ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (A.I.M.T.C.) के आह्वान पर इस वर्ष राष्ट्रीय ड्राइवर दिवस पूरे देश में भव्यता, गरिमा और सम्मान के साथ मनाया गया। देश के विभिन्न राज्यों और शहरों में से संबद्ध परिवहन संगठनों द्वारा विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसमें ड्राइवर भाइयों के अतुलनीय योगदान को नमन करते हुए उनके प्रति सम्मान, संवेदना और कृतज्ञता व्यक्त की गई।
जिम्मेदार ड्राइविंग और सड़क सुरक्षा का संकल्प
राष्ट्रीय ड्राइवर दिवस के अवसर पर देशभर में ड्राइवर भाइयों को सड़क सुरक्षा नियमों के पालन, नशामुक्त रहकर वाहन संचालन और अनुशासित ड्राइविंग की शपथ दिलाई गई। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाना और सुरक्षित भारत की दिशा में सामूहिक प्रयास को मजबूती देना रहा।
“सड़क का सच्चा प्रहरी है ड्राइवर”
इस अवसर पर डॉ. हरीश सभरवाल ने चालक भाइयों को “सड़क का सच्चा प्रहरी” बताते हुए कहा—
“सुरक्षित भारत की नींव सुरक्षित और जागरूक ड्राइवरों पर ही टिकी है।”
उन्होंने भावुक शब्दों में कहा कि जब पूरा देश सो रहा होता है, तब ड्राइवर भाई देश की सीमाओं से लेकर हर घर की रसोई तक आवश्यक वस्तुएँ पहुँचाने में जुटे रहते हैं। तपती धूप, कड़ाके की ठंड, बारिश और तूफानों की परवाह किए बिना, अपनों से दूर रहकर वे भारत की अर्थव्यवस्था के पहियों को निरंतर गति देते हैं।
देश की सबसे बड़ी परिवहन संस्था की भूमिका
डॉ. सभरवाल ने जानकारी दी कि ए.आई.एम.टी.सी. देश की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी परिवहन संस्था है, जो कार्गो और पैसेंजर—दोनों सेगमेंट का प्रतिनिधित्व करती है। वर्तमान में संस्था से लगभग 95 लाख ट्रक ऑपरेटर, 16 लाख बस ऑपरेटर, 3500 परिवहन संस्थाएँ और करीब 40 लाख ड्राइवर जुड़े हुए हैं।
उन्होंने चिंता व्यक्त की कि देश में लगभग 50 लाख ड्राइवरों की कमी है, जिसका एक प्रमुख कारण इस पेशे में घटता सामाजिक सम्मान है।
ऐतिहासिक घोषणा: “ड्राइवर” से “पायलट/कप्तान”
इसी पृष्ठभूमि में राष्ट्रीय ड्राइवर दिवस पर ए.आई.एम.टी.सी. ने एक ऐतिहासिक घोषणा की। अब ड्राइवरों को हवाई जहाज़ के पायलट के समकक्ष सम्मान देने की दिशा में पहल करते हुए उन्हें “ड्राइवर” के स्थान पर “पायलट” या “कप्तान” कहे जाने को प्रोत्साहित किया जाएगा। साथ ही, उनके लिए सम्मानजनक वर्दी और कैप उपलब्ध कराने के प्रयास भी तेज़ किए जाएंगे।
सामाजिक सुरक्षा और कल्याण पर ज़ोर
डॉ. सभरवाल ने बताया कि संस्था चालक भाइयों और बहनों की सामाजिक सुरक्षा को लेकर सरकार के साथ निरंतर संवाद कर रही है।
मुख्य प्रयासों में शामिल हैं—
- ड्राइवर्स सामाजिक सुरक्षा कल्याण बोर्ड का गठन
- प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) में ड्राइवरों की भागीदारी
- आयुष्मान भारत योजना के तहत ₹5 लाख तक निःशुल्क इलाज
- श्रम कानूनों के अंतर्गत ई.एस.आई. और पी.एफ. सुविधाओं की पहुँच
हाईवे पर सुविधाएँ और प्रशिक्षण
ड्राइवरों की सुविधा और सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय राजमार्गों पर हर 50 किलोमीटर पर सुरक्षित पार्किंग, स्वच्छ भोजन और ट्रॉमा सेंटर की माँग दोहराई गई।
डॉ. सभरवाल ने बताया कि दिल्ली–मुंबई कॉरिडोर पर लगभग 300 ऐसी सुविधाओं पर कार्य शुरू हो चुका है। इसके साथ ही ए.एस.डी.सी. के सहयोग से देश के 800 जिलों में निःशुल्क प्रशिक्षण और एक विशेष एम्प्लॉयमेंट एक्सचेंज की व्यवस्था की जा रही है।
भारत एसोसिएशन ऑफ रोड सेफ्टी वॉलिंटियर्स के साथ मिलकर सड़क दुर्घटनाओं में कमी और नशामुक्ति के लिए भी निरंतर अभियान चलाए जा रहे हैं।
देशवासियों से अपील
अंत में डॉ. सभरवाल ने सभी परिवहन साथियों और देशवासियों से अपील की कि वे ड्राइवर भाइयों को सम्मान दें और सड़क सुरक्षा को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बनाएँ। उन्होंने कहा—
“जब मेरा ड्राइवर भाई सुरक्षित और सम्मानित होगा, तभी भारत वास्तव में सुरक्षित होगा।”
संपूर्ण राजनीतिक समाचार पत्रिका “विधायक दर्पण” के लिए नई दिल्ली से पत्रकार ऊषा माहना की ख़ास रिपोर्ट
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