सहारनपुर। देवबंद में मंगलवार से शुरू होने वाली कांग्रेस की "वोट अधिकार पदयात्रा" को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। देवबंद से पदयात्रा का आगाज़ होना था, लेकिन प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए डॉ. शाज़िया नाज़ एडवोकेट समेत तमाम कांग्रेस पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को सुबह से ही नज़रबंद कर दिया।
कांग्रेस खेमे का आरोप है कि प्रदेश सरकार विपक्ष की आवाज़ दबाने के लिए पुलिस का सहारा ले रही है। कार्यकर्ताओं ने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण यात्रा निकालना उनका संवैधानिक अधिकार है, लेकिन सरकार ने तानाशाही रवैया अपनाकर नेताओं को घरों में कैद कर दिया।
नज़रबंदी के दौरान डॉ. शाज़िया नाज़ ने कड़े शब्दों में बयान जारी किया—
"यह लोकतंत्र की खुली हत्या है। हमें जनता से मिलने से रोका जा रहा है क्योंकि हम वोट चोरी जैसे असली मुद्दे पर सवाल उठा रहे हैं। लेकिन सरकार भूल गई है कि कांग्रेस की आवाज़ को कभी कैद नहीं किया जा सकता।"
जिला कांग्रेस अध्यक्ष संदीप राणा ने भी प्रशासन को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि कांग्रेस कार्यकर्ता इस तानाशाही के खिलाफ बड़ा आंदोलन छेड़ेंगे।
फिलहाल, नज़रबंदी के कारण पदयात्रा की शुरुआत नहीं हो सकी है। इससे सहारनपुर की राजनीति में भूचाल आ गया है और प्रशासन की भूमिका को लेकर सवाल उठने लगे हैं। "विधायक दर्पण" संपूर्ण राजनैतिक समाचार पत्रिका के लिए सहारनपुर, उत्तर प्रदेश से पत्रकार गुलवेज आलम की रिपोर्ट
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