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2022 विधानसभा चुनाव में अपनी स्थिति को सुधारने में एड़ी चोटी का जोर लगा रही है राष्ट्रीय लोक दल


यदि माहौल के अनुसार रिजल्ट देने में कामयाब रही तो तीसरे चौथे नंबर की जंग में खड़ी नजर आ सकती है राष्ट्रीय लोक दल पार्टी जबकि 2012 चुनाव में मात्र एक विधायक पर सिमट गई थी पार्टी आपको बता दें कि उलटफेर का दूसरा नाम होता है चुनाव 2017 विधानसभा चुनाव में गठबंधन के बावजूद भी कांग्रेस से ज्यादा सीटें लेकर अपना दल ने 9 विधानसभा पर जीत हासिल कर सभी को चौंकाया था और प्रदेश में चौथे नंबर की पार्टी बनी थी। पांचवे पायदान पर 7 विधायक के साथ खिसक

गई थी कांग्रेस, ओमप्रकाश राजभर की पार्टी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी ने भी 4 विधानसभा सीटें जीतकर छठे स्थान हासिल किया थाराष्ट्रीय लोकदल इस बार अगर अच्छा प्रदर्शन कर पाई तो बीजेपी समाजवादी पार्टी बसपा कॉन्ग्रेस के बाद प्रदेश की चौथे या पांचवें नंबर की बड़ी पार्टी हो सकती है। इस बार गठबंधन के साथ 36 सीटों पर चुनाव लड़ रही है राष्ट्रीय लोकदल। संभावित है कि,थाना भवन से राव अब्दुल वारिस लोकदल, चरथावल से पंकज मलिक समाजवादी पार्टी,

मीरापुर से पूर्व सांसद कादिर राणा के पुत्र शाह मोहम्मद चुनाव लड़ सकते हैं। वही शामली विधानसभा सीट से अखिल बंसल व मुजफ्फरनगर की विधानसभा सीट से योगराज सिंह पर खेल सकती है अपना दांव लेकिन बागपत में अभी नहीं खोले पार्टी ने अपने पत्ते, मुजफ्फरनगर की 6 विधानसभा सीटों में से एक समाजवादी पर हैं और पांच राष्ट्रीय लोकदल पर गई है। वही उम्मीदवारों की सूची जारी होने के बाद दावेदारों की होने

वाली बगावत को रोकना भी होगा एक बड़ी चुनौती सभी राजनीतिक पार्टियों के सामने , पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ज्यादातर सीटें लोकदल को दी गई है। कुछ समाजवादी के कैंडिडेट आरएलडी के चुनाव चिन्ह पर चुनाव लडेंगे। अखिलेश यादव का बड़ा ऐलान है कि किसान आंदोलन के शहीदों को 25 लाख देंगे, 2022 में सरकार बनी तो 'किसान शहादत सम्मान राशि' देंगे, किसानों का जीवन अनमोल होता हैl इस बार 2022 के विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय लोक दल के पास खोने को कुछ नहीं है क्योंकि 2017 के विधानसभा चुनाव में रालोद को केवल एक ही विधानसभा सीट को भी बागपत की छपरोली पर जीत हासिल हुई थी उस पर भी उनके जीते हुए विधायक द्वारा सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया गया था ऐसे में शून्य पर होने के बावजूद राष्ट्रीय

लोक दल ने इन 5 वर्षों में अपनी विपक्ष की भूमिका बखूबी निभाई और इसी का नतीजा है कि इस बार राष्ट्रीय लोक दल को कोई भी हल्के में गिरने को तैयार नहीं है जहां एक तरफ इस बार राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी अजीत सिंह की मृत्यु होने के बाद वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी के साथ सहानुभूति है वही किसान आंदोलन से पार्टी को मिली संजीवनी का सहारा भी जबरदस्त है और साथ ही साथ समाजवादी मुखिया अखिलेश यादव द्वारा रालोद के साथ किया गया गठबंधन भी रालोद को ताकत प्रदान करता है आप 2022 के विधानसभा चुनाव में रालोद कितनी सीटें जीतने में कामयाब होती है यह तो आने वाला समय ही बताएगा लेकिन इतना तय है कि इस बार राष्ट्रीय लोकदल के पास होने को तो कुछ नहीं अरपाने को सब कुछ है या यूं कहिए कि इस बार उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय लोक दल चौथे या पांचवें नंबर की पार्टी बन सकती है जिसके आसार नजर आ रहे हैं इस नंबर के लिए जंग कांग्रेसी नजर आ रही है क्योंकि यह तो स्वभाविक है कि पहले 3 पर समाजवादी भारतीय जनता पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ही रहेंगी ऊपर नीचे कोई सी भी रहे लेकिन चौथे नंबर के लिए कांग्रेश राष्ट्रीय लोक दल के साथ-साथ कांग्रेश को 2017

के विधानसभा चुनाव में पढ़ने वाली अपना दल एस भी ताल ठोक रही है। वहीं समाजवादी गठबंधन में आने को अतुल आम आदमी पार्टी भी इस बार उत्तर प्रदेश में अपना खाता खोलने को उत्सुक है। लेकिन 2022 विधानसभा चुनाव के नतीजे को जो सबसे ज्यादा प्रभावित करने वाली बात है वही है कि बसपा कि इस बार रणनीति क्या होगी जिस तरह बसपा सुप्रीमो ने पूर्व में ही घोषित कर दिया है कि उनकी 2007 वाली रणनीति रहेगी जिसमें उन्होंने प्रचंड बहुमत से सरकार बनाई थी यदि उनकी घोषणा के अनुसार उनकी रणनीति रही तो निश्चित रूप से किसी का भी खेल बिगाड़ने में सक्षम रहेगी बहुजन समाज पार्टी लेकिन चुनावी इतना करीबी होने के आसार हैं कि कौन हारेगा कौन जीतेगा यह अभिषेक कह पाना मुश्किल होगा लेकिन इतना तय रहेगा कि जहां

उत्तर प्रदेश में सीधा मुकाबला भारतीय जनता पार्टी और सपा गठबंधन से होता नजर आ रहा है वही समाजवादी की राह में सबसे बड़ा रोड़ा बहुजन समाज पार्टी साबित होगी क्योंकि बहुजन समाज पार्टी द्वारा टिकटों का वितरण एवं उम्मीदवारों का जातिगत समीकरण ही निर्धारित करेगा कि अगली सरकार समाजवादी गठबंधन की होगी या बीजेपी की और अंक तालिका में कौन सी पार्टी किस स्थान पर होगी यह केवल बसपा के टिकट वितरण पर निर्धारित करेगा और यह सब आने वाला समय ही बता पाएगा होगा क्या लेकिन सबसे बड़ा सवाल है कि जहां राष्ट्रीय लोकदल के पास अच्छा प्रदर्शन कर सूची में ऊपर स्थान पाने का मौका है वही बहुजन समाज पार्टी के पास भी मौका है परदेस में कुछ बड़ा कर दिखाने का लेकिन जहां बहुजन समाज पार्टी बड़ा करने के लिए आगे बढ़ेगी तो वहीं समाजवादी गठबंधन को नुकसान होना तय है आने वाला समय ही बताएगा कि उत्तर प्रदेश में किसकी बनेगी सरकार।

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1 comment:

  1. योगराज सिंह मुज्जफफरनगर सदर से लडेंगे

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