्यक्त किए। किसान आंदोलन के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि वर्ष 1987 में चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत ने किसान हित में आंदोलन चलाया था। वह सीधे और सरल व्यक्तित्व के धनी थे। मगर उनके बाद अब इस आंदोलन में पश्चिमी उत्तर प्रदेश और देश का किसान शामिल नहीं है।

उन्होंने कहा किसान आंदोलन के सहारे तमाम विपक्षी पार्टियां एकजुट होकर अपने अस्तित्व को बचाने में लगी है। और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में तो किसान आंदोलन के सहारे राष्ट्रीय लोक दल खड़ा होना सोच रही है। पूर्व मंत्री और विधान परिषद सदस्य चौधरी ने कहा, देश में मोदी एवं प्रदेश में योगी सरकार द्वारा भयमुक्त वातावरण दिया गया है।

आज शामली जनपद में 46000 महिलाएं समूह में कार्य कर लाभान्वित हो रही है। गांव, कस्बे एवं शहरों में 18 से 24 घंटे बिजली उपलब्ध हो रही है। प्रदेश में सड़कों के चौड़ीकरण एवं निर्माण कार्यों से अभूतपूर्व विकास कार्य हो रहा हैं। विभिन्न प्रकार की सरकारी योजनाओं का लाभ आम जनता को मिल रहा है, जो पहले नहीं मिलता था। विधान परिषद सदस्य

वीरेंद्र सिंह शनिवार को निकट के गांव पावती कला में चौधरी चरण सिंह के निवास स्थान पर पत्रकार वार्ता में उपरोक्त बातें कहीं आओ में वह शादी समारोह में शामिल होने पहुंचे थे जिसके बाद उन्होंने चौधरी प्रदीप

एवं चौधरी चरण सिंह के निवास स्थान पर भी जनसंपर्क किया। इस अवसर पर पूर्व प्रधान योगेश चौहान, प्रदीप कुमार,विपिन चौहान,पूर्व प्रधान शिवकुमार, डॉ सुरेंद्र चौहान आदि ग्रामीण समर्थक एवं रिश्तेदार उपस्थित थे। प्रेम चन्द वर्मा

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