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सियासतदानों की सांसे फुलाती समाजवाद की अबिरल धारा , पापा अरविंद सिंह गोप की छत्रछाया में अबिरल सिंह सीख रहे हैं राजनीतिक दांव- पेंच


कोरोना काल की जनसेवा के बाद पापा की राजनीतिक विरासत की पहरेदारी के लिए बढें कदम, बाराबंकी। रामनगर विधानसभा क्षेत्र में बह रही सरयू नदी के तीरे समाजवाद की अविरल धारा धीरे-धीरे बढ़ती जा रही है। आवाम भी इसे आत्मसात करता दिख रहा है। जबकि यह अबिरल धारा कई सियासतदानों की सांसे भी फुलाती नजर आ रही है? जी हां अपने पापा पूर्व मंत्री अरविंद सिंह गोप की छत्रछाया में उनके पुत्र अबिरल सिंह राजनीत के दांव- पेंचों को सीखने में जुटे हुए हैं। अबिरल अपने पिता के राजनीतिक विरासत की पहरेदारी के प्रशिक्षण में दिन-ब-दिन उत्तीर्ण हो रहे हैं। जिसके चलते कई राजनीतिक दरबारों में अंदरूनी स्तर पर हलचलें तेज हो गई हैं। मतलब सियासी ब्लड प्रेशर घट बढ़ रहा है? राजनीति में राजनेताओं के वारिसों का आगमन कोई नई बात नहीं है। देश व प्रदेश के तमाम नेताओं ने अपनी संतानों को अपनी विरासत पर काबिज किया है।

इसमें कई असफल रहे हैं। तो कई राजनेताओं के वारिसों ने अपने को स्थापित कर रखा है। बाराबंकी जनपद  में भी कई राजनेताओं ने अपने पुत्रों व पुत्रियों को राजनीत में उतार कर पार्टी का पदाधिकारी व जनप्रतिनिधि बनाया है। इसी श्रंखला में प्रदेश के पूर्व मंत्री अरविंद सिंह गोप के युवा पुत्र अबिरल सिंह भी अपने पिता की उंगली को पकड़कर राजनीति की हर परीक्षा को पास करने की उधेड़बुन में जुटे नजर आते हैं। अत्यंत सरल तथा बड़ों का सम्मान करने में आगे एवं हमउम्र को अपना दोस्त बना देने में माहिर अबिरल सिंह अपने पापा की राजनीतिक विरासत की पहरेदारी को लेकर सतर्क दिखते हैं! कोरोना काल में जमकर जनसेवा करने वाले अबिरल के अंदर सेवा का अविरल भाव भविष्यगत सेवा क्रांति का संकेत देता है। वर्तमान में वे अपने पापा अरविंद सिंह गोप के साथ ज्यादातर राजनीतिक कार्यक्रमों में भाग लेते नजर आ रहे हैं। समाजवादी पार्टी के संगठन स्तर से लेकर बाढ़ पीड़ितों की मदद के जितने भी कार्यक्रम आयोजित हुए अविरल अपने पापाश्री  के बगल खड़े नजर आए। जनपद के राजनीतिक घरानों में इस बात की चर्चा है कि गोप अबिरल सिंह को अपने आभामंडल के रहते हुए आगे मजबूती की ओर अग्रसर कर रहे हैं। शायद उन्होंने यह गुण अपने नेता पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव से सीखा है।

श्री यादव ने राजनीत में ताकतवर होने के मध्य ही अपने पुत्र अखिलेश यादव को प्रदेश के मुख्यमंत्री के पद पर सुशोभित कर दिया था। ऐसे में गोप के दिमाग में क्या चल रहा है! इसकी पड़ताल करने में तमाम राजनीतिक दिमाग खर्च हो रहे हैं। बाराबंकी जनपद के नेताओं की यदि हम बात करें तो कई नेता अपने पुत्रों को विधायक व मंत्री बनवा चुके हैं। इनमें से कई एक बार तो अपने पिता के नाम पर सफल हुए!लेकिन वह अपना कोई व्यक्तित्व नहीं बना पाए? जिसके चलते फिर उन्हें दोबारा राजनीतिक सफलता की हल्दी नहीं लग पाई? कई राजनेता पुत्र जनपद की राजनीति में जल्दी ही अवतरित होने की तैयारी में भी है! तो वही कुछ ऐसे भी राजनेता है जो अपने पुत्र को राजनीति में लांच करने के बाद भी उन्हें सफलता नहीं दिलवा पाए हैं?

  ऐसे में अरविंद सिंह गोप ने मंझे हुए राजनीतिक खिलाड़ी की तरह सर्वप्रथम अपने पुत्र अबिरल को जमीनी सेवा की ओर अग्रसर किया। कोरोना काल से जनसेवा में जुटे अबिरल ने अब तक आवाम के बीच मदद के कई कदमों को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाया हैं। पूर्व मंत्री अरविंद सिंह गोप का अगला कदम क्या है यह तो फिलहाल वही जानें? लेकिन एक समय में उन्होंने अपने बलबूते पर बाराबंकी जनपद की सभी 6 सीटों पर समाजवादी का परचम लहराया था। उनके नेतृत्व में समाजवादी पार्टी ने ऐतिहासिक सफलता हासिल की थीं। जिसे दोबारा हासिल करना अब पार्टी के लिए चुनौती है? गोप समर्पित व  कट्टर समाजवादी हैं ।यह अलग बात है कि अरविंद सिंह गोप के विरुद्ध पार्टी के ही कुछ बेचैन नेता कोई न कोई षड्यंत्र  कभी न कभी किया ही करते हैं?

ऐसे में जरूरी है कि रामनगर विधानसभा क्षेत्र जहां से वह विधायक रहे हैं। वहां की पहरेदारी में उनका परिवारिक  टच गहरा होता रहें।अबिरल इसकी भरपाई  करते नजर आ रहे हैं। जबकि पहले से ही उनके भाई जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष अशोक कुमार सिंह व बबलू सिंह तथा भतीजे हर्षित राजकुमार रामनगर की जनता के बीच काफी घुले मिले हुए हैं। स्पष्ट है कि सरयू के तीरे लगातार बढ़ती समाजवाद की अविरल धारा आवाम में भी आत्मसात हो रही है। यह धारा कई सियासतदानों की सांसो को फुलाती ही जा रही है? जो कई राजनीतिक घरानो अथवा राजनेताओं के लिए  सियासी परेशानी का सबब  है? मतलब सियासी गुणा-भाग का ब्लड प्रेशर घट बढ़ रहा है? जबकि अबिरल धारा है कि बढ़ती ही जा रही है!

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